REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
मौर्य तथा गुप्त साम्राज्य एवं गुप्तोत्तर काल
चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, बिंदुसार ने उसका विस्तार किया और अशोक ने अभिलेखों तथा धम्म से साम्राज्यिक शासन को लोककल्याण और नैतिक आचरण से जोड़ा।
मुख्य बिंदु
- चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य साम्राज्य की स्थापना की, बिंदुसार ने उसका विस्तार किया और अशोक ने अभिलेखों तथा धम्म से साम्राज्यिक शासन को लोककल्याण और नैतिक आचरण से जोड़ा।
- मौर्य शासन राजा, अधिकारियों, प्रांतों, कर-व्यवस्था, सड़कों और विशाल सेना के सहारे काफी केंद्रीकृत था, फिर भी रोज़मर्रा के कई काम स्थानीय समुदाय संभालते थे।
- मौर्य पतन के बाद शुंग, सातवाहन, हिंद-यूनानी, शक और कुषाण शक्तियों ने क्षेत्रीय और सीमा-पार राजनीतिक संबंध बनाए, जिनके साथ व्यापार, सिक्कों और बौद्ध कला का विस्तार हुआ।
- गुप्तों ने उत्तर भारत में फिर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा किया; समुद्रगुप्त की प्रयाग प्रशस्ति जीते गए शासकों के साथ अलग-अलग तरह के संबंध बताती है, जबकि चंद्रगुप्त द्वितीय ने पश्चिम की ओर विस्तार किया।
- गुप्त प्रशासन मौर्य प्रशासन की तुलना में कम केंद्रीकृत था और उसमें प्रांत, जिले, गाँव, स्थानीय प्रभावशाली समूह, शिल्पी-व्यापारी संघ, सामंत तथा भूमि अनुदान अधिक महत्त्वपूर्ण बने।
- गुप्त और गुप्तोत्तर संरक्षण में संस्कृत साहित्य, मंदिर स्थापत्य, मूर्तिकला, गणित, खगोल और चिकित्सा फले-फूले, लेकिन सामाजिक असमानता और अस्पृश्यता भी बनी रही।
- गुप्त शक्ति कमज़ोर होने पर क्षेत्रीय राज्य मज़बूत हुए; हर्षवर्धन ने उत्तर भारत के बड़े हिस्से पर शासन किया, जबकि चालुक्य और पल्लव शक्तियों ने दक्कन तथा दक्षिण भारत की राजनीति और मंदिर संस्कृति को आकार दिया।
- राजस्थान के लिए अशोक को बैराट से, गुप्त सिक्का-प्रचलन को बयाना मुद्रा-भंडार से और गुप्तोत्तर राजनीति को भीनमाल तथा गुर्जर-प्रतिहारों से जोड़कर याद रखें।
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