पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता
मुख्य तथ्य
- 2026 CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के भीतर आता है: पर्यावरणीय और पारिस्थितिक बदलाव, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों का संर...
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्य पशु, पक्षी और पौधों के संरक्षण व प्रबंधन का मुख्य कानूनी ढांचा देता है।
- प्रोजेक्ट टाइगर अप्रैल 1973 में व्यवहार्य बाघ आबादी बनाए रखने और जैविक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के संरक्षण के लिए शुरू हुआ।
- संविधान में अनुच्छेद 48क पर्यावरण के संरक्षण-सुधार से और अनुच्छेद 51क(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के नागरिक कर्तव्य से जुड़ा है।
- वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि के आरक्षण हटाने और गैर-वन उपयोग को आवश्यक केंद्रीय स्वीकृति से जोड़ता है।
मुख्य बिंदु
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2026 CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के भीतर आता है: पर्यावरणीय और पारिस्थितिक बदलाव, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, सतत विकास और पशु-पौधों का आर्थिक महत्व।
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पर्यावरण व्यापक परिवेश है; पारिस्थितिकी जीवों के आपसी संबंध और जीवों व भौतिक परिवेश के संबंधों का अध्ययन है।
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पारितंत्र को केवल प्रजातियों की सूची से नहीं, बल्कि जैव घटक, अजैव घटक, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र से पढ़ें।
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जैव विविधता के तीन मानक स्तर हैं: आनुवंशिक विविधता, प्रजाति विविधता और पारितंत्र विविधता।
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भारत से जुड़े चार वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं: हिमालय, इंडो-बर्मा, पश्चिमी घाट-श्रीलंका और सुंडालैंड।
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वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 भारत में वन्य पशु, पक्षी और पौधों के संरक्षण व प्रबंधन का मुख्य कानूनी ढांचा देता है।
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प्रोजेक्ट टाइगर अप्रैल 1973 में व्यवहार्य बाघ आबादी बनाए रखने और जैविक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों के संरक्षण के लिए शुरू हुआ।
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संविधान में अनुच्छेद 48क पर्यावरण के संरक्षण-सुधार से और अनुच्छेद 51क(छ) प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा के नागरिक कर्तव्य से जुड़ा है।
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वन संरक्षण अधिनियम, 1980 वन भूमि के आरक्षण हटाने और गैर-वन उपयोग को आवश्यक केंद्रीय स्वीकृति से जोड़ता है।
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पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 केंद्र सरकार को पर्यावरण की गुणवत्ता के संरक्षण और सुधार के लिए उपाय करने की शक्ति देता है।
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जैव विविधता अधिनियम, 2002 तीन बातों को साथ रखता है: संरक्षण, सतत उपयोग और न्यायसंगत लाभ-साझेदारी।
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 पर्यावरण और वन-संरक्षण मामलों के प्रभावी व त्वरित निपटारे के लिए विशेष मंच बनाता है।
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मिशन लाइफ 2022 में शुरू हुआ और व्यक्तिगत व सामुदायिक व्यवहार को पर्यावरण-सुरक्षा से जोड़ता है।
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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान रामसर स्थल और UNESCO विश्व धरोहर दोनों है; सांभर झील लवणीय रामसर आर्द्रभूमि है, मीठे पानी का राष्ट्रीय उद्यान नहीं।
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CET उत्तरों में पैमाना, प्रक्रिया और कानूनी साधन साथ रखें: जीन/प्रजाति/पारितंत्र, संरक्षण/पुनर्स्थापन और कानून/संधि/स्थल-श्रेणी एक-दूसरे के विकल्प नहीं हैं।
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पर्यावरण और पारिस्थितिकी की मूल समझ
पर्यावरण वह पूरा परिवेश है जिसमें जीव और मानव-समाज रहते हैं: वायु, जल, भूमि, जलवायु, मिट्टी, संसाधन, बस्तियाँ, संस्थाएँ और जीवित समुदाय। पारिस्थितिकी इससे अधिक विशिष्ट और विश्लेषणात्मक अध्ययन है। यह जीवों के आपसी संबंध और जीवों व उनके भौतिक परिवेश के संबंधों को समझती है। कचरा-नियम, खनन स्वीकृति या ऊष्मा कार्य-योजना पर्यावरणीय शासन के उदाहरण हैं; इनके खाद्य-जाल, मिट्टी के जीवों, आर्द्रभूमि या रोग-वाहकों पर प्रभाव को समझना पारिस्थितिक विश्लेषण है।
CET में यह फर्क प्रक्रिया-शब्दों से पूछा जाता है। प्रदूषण पर्यावरणीय क्षरण का केवल एक रूप है। आवास-हानि, आवास-खंडन, अतिचराई, आक्रामक प्रजातियाँ, भूजल-क्षय, जलवायु परिवर्तन और असतत दोहन बिना दिखने वाले जहरीले प्रदूषक के भी पारिस्थितिकी को नुकसान पहुँचा सकते हैं। इसी तरह हर हरा दिखने वाला हस्तक्षेप पारिस्थितिक पुनर्स्थापन नहीं होता; एकल-प्रजाति वृक्षारोपण पेड़ों की संख्या बढ़ा सकता है, पर स्थानीय घासभूमि या आर्द्रभूमि जैव विविधता घटा सकता है।
मुख्य पकड़: पर्यावरण व्यापक परिवेश है; पारिस्थितिकी उसी परिवेश के भीतर जैविक संबंध और प्रक्रियाएँ समझाती है।
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