मुख्य तथ्य

  • अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद और अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति का प्रावधान करता है;
  • अनुच्छेद 74 प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है;
  • प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है, अनुच्छेद 78 के तहत राष्ट्रपति को फ़ैसलों की जानकारी देता है और उसे लोकसभा का विश्वास बनाए रखना होता है।
  • अनुच्छेद 79 राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा को संसद के 3 संवैधानिक अंग बनाता है; राज्यसभा स्थायी है, जबकि लोकसभा भंग हो सकती है।
  • साधारण विधेयक के लिए सामान्यतः दोनों सदनों की सहमति चाहिए; धन विधेयक केवल लोकसभा में शुरू होता है और राज्यसभा 14 दिनों के भीतर सिफारिश कर सकती है।

मुख्य बिंदु

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    यह इकाई आधिकारिक पाठ्यक्रम की राष्ट्रीय संस्थाओं वाले बिंदु तक सीमित है: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, संसद, उच्चतम न्यायालय तथा भारत निर्वाचन आयोग।

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    अनुच्छेद 52 राष्ट्रपति पद और अनुच्छेद 53 संघ की कार्यपालिका शक्ति का प्रावधान करता है; राष्ट्रपति का चुनाव संविधान में तय निर्वाचक मंडल से अप्रत्यक्ष रूप से होता है।

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    अनुच्छेद 74 प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रपति को सहायता और सलाह देने वाली मंत्रिपरिषद का प्रावधान करता है; अनुच्छेद 75 उसे लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी बनाता है।

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    प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है, अनुच्छेद 78 के तहत राष्ट्रपति को फ़ैसलों की जानकारी देता है और उसे लोकसभा का विश्वास बनाए रखना होता है।

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    अनुच्छेद 79 राष्ट्रपति, राज्यसभा और लोकसभा को संसद के 3 संवैधानिक अंग बनाता है; राज्यसभा स्थायी है, जबकि लोकसभा भंग हो सकती है।

  6. 6

    साधारण विधेयक के लिए सामान्यतः दोनों सदनों की सहमति चाहिए; धन विधेयक केवल लोकसभा में शुरू होता है और राज्यसभा 14 दिनों के भीतर सिफारिश कर सकती है।

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    संसद प्रश्न, बहस, प्रस्ताव, समिति और वित्तीय मंज़ूरी से कार्यपालिका पर नियंत्रण रखती है; मंत्रिपरिषद का बने रहना लोकसभा के विश्वास पर निर्भर है।

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    उच्चतम न्यायालय मूल, अपीलीय, सलाहकारी और रिट अधिकार-क्षेत्र का प्रयोग करता है; अनुच्छेद 141 के अनुसार उसकी घोषित विधि सभी भारतीय अदालतों पर बाध्यकारी है।

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    अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकार लागू कराने के लिए उच्चतम न्यायालय से निर्देश, आदेश और मान्य रिट पाने का संवैधानिक उपचार देता है।

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    अनुच्छेद 324 बताए गए राष्ट्रीय और राज्य-स्तरीय चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण भारत निर्वाचन आयोग को सौंपता है; पंचायत और नगरपालिका चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के क्षेत्र में आते हैं।

संघ की राजनीतिक व्यवस्था और संस्थागत ढांचा

यह इकाई आधिकारिक पाठ्यक्रम के एक तय हिस्से तक सीमित है: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद, संसद, उच्चतम न्यायालय तथा भारत निर्वाचन आयोग। इन संस्थाओं के काम अलग-अलग हैं। राष्ट्रपति संघ कार्यपालिका का संवैधानिक प्रमुख है। प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करता है और मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी रहती है। संसद कानून बनाती है, कर और सार्वजनिक खर्च को मंज़ूरी देती है तथा राजनीतिक कार्यपालिका से जवाब माँगती है। उच्चतम न्यायालय देश की शीर्ष अदालत और संविधान का रक्षक है। भारत निर्वाचन आयोग संविधान में बताए गए चुनावों का संचालन कराता है।

ये संस्थाएँ आपस में जुड़ी हैं, लेकिन एक संस्था दूसरी का काम नहीं करती। अनुच्छेद 79 के अनुसार राष्ट्रपति संसद का अंग है, फिर भी वह किसी सदन का सदस्य बनकर मतदान नहीं करता। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करता है, पर सरकार चलाने के लिए मंत्रिपरिषद को लोकसभा का विश्वास चाहिए। उच्चतम न्यायालय सरकारी कार्रवाई की संवैधानिक वैधता जाँच सकता है, लेकिन वह चुनी हुई सरकार की सामान्य नीति अपने हाथ में नहीं लेता। निर्वाचन आयोग चुनाव कराता है; चुनाव के बाद शासन नहीं चलाता।

सवाल हल करते समय 4 बातें पहचानें: शक्ति कहाँ से मिली, चयन कैसे हुआ, जवाबदेही किसके प्रति है और कौन-सा काम किया जा रहा है। नियुक्ति और राजनीतिक नियंत्रण एक बात नहीं हैं। स्वीकृति देना और सदन में कानून पर बहस करना अलग काम हैं। न्यायिक समीक्षा कानून बनाना नहीं है। चुनाव का संचालन शासन चलाना नहीं है। राजस्थान के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा, उच्च न्यायालय, राज्य आयोग, मुख्य सचिव, जिला प्रशासन और स्थानीय स्वशासन अलग इकाइयों में आते हैं, इसलिए उन्हें यहाँ दोहराया नहीं गया है।

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मॉडल उत्तर

राष्ट्रपति के लिए नागरिक पूरे देश में सीधे मतदान नहीं करते। संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य निर्वाचक मंडल बनाते हैं; दिल्ली और पुडुचेरी की विधानसभाएँ भी इसमें शामिल हैं। मनोनीत सदस्य इस चुनाव में मतदान नहीं करते। इसलिए यह लोकसभा जैसा प्रत्यक्ष चुनाव नहीं है।

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