मुख्य तथ्य

  • 2026 CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के भीतर आता है: आहार और पोषण; रक्त समूह और आरएच कारक; स्वास्थ्य देखभाल;
  • पोषण के प्रश्नों में पोषक तत्व और काम को साथ जोड़ें: कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन वृद्धि और मरम्मत में काम आते हैं, वसा सघन ऊर्जा और वसा-घुल...
  • रक्त में मुख्य रूप से प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स होते हैं;
  • एबीओ प्रणाली लाल रक्त कणिकाओं पर ए और बी प्रतिजनों तथा प्लाज्मा के प्रतिपिंडों पर आधारित है; आरएच कारक अलग रक्त-समूह कारक है, एबीओ का उपप्रकार नहीं।
  • इस विषय में स्वास्थ्य देखभाल का अर्थ रोकथाम और समय पर कदम दोनों है: स्वच्छता, सुरक्षित जल, टीकाकरण, पोषण, पहली चिकित्सा-संपर्क सेवा, जाँच, रेफरल और दव...

मुख्य बिंदु

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    2026 CET स्नातक पाठ्यक्रम में यह विषय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के भीतर आता है: आहार और पोषण; रक्त समूह और आरएच कारक; स्वास्थ्य देखभाल; संक्रामक, असंक्रामक और पशुजन्य रोग।

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    पोषण के प्रश्नों में पोषक तत्व और काम को साथ जोड़ें: कार्बोहाइड्रेट ऊर्जा देते हैं, प्रोटीन वृद्धि और मरम्मत में काम आते हैं, वसा सघन ऊर्जा और वसा-घुलनशील विटामिनों के अवशोषण में मदद करती है, तथा विटामिन-खनिज नियमन और सुरक्षा में जरूरी हैं।

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    रक्त में मुख्य रूप से प्लाज्मा, लाल रक्त कणिकाएँ, श्वेत रक्त कणिकाएँ और प्लेटलेट्स होते हैं; सुरक्षित रक्ताधान और गर्भावस्था-देखभाल में एबीओ और आरएच अनुकूलता महत्वपूर्ण है।

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    एबीओ प्रणाली लाल रक्त कणिकाओं पर ए और बी प्रतिजनों तथा प्लाज्मा के प्रतिपिंडों पर आधारित है; आरएच कारक अलग रक्त-समूह कारक है, एबीओ का उपप्रकार नहीं।

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    इस विषय में स्वास्थ्य देखभाल का अर्थ रोकथाम और समय पर कदम दोनों है: स्वच्छता, सुरक्षित जल, टीकाकरण, पोषण, पहली चिकित्सा-संपर्क सेवा, जाँच, रेफरल और दवा का विवेकपूर्ण उपयोग।

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    संक्रामक रोग जीवाणु, विषाणु, परजीवी और कवक जैसे कारकों से होते हैं; परीक्षा में प्रायः रोग-कारक, संचरण-मार्ग और रोकथाम को मिलाकर पूछा जाता है।

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    पशुजन्य रोग पशुओं से मनुष्यों में सीधे या भोजन, जल, वाहक अथवा वातावरण के माध्यम से फैलते हैं; रेबीज, ब्रूसेलोसिस, लेप्टोस्पायरोसिस, पक्षी इन्फ्लुएंजा और कुछ कोरोनाविषाणु इसके उपयोगी उदाहरण हैं।

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    मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय-रोग, कैंसर, दमा और कमी-रोग जैसे असंक्रामक रोग संक्रमण से नहीं फैलते, पर जोखिम-कारकों के नियंत्रण से इनमें से कई को रोका या संभाला जा सकता है।

पाठ्यक्रम-सीमा और मानव शरीर की मूल समझ

CET स्नातक 2026 में इस विषय को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उन्हीं बिंदुओं से पढ़ना है: आहार और पोषण; रक्त समूह और आरएच कारक; स्वास्थ्य देखभाल; संक्रामक, असंक्रामक और पशुजन्य रोग। मानव शरीर की थोड़ी पृष्ठभूमि उपयोगी है, लेकिन केवल तब जब वह इन बिंदुओं को समझाने में मदद करे। शरीर कोशिकाओं, ऊतकों, अंगों और अंग-तंत्रों से बना है, पर परीक्षा का मूल्य काम में है: पाचन पोषक तत्वों को अवशोषण योग्य बनाता है, रक्त गैसों और पोषक पदार्थों को ले जाता है, प्रतिरक्षा हानिकारक कारकों से बचाती है, और गुर्दे नाइट्रोजनयुक्त अपशिष्ट हटाकर जल-लवण संतुलन में मदद करते हैं।

पाचन, श्वसन, रक्त-संचार, उत्सर्जन, तंत्रिका और अंतःस्रावी तंत्रों को अलग-अलग नाम-सूची की तरह न पढ़ें। पाचन जटिल भोजन को सरल अवशोषण योग्य पदार्थों में बदलता है; श्वसन में हवा फेफड़ों में आती-जाती है; कोशिकीय श्वसन कोशिकाओं में ऊर्जा छोड़ता है; रक्त-संचार ऑक्सीजन, पोषक तत्व, हार्मोन, अपशिष्ट और प्रतिरक्षा कोशिकाएँ ले जाता है; उत्सर्जन चयापचय अपशिष्ट हटाता है। तापमान, जल-संतुलन और रक्त ग्लूकोज जैसे आंतरिक संतुलन को बनाए रखना होमियोस्टेसिस कहलाता है।

परीक्षा-संकेत: शरीर-तंत्रों को पोषण, रक्त और रोगों की बुनियाद की तरह पढ़ें। मेंडल के नियम, गुणसूत्र-मानचित्रण या DNA के विस्तृत अपवाद जैसे गहरे आनुवंशिकी बिंदु नए स्पष्ट पाठ्यक्रम से बाहर हैं, जब तक वे सीधे रक्त समूह या रोग-जोखिम से न जुड़ें।

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