मुख्य तथ्य

  • CET वरिष्ठ माध्यमिक के नए पाठ्यक्रम में अर्थव्यवस्था के भीतर सिंचाई परियोजनाओं की अलग पंक्ति नहीं है;
  • राजस्थान की सिंचाई को क्षेत्रवार पढ़ें: उत्तर-पश्चिम में इंदिरा गांधी नहर और गंग नहर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल कमान, दक्षिणी पट्टी में माही, टो...
  • इंदिरा गांधी नहर परियोजना पश्चिमी राजस्थान तक हिमालयी जल पहुँचाती है और राजस्थान आर्थिक समीक्षा में इसे पश्चिमी राजस्थान की लाइफलाइन कहा गया है।
  • राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पूरे किए गए नहर कार्यों से 16.17 लाख हेक्टेयर खेती योग्य कमान क्षेत्र में सिंचा...
  • गंग नहर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से जुड़ा पुराना नहर-सिंचाई उदाहरण है;

मुख्य बिंदु

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    CET वरिष्ठ माध्यमिक के नए पाठ्यक्रम में अर्थव्यवस्था के भीतर सिंचाई परियोजनाओं की अलग पंक्ति नहीं है; यह विषय राजस्थान भूगोल के जल संसाधन, नदियाँ, बांध और झीलों तथा राजस्थान अर्थव्यवस्था के कृषि, सूखा और अकाल से जुड़े हिस्से में आता है।

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    राजस्थान की सिंचाई को क्षेत्रवार पढ़ें: उत्तर-पश्चिम में इंदिरा गांधी नहर और गंग नहर, दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल कमान, दक्षिणी पट्टी में माही, टोंक में बनास पर बीसलपुर और दक्षिण-पश्चिम में नर्मदा नहर।

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    इंदिरा गांधी नहर परियोजना पश्चिमी राजस्थान तक हिमालयी जल पहुँचाती है और राजस्थान आर्थिक समीक्षा में इसे पश्चिमी राजस्थान की लाइफलाइन कहा गया है।

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    राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पूरे किए गए नहर कार्यों से 16.17 लाख हेक्टेयर खेती योग्य कमान क्षेत्र में सिंचाई सुविधा दी गई है।

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    गंग नहर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ से जुड़ा पुराना नहर-सिंचाई उदाहरण है; आधिकारिक स्रोत इसे सतलुज-आधारित नहर प्रणाली और उत्तरी राजस्थान के कमान-क्षेत्र कार्यों से जोड़ते हैं।

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    चंबल घाटी को गांधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर और कोटा बैराज के साथ जोड़ें; राजस्थान आर्थिक समीक्षा चंबल कमान क्षेत्र को कोटा, बूंदी और बारां से जोड़ती है।

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    बीसलपुर बांध टोंक जिले में बनास नदी पर है और राजस्थान के जल-संसाधन नक्शे में सिंचाई तथा पेयजल, दोनों संदर्भों में महत्त्वपूर्ण है।

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    ERCP के साथ जुड़ा संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक पूर्वी राजस्थान की मौजूदा जल-योजना का महत्त्वपूर्ण उदाहरण है, जिसमें पेयजल सुरक्षा के साथ नई और बहाल सिंचाई क्षमता जुड़ती है।

राजस्थान में सिंचाई क्यों अलग विषय है

राजस्थान की अर्थव्यवस्था स्थायी जल-असमानता से बनती है। राजस्थान क्षेत्रफल के आधार पर भारत का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन राजस्थान आर्थिक समीक्षा 2025-26 बताती है कि देश के 10.41 प्रतिशत से अधिक भू-भाग के बावजूद राज्य के पास देश के जल संसाधनों का केवल 1.16 प्रतिशत हिस्सा है। पश्चिमी राजस्थान में मरुस्थलीय दशाएँ, रेतीली मिट्टी, अधिक वाष्पीकरण और मौसमी धाराएँ मिलती हैं। पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में चंबल, बनास, कालीसिंध और माही जैसी नदी प्रणालियाँ अधिक मजबूत हैं। इसी असमान जल-आधार के कारण सिंचाई परियोजनाएँ सिर्फ इंजीनियरिंग काम नहीं हैं; वे फसल चयन, बसावट, पेयजल, सूखा-रोधी क्षमता और अकाल-जोखिम को प्रभावित करती हैं।

CET वरिष्ठ माध्यमिक 2026 में इस विषय को दो रास्तों से पढ़ें। राजस्थान भूगोल में यह नदियाँ, बांध, झीलें और जल संसाधन वाले आधिकारिक बिंदुओं से जुड़ता है। राजस्थान अर्थव्यवस्था में यह कृषि, सूखा, अकाल और राज्य अर्थव्यवस्था की विशेषताओं व समस्याओं से जुड़ता है। पाठ्यक्रम बहुत गहरे इंजीनियरिंग विवरण की मांग नहीं करता, लेकिन परियोजना, नदी, क्षेत्र और उपयोग का साफ संबंध जरूर मांगता है।

मूल वर्गीकरण इतना पर्याप्त है: नहरें नदी का पानी आगे ले जाती हैं, बांध मानसूनी प्रवाह को रोककर रखते हैं, तालाब और एनीकट स्थानीय बहाव को सँभालते हैं, कुएँ और ट्यूबवेल भूजल लेते हैं और लिफ्ट योजनाएँ वहाँ पानी पहुँचाती हैं जहाँ केवल ढाल से प्रवाह संभव नहीं होता। पानी सीमित होने और कई जिलों में भूजल पर दबाव होने के कारण ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई भी महत्त्वपूर्ण है।

परीक्षा की बात सरल है: हर परियोजना को स्रोत, लाभ क्षेत्र और मुख्य उपयोग के साथ पढ़ें।

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