REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
संसाधन एवं विकास
उपयोगिता किसी वस्तु को संसाधन बनाती है, लेकिन तकनीक, खर्च, संस्कृति, समय और मानवीय ज्ञान तय करते हैं कि उसका उपयोग कब और कैसे होगा।
मुख्य बिंदु
- उपयोगिता किसी वस्तु को संसाधन बनाती है, लेकिन तकनीक, खर्च, संस्कृति, समय और मानवीय ज्ञान तय करते हैं कि उसका उपयोग कब और कैसे होगा।
- संसाधनों का वर्गीकरण उत्पत्ति, समाप्त होने की संभावना, स्वामित्व और विकास की स्थिति के आधार पर किया जाता है; प्राकृतिक, मानव-निर्मित और मानव संसाधन एक दूसरा उपयोगी वर्गीकरण है।
- नवीकरणीय का अर्थ असीमित नहीं है: यदि निकासी, कटाव या कटाई प्राकृतिक भरपाई से तेज हो, तो पानी, मिट्टी और वन भी घटते हैं।
- संसाधन नियोजन में पहचान और आकलन को उचित तकनीक, कौशल, संस्थाओं तथा स्थानीय, राज्य और राष्ट्रीय स्तर के संतुलित विकास से जोड़ा जाता है।
- आर्थिक वृद्धि अधिक उत्पादन बताती है, जबकि विकास यह भी देखता है कि स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता और पर्यावरण की गुणवत्ता बेहतर हुई या नहीं।
- सतत विकास आज की जरूरतें पूरी करता है, लेकिन पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता और आने वाली पीढ़ियों की जरूरतें पूरी करने की क्षमता को कमजोर नहीं करता।
- भूमि अवक्रमण और मृदा अपरदन के लिए कारण के अनुसार नियंत्रित चराई, पेड़ लगाना, समोच्च जुताई, पट्टीदार खेती, रक्षक मेखला और सावधानी से सिंचाई जैसे उपाय चाहिए।
- राजस्थान में सौर और पवन ऊर्जा की अच्छी संभावना के साथ पानी की कमी भी है, इसलिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पानी का कुशल उपयोग संसाधन नियोजन के मुख्य उदाहरण हैं।
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