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REET लेवल 1 अध्ययन सामग्री

प्राथमिक स्तर की हिन्दी व्याकरण — शब्द-भेद, काल, वाच्य तथा वाच्य परिवर्तन

REET लेवल-1 की प्राथमिक हिन्दी व्याकरण चार आपस में जुड़े विषय शामिल करती है — शब्द-भेद, काल, वाच्य तथा वाच्य परिवर्तन — और इन सबको कक्षा 1 से 5 की समझ-सीमा के भीतर रखा जाता है। बच्चे आठ शब्द-भेद देखते हैं (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक); इनमें पहले चार विकारी होते हैं और अंतिम चार अविकारी। काल तीन रूपों में परिचित कराया जाता है — वर्तमान, भूत, भविष्यत् — और वह भी परिचित क्रियाओं के माध्यम से। वाच्य (कर्तृ, कर्म, भाव) अमूर्त परिभाषा से नहीं, उदाहरण-वाक्यों से समझाया जाता है, और वाच्य परिवर्तन का अभ्यास इतना ही कराया जाता है कि बच्चे कर्ता-प्रधान वाक्य को कर्म-प्रधान वाक्य में बिना अर्थ बिगाड़े बदल सकें।

मुख्य बिंदु

  • मानक प्राथमिक हिन्दी व्याकरण में आठ शब्द-भेद होते हैं — पहले चार (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया) विकारी और अंतिम चार (क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक) अविकारी।
  • प्राथमिक स्तर पर तीन काल पढ़ाए जाते हैं — वर्तमान, भूत, भविष्यत् — और इनकी पहचान NCERT पुस्तकों के सरल क्रिया-अंतों से कराई जाती है।
  • वाच्य तीन प्रकार के होते हैं — कर्तृ, कर्म, भाव — और क्रिया का अनुरूपता कर्तृ-वाच्य में कर्ता से, कर्म-वाच्य में कर्म से होती है।
  • कर्तृ से कर्म वाच्य परिवर्तन में तीन बदलाव साथ होते हैं — कर्ता पर के द्वारा परसर्ग, क्रिया-रूप कर्म-अनुसार, और वाक्य का केन्द्र कर्ता से हटकर कर्म पर।
  • विशेषण को क्रिया-विशेषण से मिला देना तथा के द्वारा वाले कर्ता को कर्तृ-वाच्य मान लेना — REET उत्तर-कुंजी में बार-बार चिह्नित कक्षा 1-5 की दो सबसे आम भूलें हैं।

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मुख्य बिंदु

REET लेवल-1 की प्राथमिक हिन्दी व्याकरण चार आपस में जुड़े विषय शामिल करती है — शब्द-भेद, काल, वाच्य तथा वाच्य परिवर्तन — और इन सबको कक्षा 1 से 5 की समझ-सीमा के भीतर रखा जाता है। बच्चे आठ शब्द-भेद देखते हैं (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रिया-विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक); इनमें पहले चार विकारी होते हैं और अंतिम चार अविकारी। काल तीन रूपों में परिचित कराया जाता है — वर्तमान, भूत, भविष्यत् — और वह भी परिचित...

कक्षा में उपयोग

  • शिक्षार्थी स्तर: कक्षा 1-5
  • सामान्य भ्रम: कक्षा 1-5 के अनेक बच्चे सोचते हैं कि क्रिया-विशेषण भी संज्ञा की विशेषता बताता है, क्योंकि दोनों के नाम में विशेषण शब्द आता है।
  • शिक्षक कार्य: श्यामपट्ट पर दो-स्तंभ चार्ट बनाइए — बाएँ संज्ञा और उससे जुड़ा विशेषण (लाल फूल), दाएँ क्रिया और उससे जुड़ा क्रिया-विशेषण (धीरे चलना) — और बच्चों से नए उदाहरण सही स्तंभ में रखवाइए।
  • अधिगम गतिविधि: चार रंग-कार्ड (हरा-संज्ञा, पीला-क्रिया, नीला-विशेषण, लाल-क्रिया-विशेषण) रखिए और कोई छोटा वाक्य बोलिए; बच्चे प्रत्येक रेखांकित शब्द के लिए सही रंग-कार्ड उठाते हैं।
  • आकलन जांच: बच्चे को नया वाक्य बच्चा धीरे-धीरे चल रहा है दिखाइए और पूछिए कि क्रिया की विशेषता कौन-सा शब्द बता रहा है; सही उत्तर धीरे-धीरे है, जो क्रिया-विशेषण है।

सामान्य प्रश्न जाल

  • कर्तृ-वाच्य को काल मान लेना — REET अक्सर इसे चार-विकल्प काल सूची में डालकर जल्दी पढ़ने वाले परीक्षार्थी को पकड़ता है।
  • के द्वारा को कर्तृ-वाच्य का चिह्न मान लेना — वास्तव में यह कर्म-वाच्य का पहचान-चिह्न है, क्योंकि कर्ता परसर्ग के पीछे है।
  • क्रिया-विशेषण को संज्ञा की विशेषता बताने वाला कह देना — यह कार्य विशेषण का है; क्रिया-विशेषण सदा क्रिया से जुड़ा रहता है।
  • केवल चार शब्द-भेद (विकारी) गिनकर अविकारी चार वर्ग भूल जाना — REET कभी छह या चार विकल्प देकर यह जाँचता है।
  • यह भूल जाना कि कर्म-वाच्य में क्रिया का लिंग-वचन कर्म से मिलता है, मूल कर्ता से नहीं।

प्राथमिक स्तर पर व्याकरण की पढ़ाई ऐसी क्यों

कक्षा 3 के बच्चे को व्याकरण के लम्बे नियमों की सूची नहीं चाहिए। उसे चाहिए हिन्दी वाक्य का आकार और लय — ताकि वह कहानी सही ठहराव के साथ पढ़ सके, अपने परिवार के बारे में तीन-चार पंक्तियाँ लिख सके, और सरल प्रश्न का पूरा वाक्य में उत्तर दे सके। इसी कारण REET लेवल-1 की भाषा-I पाठ्यचर्या हिन्दी व्याकरण को चार छोटे टुकड़ों में बाँटती है — शब्द-भेद, काल, वाच्य तथा वाच्य परिवर्तन — और शिक्षक से कहती है कि इन्हें NCERT रिमझिम जैसी...

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