मुख्य तथ्य

  • मानसिक योग्यता में नियम पहचानना, संबंध बनाना, दिशा ट्रैक करना और सूचना को सारणी में रखना सबसे काम के कौशल हैं।
  • कूटलेखन-कूटवाचन में उत्तर लिखने से पहले मूल अक्षर, कूटित अक्षर और स्थान-अंतर की छोटी जाँच जरूरी है।
  • रक्त-संबंध में हर व्यक्ति को परिवार-वृक्ष में एक बार रखकर पीढ़ी, लिंग, विवाह और संतान की कड़ी साफ करनी होती है।
  • दिशा-दूरी और बैठक व्यवस्था में दायाँ-बायाँ हमेशा व्यक्ति के मुख की दिशा से तय होता है, अपने देखने की दिशा से नहीं।
  • रैंक, कैलेंडर और घड़ी में क्रम-स्थान, 7 से शेषफल और सुइयों की सापेक्ष चाल जैसे छोटे सूत्र सीधे अंक दिलाते हैं।

मुख्य बिंदु

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    मानसिक योग्यता में नियम पहचानना, संबंध बनाना, दिशा ट्रैक करना और सूचना को सारणी में रखना सबसे काम के कौशल हैं।

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    कूटलेखन-कूटवाचन में उत्तर लिखने से पहले मूल अक्षर, कूटित अक्षर और स्थान-अंतर की छोटी जाँच जरूरी है।

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    रक्त-संबंध में हर व्यक्ति को परिवार-वृक्ष में एक बार रखकर पीढ़ी, लिंग, विवाह और संतान की कड़ी साफ करनी होती है।

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    दिशा-दूरी और बैठक व्यवस्था में दायाँ-बायाँ हमेशा व्यक्ति के मुख की दिशा से तय होता है, अपने देखने की दिशा से नहीं।

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    रैंक, कैलेंडर और घड़ी में क्रम-स्थान, 7 से शेषफल और सुइयों की सापेक्ष चाल जैसे छोटे सूत्र सीधे अंक दिलाते हैं।

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    घन, पासा, दर्पण, जल-प्रतिबिंब और कागज-मोड़ में फलक, अक्ष, सममिति और उलटाव की दिशा निर्णायक होती है।

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    श्रृंखला, वर्ग-सारणी और शर्त-निर्णय में जल्दबाजी से बचकर हर नियम को उपलब्ध उदाहरणों पर वापस जाँचना चाहिए।

कूटलेखन-कूटवाचन और वर्णक्रम के सवाल कैसे हल करें?

कूटलेखन-कूटवाचन और वर्णक्रम के सवालों में सही तरीका यह है कि पहले दिए गए शब्द और उसके कूट के बीच अक्षर-दर-अक्षर नियम पकड़ा जाए, फिर उसी नियम को नए शब्द पर लागू किया जाए। राजस्थान लोक सेवा आयोग के प्रारंभिक परीक्षा सिलेबस में कूटलेखन-कूटवाचन को 150 वस्तुनिष्ठ प्रश्नों वाले प्रश्नपत्र के तर्कशक्ति एवं मानसिक योग्यता भाग में रखा गया है। कूटलेखन-कूटवाचन में सवाल शब्दार्थ का नहीं, नियम-संगति का होता है। पहले मूल शब्द और कूटित शब्द को साथ लिखकर हर अक्षर का स्थान-अंतर देखिए। यदि हर अक्षर समान दूरी से आगे या पीछे जा रहा है तो यह सीधा स्थानांतरण है। यदि दूरी समान नहीं है, तो वैकल्पिक चाल, पहला अक्षर +1 और दूसरा +2 जैसी बढ़त, उलटाव, वर्णक्रम, स्वर हटाना या अक्षरों की अदला-बदली जाँची जाती है। संख्या-कूट में अक्षर को उसके स्थान-संख्या से पढ़ा जा सकता है और फिर योग, अंतर, वर्ग, गुणन या पहले-अंतिम स्थान के युग्म से नियम बन सकता है।

कूट में जयपुर, कोटा या किसी व्यक्ति का नाम केवल सामग्री है; नियम नहीं बदलता। नया शब्द तभी बदलिए जब प्रमाण युग्मों पर वही नियम बार-बार सही बैठ जाए। वर्णक्रम वाले सवालों में भी यही सावधानी चाहिए। पहले पहला अक्षर मिलाइए, फिर दूसरा और तीसरा। दोहराए गए अक्षरों वाले शब्दों में अक्षर की जगह भी निशान लगती है; सिर्फ अलग-अलग अक्षर गिनना काफी नहीं होता। अगर किसी विकल्प में वही अक्षर हैं लेकिन क्रम या जगह बदल गई है, तो उसे सही मानने से पहले मूल नियम से दोबारा मिलाना चाहिए।

ध्यान रखें: परिचित +1 या +2 चाल को हर कूट पर जबरदस्ती लगाने से सबसे अधिक गलतियाँ होती हैं। परीक्षा में कूट का असली उत्तर वही है जो सभी दिए गए युग्मों पर बिना अपवाद लागू हो, न कि वह जो पहले देखने में आसान लगे।

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