मुख्य तथ्य

  • WHO और UNICEF शिशु को जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने, पहले 6 महीनों तक केवल स्तनपान कराने और 6 महीने के बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी र...
  • केवल स्तनपान का अर्थ है कि 0-6 महीने के शिशु को मां के दूध के अलावा पानी, घुट्टी, पशु-दूध या ठोस भोजन न दिया जाए;
  • 6 महीने, यानी लगभग 180 दिन, के बाद शिशु की ऊर्जा और पोषक ज़रूरतें केवल मां के दूध से पूरी नहीं होतीं;
  • 5 अगस्त 2016 को भारत में MAA कार्यक्रम शुरू किया गया; इसका लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से स्तनपान को बढ़ावा देना, सुरक्षा देना और माताओं को पर...
  • 1992 का IMS अधिनियम और 2003 का संशोधन शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु आहार के प्रचार, नमूना-वितरण और भ्रामक विपणन को नियंत्रित करते हैं।

मुख्य बिंदु

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    WHO और UNICEF शिशु को जन्म के 1 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने, पहले 6 महीनों तक केवल स्तनपान कराने और 6 महीने के बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान जारी रखने की सलाह देते हैं।

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    केवल स्तनपान का अर्थ है कि 0-6 महीने के शिशु को मां के दूध के अलावा पानी, घुट्टी, पशु-दूध या ठोस भोजन न दिया जाए; चिकित्सकीय ज़रूरत पर दवा, विटामिन या खनिज अलग अपवाद हैं।

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    कोलोस्ट्रम मां का पहला गाढ़ा पीला दूध है; यह संक्रमण से सुरक्षा, आंत की परिपक्वता और शुरुआती प्रतिरक्षा के कारण नवजात के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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    6 महीने, यानी लगभग 180 दिन, के बाद शिशु की ऊर्जा और पोषक ज़रूरतें केवल मां के दूध से पूरी नहीं होतीं; इसी समय सुरक्षित, गाढ़ा और पोषक पूरक आहार शुरू किया जाता है।

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    5 अगस्त 2016 को भारत में MAA कार्यक्रम शुरू किया गया; इसका लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था के माध्यम से स्तनपान को बढ़ावा देना, सुरक्षा देना और माताओं को परामर्श-सहायता देना है।

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    1992 का IMS अधिनियम और 2003 का संशोधन शिशु दूध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु आहार के प्रचार, नमूना-वितरण और भ्रामक विपणन को नियंत्रित करते हैं।

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    ICDS और आंगनवाड़ी व्यवस्था में 0-6 वर्ष के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण, वृद्धि निगरानी और परामर्श से IYCF व्यवहार सीधे जुड़ते हैं।

शिशु और छोटे बच्चों के आहार की मूल अवधारणा क्या है और परीक्षा में यह क्यों महत्वपूर्ण है?

शिशु और छोटे बच्चों के आहार की मूल अवधारणा यह है कि जन्म से 2 वर्ष या उससे आगे तक बच्चे को उम्र के अनुसार सही समय पर स्तनपान, पूरक आहार, बीमारी में भोजन और परिवार को सही परामर्श मिले। इसका आशय शिशु और छोटे बच्चों के आहार व्यवहार से है। इसमें जन्म के तुरंत बाद स्तनपान, 0-6 महीने तक केवल स्तनपान, 6 महीने के बाद पूरक आहार, 2 वर्ष या उससे आगे तक स्तनपान, बीमारी के समय भोजन और देखभालकर्ता को सही परामर्श शामिल है। महिला सुपरवाइजर परीक्षा में यह विषय चिकित्सा-विशेषज्ञ की गहराई से नहीं, बल्कि आंगनवाड़ी, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और सरकारी कार्यक्रमों की कामकाजी समझ से पूछा जाता है। इसलिए परिभाषा, आयु-सीमा, गलत प्रथाएं और प्रमुख कानून-कार्यक्रम सीधे याद रखने योग्य हैं। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5, राजस्थान प्रतिवेदन 2019-21 के अनुसार राजस्थान में पाँच वर्ष से कम आयु के 32% बच्चे ठिगनेपन से प्रभावित थे, इसलिए यह विषय केवल परिभाषा नहीं बल्कि बाल-वृद्धि की वास्तविक समस्या से जुड़ा हुआ है।

पहले 1000 दिन, यानी गर्भधारण से बच्चे के लगभग 2 वर्ष तक का समय, वृद्धि और मस्तिष्क विकास के लिए संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में गलत आहार, बार-बार संक्रमण और कमजोर देखभाल से कम वजन, वृद्धि रुकना, एनीमिया और विकास में देरी का जोखिम बढ़ता है। राजस्थान के आंगनवाड़ी केंद्र में वजन मापन, घर-भेंट, मातृ परामर्श और पूरक पोषण की चर्चा इसी जीवन-चक्र दृष्टि से जुड़ती है।

सार यह है: शिशु और छोटे बच्चों के आहार में उम्र के अनुसार सही भोजन, सही समय और सही परामर्श तीनों साथ पढ़ने चाहिए।

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