मुख्य तथ्य

  • यह विषय ग्रंथ और सिद्धांत का मानचित्र है: वैदिक श्रुति, स्मृति, दर्शन, व्याकरण, राज्यशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र, नीति और शिक्षा।
  • कालक्रम वैदिक मौखिक परंपरा से अभिनवगुप्त तक जाता है और टीका, स्मरण तथा वाद-विवाद की पद्धति को जोड़ता है।
  • मूल्य-प्रणाली ज्ञान से अलग नहीं है: यम, पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और सत्याग्रह सामाजिक आचरण बनाते हैं।
  • राजस्थान संबंध भिल्लमाल के ब्रह्मगुप्त, नाथद्वारा की श्रीनाथजी परंपरा, राजस्थानी चित्रकला और पश्चिमी भारत की संस्कृत विद्या से आते हैं।

मुख्य बिंदु

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    यह विषय ग्रंथ और सिद्धांत का मानचित्र है: वैदिक श्रुति, स्मृति, दर्शन, व्याकरण, राज्यशास्त्र, सौंदर्यशास्त्र, नीति और शिक्षा।

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    कालक्रम वैदिक मौखिक परंपरा से अभिनवगुप्त तक जाता है और टीका, स्मरण तथा वाद-विवाद की पद्धति को जोड़ता है।

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    मूल्य-प्रणाली ज्ञान से अलग नहीं है: यम, पुरुषार्थ, धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और सत्याग्रह सामाजिक आचरण बनाते हैं।

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    राजस्थान संबंध भिल्लमाल के ब्रह्मगुप्त, नाथद्वारा की श्रीनाथजी परंपरा, राजस्थानी चित्रकला और पश्चिमी भारत की संस्कृत विद्या से आते हैं।

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वैदिक ग्रंथ-संग्रह और षड् दर्शन भारतीय ज्ञान-प्रणाली को कैसे बनाते हैं?

वैदिक ग्रंथ-संग्रह और षड् दर्शन भारतीय ज्ञान-प्रणाली को श्रुति-स्मृति, प्रमाण, तर्क, गुरु-शिष्य परंपरा और आत्मबोध की संयुक्त संरचना के रूप में बनाते हैं। संस्कृति मंत्रालय की पत्र सूचना कार्यालय विज्ञप्ति के अनुसार राष्ट्रीय पांडुलिपि मिशन ने देशभर में लगभग 52 लाख पांडुलिपियों का दस्तावेजीकरण किया है, इसलिए भारतीय ज्ञान-परंपरा को समझते समय मौखिक परंपरा के साथ लिखित संरक्षण को भी साथ रखना पड़ता है।

श्रुति / स्मृति परंपरा एवं षड् दर्शन भारतीय ज्ञान-प्रणाली की आरंभिक संरचना बनाते हैं।

श्रुति और स्मृति

परंपराक्या आता है
श्रुति4 वेद, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद आते हैं, जिन्हें सुना और स्मरण रखा गया
स्मृतिधर्मशास्त्र, इतिहास, पुराण, विधि, अनुष्ठान-ग्रंथ और टीकाएँ आती हैं
  • उपनिषदों की संख्या प्रायः 108 मानी जाती है और वेदांत में 13 प्रमुख उपनिषद अधिक उपयोग में आते हैं।
  • इस ग्रंथ-संग्रह में ज्ञान केवल सूचना नहीं है; वह वाणी की शुद्धता, गुरु-शिष्य परंपरा, वाद-विवाद, कर्तव्य और आत्मबोध से जुड़ता है।

षड् दर्शन

षड् दर्शन 6 ज्ञान-पद्धतियाँ हैं।

दर्शनसंबंधित आचार्यमुख्य विचार
न्यायगौतमतर्क और प्रमाण की चर्चा करते हैं
वैशेषिककणादद्रव्य, गुण और कर्म जैसी श्रेणियाँ रखते हैं
सांख्यकपिलपुरुष और प्रकृति को अलग करते हैं
योगपतंजलिमन और अभ्यास को अनुशासित करते हैं
पूर्व मीमांसाजैमिनिवैदिक कर्म की व्याख्या करते हैं
उत्तर मीमांसा या वेदांतबादरायणउपनिषदों के ब्रह्म-विचार को व्यवस्थित करते हैं

राजस्थान संबंध

  • राजस्थान का संबंध वर्तमान जालोर जिले के भिल्लमाल से आता है, जहाँ ब्रह्मगुप्त ने 628 ईस्वी में ब्रह्मस्फुटसिद्धांत लिखा।
  • यह गणित और खगोल का ग्रंथ है, फिर भी वह दिखाता है कि पश्चिमी भारत में संस्कृत विद्या, गणना, ब्रह्मांड-विचार और टीका-परंपरा आपस में जुड़ी रहीं।

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1MCQकौन-सा युग्म किसी आस्तिक दर्शन को उससे सामान्यतः जुड़े आचार्य से सही मिलाता है?1 अंक · 50 शब्द
  1. Aन्याय - गौतमसही
  2. Bवैशेषिक - जैमिनि
  3. Cपूर्व मीमांसा - बादरायण
  4. Dवेदांत - कपिल

व्याख्या

न्याय का संबंध गौतम से है और वह तर्क तथा प्रमाण को व्यवस्थित करता है। वैशेषिक कणाद से, पूर्व मीमांसा जैमिनि से, वेदांत बादरायण से और सांख्य कपिल से जुड़ता है।

~50 शब्द · 1 अंक