मुख्य तथ्य

  • 1958 में DRDO बना; इसे प्रयोगशालाओं, रक्षा प्रणालियों, उपयोगकर्ता सेनाओं और आत्मनिर्भरता से जोड़कर पढ़ें, केवल एक हथियार-कारखाना समझकर नहीं।
  • 15 अगस्त 1969 को ISRO बना; इसकी पृष्ठभूमि INCOSPAR से जुड़ती है और 1972 में अंतरिक्ष आयोग तथा अंतरिक्ष विभाग बने।
  • प्रक्षेपण यान और उपग्रह अलग हैं: PSLV, GSLV और LVM3 अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में ले जाते हैं, जबकि INSAT/GSAT, IRS प्रकार के उपग्रह, कार्टोसैट, रिसोर्स...
  • 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने विक्रम लैंडर के साथ सुरक्षित नरम अवतरण किया और प्रज्ञान रोवर उतारा;

मुख्य बिंदु

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    पाठ्यक्रम सीमा: स्नातक स्तर के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड में सूचना और संचार तकनीक, रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक और उपग्रह, तथा राजस्थान संदर्भ में विज्ञान-तकनीक के उदाहरण पढ़ने हैं।

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    1958 में DRDO बना; इसे प्रयोगशालाओं, रक्षा प्रणालियों, उपयोगकर्ता सेनाओं और आत्मनिर्भरता से जोड़कर पढ़ें, केवल एक हथियार-कारखाना समझकर नहीं।

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    15 अगस्त 1969 को ISRO बना; इसकी पृष्ठभूमि INCOSPAR से जुड़ती है और 1972 में अंतरिक्ष आयोग तथा अंतरिक्ष विभाग बने।

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    प्रक्षेपण यान और उपग्रह अलग हैं: PSLV, GSLV और LVM3 अंतरिक्षयान को अंतरिक्ष में ले जाते हैं, जबकि INSAT/GSAT, IRS प्रकार के उपग्रह, कार्टोसैट, रिसोर्ससैट, ओशनसैट, RISAT और NavIC उपग्रह या उपग्रह-प्रणाली से जुड़े नाम हैं।

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    रक्षा नामों को भूमिका से मिलाएँ: अग्नि और पृथ्वी को बैलिस्टिक या सतह-से-सतह मिसाइल भूमिका से, आकाश को सतह-से-वायु रक्षा से, अस्त्र को BVR वायु-से-वायु मिसाइल से, नाग/हेलिना को टैंक-रोधी मिसाइल से, ब्रह्मोस को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से और पिनाका को बहु-बैरल रॉकेट प्रणाली से जोड़ें।

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    NavIC स्थिति, नौवहन और समय-संकेत देने वाली क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली है; यह फसल, जंगल या जलाशय की सीधी तस्वीर लेने वाला दूरसंवेदी उपग्रह नहीं है।

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    23 अगस्त 2023 को चंद्रयान-3 ने विक्रम लैंडर के साथ सुरक्षित नरम अवतरण किया और प्रज्ञान रोवर उतारा; भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के पास उतरने वाला पहला देश बना।

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    राजस्थान संदर्भ में रावतभाटा का राजस्थान परमाणु ऊर्जा स्टेशन PHWR आधारित विज्ञान-तकनीक उदाहरण है; पर विस्तृत परमाणु प्रतिरोध और निर्यात-नियंत्रण व्यवस्थाएँ इस विषय की मुख्य गहराई नहीं हैं।

पाठ्यक्रम सीमा और पढ़ने का तरीका

यह विषय CET स्नातक स्तर के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी खंड के भीतर रहना चाहिए। इस पाठ्यक्रम ढाँचे में सूचना और संचार तकनीक, रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक और उपग्रह, तथा राजस्थान के विशेष संदर्भ में विज्ञान-तकनीक का विकास आता है। इसलिए परीक्षा के लिए सही ढाँचा उन्नत हथियार-डिजाइन या कक्षा-गणित नहीं, बल्कि संस्था, प्लेटफॉर्म, उपग्रह, उपयोग और राजस्थान उदाहरण की सही पहचान है।

रक्षा तकनीक क्षेत्र, सेनाओं और महत्वपूर्ण ढाँचे की सुरक्षा से जुड़ी है। अंतरिक्ष तकनीक संचार, मौसम, नौवहन, मानचित्रण, आपदा चेतावनी, शिक्षा, दूर-चिकित्सा, वैज्ञानिक अध्ययन और योजना में काम आती है। उपग्रह केवल प्रतिष्ठा-मिशन नहीं हैं; वे रोजमर्रा की सार्वजनिक आधारभूत व्यवस्था भी हैं। राजस्थान उदाहरण व्यावहारिक रखें: PHWR आधारित परमाणु ऊर्जा के लिए रावतभाटा, या शुष्क क्षेत्र योजना, जल, फसल, वन, खनिज और आपदा प्रतिक्रिया के लिए उपग्रह तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग।

हर नाम पर एक ही कसौटी लगाएँ: यह क्या है, क्या करता है और क्या नहीं है? इसी से तेजस को मिसाइल, NavIC को फसल-चित्रण उपग्रह या PSLV को उपग्रह कहने जैसी गलतियाँ बचती हैं।

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