मुख्य तथ्य

  • भगवद्गीता के अध्याय 2 में योग को समत्व और कुशल कर्म से जोड़ा गया है, इसलिए योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन-अनुशासन भी है।
  • 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया; पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया।
  • योग को 2016 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया, जिससे इसकी वैश्विक सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई।
  • अष्टांग योग के 8 अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।
  • सूर्य नमस्कार 8 आसनों को 12 चरणों में करने का क्रम है; इसमें आसन, श्वास-लय और शरीर-संतुलन साथ काम करते हैं।

मुख्य बिंदु

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    पतंजलि के योगसूत्र में योग को चित्तवृत्ति निरोध माना गया है; यही शास्त्रीय योग-दर्शन का सबसे प्रसिद्ध सूत्र है।

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    भगवद्गीता के अध्याय 2 में योग को समत्व और कुशल कर्म से जोड़ा गया है, इसलिए योग केवल व्यायाम नहीं बल्कि जीवन-अनुशासन भी है।

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    11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया; पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून 2015 को मनाया गया।

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    योग को 2016 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल किया गया, जिससे इसकी वैश्विक सांस्कृतिक पहचान मजबूत हुई।

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    अष्टांग योग के 8 अंग यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि हैं।

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    सूर्य नमस्कार 8 आसनों को 12 चरणों में करने का क्रम है; इसमें आसन, श्वास-लय और शरीर-संतुलन साथ काम करते हैं।

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    विद्यालयी शारीरिक शिक्षा में योग का मुख्य लक्ष्य लचीलापन, संतुलन, श्वसन-नियंत्रण, एकाग्रता और अनुशासन विकसित करना है।

योग का अर्थ और परीक्षा में इसकी सही पकड़ क्या है?

योग शरीर, श्वास, मन और आचरण को अनुशासित ढंग से जोड़ने वाली भारतीय पद्धति है, जिसे परीक्षा में केवल शरीर मोड़ने वाली कसरत नहीं बल्कि शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास की संयुक्त प्रणाली के रूप में समझना चाहिए। योग भारतीय ज्ञान-परंपरा की वह पद्धति है जो शरीर, श्वास, मन और आचरण को एक अनुशासित क्रम में जोड़ती है। सामान्य अर्थ में योग का संबंध जोड़ने या एकीकरण से है, पर परीक्षा में इसका अर्थ केवल शरीर मोड़ने वाली कसरत नहीं माना जाता। योग में आसन शरीर को स्थिर और सक्षम बनाते हैं, प्राणायाम श्वास को नियमित करता है, ध्यान मन को एकाग्र करता है और यम-नियम जीवन-व्यवहार को संयमित करते हैं। इसलिए योग को शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आध्यात्मिक विकास की समन्वित प्रणाली कहा जाता है। आरपीएससी के शारीरिक प्रशिक्षण अनुदेशक प्रश्नपत्र-1 पाठ्यक्रम में योग को आसन, प्राणायाम, क्रियाएँ और मुद्राएँ के साथ रखा गया है और उसी प्रश्नपत्र में 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्न निर्धारित हैं।

वस्तुनिष्ठ परीक्षा में योग से जुड़े प्रश्न प्रायः परिभाषा, अंग, आसन-लाभ, प्राणायाम-प्रकार, प्रमुख ग्रंथ, संस्थाएं और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे तथ्यों से आते हैं। शारीरिक प्रशिक्षण से जुड़े पदों में इसका व्यावहारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है, जैसे किस आसन से संतुलन बढ़ता है, किस प्राणायाम में नासिका-क्रम बदलता है, या किन अवस्थाओं में कोई आसन नहीं कराया जाना चाहिए। राजस्थान के विद्यालयी संदर्भ में योग को प्रार्थना-सभा, खेल-पीरियड और स्वास्थ्य-शिक्षा से जोड़कर भी समझना उपयोगी है।

सार यही है कि योग को शरीर-मन-अनुशासन की संयुक्त पद्धति की तरह पढ़ना चाहिए, न कि केवल आसनों की सूची की तरह।

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