आनुवंशिकी, वंशानुक्रम और उसका आणविक आधार
मुख्य तथ्य
- Tt × Tt से अपेक्षित जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 और पूर्ण प्रभाविता में फीनोटाइप अनुपात 3:1 मिलता है;
- परीक्षण संकरण में अज्ञात प्रभावी जीनोटाइप को समयुग्मजी अप्रभावी जीव से जाँचा जाता है;
- तय शर्तों पर स्वतंत्र अपव्यूहन से 9:3:3:1 मिल सकता है, लेकिन सहलग्नता, जीनों की आपसी क्रिया, प्रभाविता का ढंग और छोटी संतति संख्या परिणाम बदल सकते हैं...
मुख्य बिंदु
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आनुवंशिकी वंशानुक्रम और विविधता समझाती है। जीन डीएनए का ऐसा क्रम है जो किसी उत्पाद या जैविक काम को प्रभावित करता है, एलील उसका वैकल्पिक रूप है, जीनोटाइप एलीलों का मेल है और फीनोटाइप जीनोटाइप तथा वातावरण से बनी दिखाई देने वाली अभिव्यक्ति है।
- 2
प्रभाविता का नियम सरल विषमयुग्मजी दशा में एलील की अभिव्यक्ति बताता है; पृथक्करण में दोनों एलील युग्मक बनते समय अलग होते हैं और निषेचन पर जोड़ी फिर बनती है।
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Tt × Tt से अपेक्षित जीनोटाइप अनुपात 1:2:1 और पूर्ण प्रभाविता में फीनोटाइप अनुपात 3:1 मिलता है; छोटा परिवार इस संभावना को ठीक इसी गिनती में दोहराए, यह ज़रूरी नहीं।
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परीक्षण संकरण में अज्ञात प्रभावी जीनोटाइप को समयुग्मजी अप्रभावी जीव से जाँचा जाता है; अपूर्ण प्रभाविता और सह-प्रभाविता में सरल 3:1 से अलग रूप मिल सकते हैं।
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तय शर्तों पर स्वतंत्र अपव्यूहन से 9:3:3:1 मिल सकता है, लेकिन सहलग्नता, जीनों की आपसी क्रिया, प्रभाविता का ढंग और छोटी संतति संख्या परिणाम बदल सकते हैं।
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गुणसूत्र डीएनए को प्रोटीन के साथ व्यवस्थित करते हैं। समजात गुणसूत्रों पर समान लोकस होते हैं, सहभगिनी क्रोमैटिड एक गुणसूत्र की प्रतियाँ हैं और अर्धसूत्री विभाजन में पहले समजात गुणसूत्र अलग होते हैं।
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डीएनए और आरएनए न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ हैं। डीएनए में सामान्यतः विपरीत-दिशी पूरक रज्जु तथा A-T और G-C युग्मन होता है, जबकि आरएनए में प्रायः यूरैसिल होता है और उसके कई काम हैं।
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सूचना का सामान्य बहाव प्रतिलेखन और अनुवाद से डीएनए से आरएनए और फिर प्रोटीन तक जाता है; प्रतिलोम प्रतिलेखन में आरएनए से डीएनए बनना इसका मान्य विस्तार है।
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मनुष्य की सामान्य XX-XY व्यवस्था में अंडाणु X और शुक्राणु X या Y लाते हैं। इसलिए संतान के लिंग के लिए माँ को दोष देना वैज्ञानिक रूप से गलत है; यह मॉडल संभावना बताता है, सामाजिक मूल्य नहीं।
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आनुवंशिकी का दायरा: वंशानुक्रम और विविधता
सीईटी वरिष्ठ माध्यमिक के दैनिक विज्ञान में इस इकाई का दायरा आनुवंशिकी तक सीमित है—मुख्य शब्दावली, मेंडल के नियम, गुणसूत्रों की बनावट, न्यूक्लिक अम्ल, प्रोटीन बनने का केंद्रीय सिद्धांत और मनुष्य में लिंग-निर्धारण। अंतरिक्ष, सूचना प्रौद्योगिकी और जैव प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रम के अलग हिस्से हैं; उन्हें यहाँ मिलाकर नहीं पढ़ना है। परीक्षा में 10+2 स्तर की समझ चाहिए: सही परिभाषा, रचना और काम का संबंध, सरल संकरण का हल और भ्रामक कथन की पहचान।
वंशानुक्रम से माता-पिता के जैविक लक्षण संतान तक पहुँचते हैं, जबकि एक ही प्रजाति के व्यक्तियों में अंतर को विविधता कहते हैं। आनुवंशिकी इन दोनों का अध्ययन करती है। कोई व्यापक वंशागत विशेषता, जैसे बीज का आकार, लक्षण-वर्ग है; उसका खास रूप, जैसे गोल बीज, उस लक्षण की अभिव्यक्ति है। जीन डीएनए का ऐसा क्रम है जो किसी उत्पाद या काम को प्रभावित करता है। एक जीन के वैकल्पिक रूप एलील कहलाते हैं। एलीलों का मेल जीनोटाइप है, जबकि शरीर में दिखाई देने वाला परिणाम फीनोटाइप है; इस परिणाम पर जीनोटाइप के साथ वातावरण भी असर डाल सकता है। समान एलील होने पर समयुग्मजी और अलग एलील होने पर विषमयुग्मजी अवस्था होती है।
इन शब्दों को आपस में न मिलाएँ। एक गुणसूत्र पर बहुत से जीन हो सकते हैं, इसलिए जीन और गुणसूत्र एक चीज़ नहीं हैं। प्रभावी एलील का अर्थ अधिक आम, अधिक ताकतवर या बेहतर एलील नहीं है; सरल मेंडली दशा में वह विषमयुग्मजी अवस्था में दिखता है। अप्रभावी एलील गायब नहीं होता, बल्कि जीनोटाइप में बना रह सकता है और उचित जोड़ी मिलने पर प्रकट होता है।
अभ्यास सवाल 1: किसी मटर के पौधे का जीनोटाइप Tt है और पौधा लंबा है। यहाँ Tt जीनोटाइप, लंबा फीनोटाइप और विषमयुग्मजी अवस्था है। केवल इस सूचना से यह नहीं कहा जा सकता कि प्रकृति में लंबे पौधे अधिक होते हैं।
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मॉडल उत्तर
F1 में अप्रभावी एलील नष्ट नहीं होता; विषमयुग्मजी जीव उसे अपने जीनोटाइप में रखता है। युग्मक बनते समय पृथक्करण से एलील अलग होते हैं और F2 में दो अप्रभावी एलील साथ आकर समयुग्मजी अप्रभावी जीनोटाइप बना सकते हैं। तभी वह फीनोटाइप फिर दिखता है।
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