लाडो प्रोत्साहन योजना
राजस्थान सरकार
लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। योजना में पात्रता, भुगतान के चरण और इसे लागू करने की व्यवस्था बताई गई है। उद्देश्य: • बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और उसका समग्र विकास सुनिश्चित करना। • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग के आधार पर होने वाला भेदभाव घटाना। • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना और शिशु लिंगानुपात सुधारना। • बालिकाओं का स्कूल में नामांकन बढ़ाना, उनकी पढ़ाई जारी रखना, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और बाल विवाह रोकना। पात्रता: • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की ज़रूरत नहीं है। • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; अन्य शर्तें वही रहती हैं। • आय, EWS या वर्ग की कोई सीमा नहीं है। परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर भी कोई बंधन नहीं है; बजट उपलब्ध होने पर परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ दिया जाता है। • स्कूल की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए। अंतिम किस्त के लिए उसे मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ 21 वर्ष की आयु पूरी करनी होगी। • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है। लाभ: • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है। जन्म के समय ऑनलाइन भुगतान प्रणाली (OJAS) पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है। • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500। • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीके लगने का रिकॉर्ड पूरा होने पर ₹2,500; 2026 के संशोधन में एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया। • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000। • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000। • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000। • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000। • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई। यह 2025-26 के बजट भाषण की घोषणा संख्या 44 थी; सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई। क्रियान्वयन: • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है। • प्रसव-पूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण गर्भावस्था एवं बाल स्वास्थ्य की नाम-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली (PCTS) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। जन्म पर बालिका को एक विशिष्ट PCTS आईडी मिलती है। • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS और OJAS में रिकॉर्ड अपने-आप अपडेट होने पर देता है। इसके लिए अलग आवेदन की ज़रूरत नहीं है; 9-12 माह का टीकाकरण PCTS में अपने-आप दर्ज हो जाता है। • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल से देता है। इसके लिए PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR) आईडी का उपयोग होता है। • स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग उसकी जांच करता है और अंतिम किस्त जारी करता है। वित्त-पोषण और निगरानी: • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट देता है। • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS, OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर तुरंत निगरानी और विश्लेषण किया जाता है। • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है। जिला कलेक्टर हर 3 माह में इसकी समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स देखरेख करती है। हाल के बदलाव: • संशोधित समेकित दिशा-निर्देश 19 मार्च 2026 को मंज़ूर हुए थे और वित्त विभाग ने 13 मार्च 2026 को स्वीकृति दी थी। ये बदलाव 1 अगस्त 2024 से प्रभावी हैं। इनमें एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया गया और मूल निवास की शर्त में छूट दी गई। • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में मिला दिया गया है। राजश्री योजना की बची हुई किस्तें, जिनमें उसकी तीसरी किस्त भी शामिल है, अब पात्रता के अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं। • 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए। परीक्षा के लिए मुख्य बातें: • यह राजस्थान की व्यक्तिगत लाभ वाली, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना है। इसमें लाभार्थी को अंशदान नहीं देना होता और महिला अधिकारिता निदेशालय नोडल संस्था है। • ₹1.50 लाख, 7 किस्तें, 1 अगस्त 2024, 2024-25 के लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 को कुल राशि बढ़ाकर ₹1.50 लाख किए जाने और राजश्री योजना के विलय का क्रम याद रखें।
मास्टर रिकॉर्ड
| फ़ील्ड | विवरण |
|---|---|
| नाम | लाडो प्रोत्साहन योजना |
| प्रकार / श्रेणी | राजस्थान सरकार |
| स्तर | राजस्थान सरकार |
| उद्देश्य | लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। योजना में पात्रता, भुगतान के चरण और इसे लागू करने की व्यवस्था बताई गई है। उद्देश्य: • बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और उसका समग्र विकास सुनिश्चित करना। • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग के आधार पर होने वाला भेदभाव घटाना। • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना और शिशु लिंगानुपात सुधारना। • बालिकाओं का स्कूल में नामांकन बढ़ाना, उनकी पढ़ाई जारी रखना, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और बाल विवाह रोकना। पात्रता: • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की ज़रूरत नहीं है। • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; अन्य शर्तें वही रहती हैं। • आय, EWS या वर्ग की कोई सीमा नहीं है। परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर भी कोई बंधन नहीं है; बजट उपलब्ध होने पर परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ दिया जाता है। • स्कूल की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए। अंतिम किस्त के लिए उसे मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ 21 वर्ष की आयु पूरी करनी होगी। • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है। लाभ: • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है। जन्म के समय ऑनलाइन भुगतान प्रणाली (OJAS) पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है। • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500। • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीके लगने का रिकॉर्ड पूरा होने पर ₹2,500; 2026 के संशोधन में एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया। • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000। • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000। • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000। • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000। • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई। यह 2025-26 के बजट भाषण की घोषणा संख्या 44 थी; सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई। क्रियान्वयन: • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है। • प्रसव-पूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण गर्भावस्था एवं बाल स्वास्थ्य की नाम-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली (PCTS) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। जन्म पर बालिका को एक विशिष्ट PCTS आईडी मिलती है। • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS और OJAS में रिकॉर्ड अपने-आप अपडेट होने पर देता है। इसके लिए अलग आवेदन की ज़रूरत नहीं है; 9-12 माह का टीकाकरण PCTS में अपने-आप दर्ज हो जाता है। • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल से देता है। इसके लिए PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR) आईडी का उपयोग होता है। • स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग उसकी जांच करता है और अंतिम किस्त जारी करता है। वित्त-पोषण और निगरानी: • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट देता है। • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS, OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर तुरंत निगरानी और विश्लेषण किया जाता है। • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है। जिला कलेक्टर हर 3 माह में इसकी समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स देखरेख करती है। हाल के बदलाव: • संशोधित समेकित दिशा-निर्देश 19 मार्च 2026 को मंज़ूर हुए थे और वित्त विभाग ने 13 मार्च 2026 को स्वीकृति दी थी। ये बदलाव 1 अगस्त 2024 से प्रभावी हैं। इनमें एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया गया और मूल निवास की शर्त में छूट दी गई। • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में मिला दिया गया है। राजश्री योजना की बची हुई किस्तें, जिनमें उसकी तीसरी किस्त भी शामिल है, अब पात्रता के अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं। • 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए। परीक्षा के लिए मुख्य बातें: • यह राजस्थान की व्यक्तिगत लाभ वाली, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना है। इसमें लाभार्थी को अंशदान नहीं देना होता और महिला अधिकारिता निदेशालय नोडल संस्था है। • ₹1.50 लाख, 7 किस्तें, 1 अगस्त 2024, 2024-25 के लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 को कुल राशि बढ़ाकर ₹1.50 लाख किए जाने और राजश्री योजना के विलय का क्रम याद रखें। |
| मुख्य बिंदु | लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान की DBT अनुदान योजना है, जो 1 अगस्त 2024 से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और पढ़ाई जारी रखने में सहायता देती है। · यह योजना 2024-25 के लेखानुदान (अंतरिम बजट) की घोषणा संख्या 34 के तहत शुरू हुई। · महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय इसका नोडल विभाग है। |
| शुभारंभ तिथि | 2024 |
| स्रोत | आधिकारिक स्रोत |
मेन्स में कहाँ उपयोग
सारांश
लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। योजना में पात्रता, भुगतान के चरण और इसे लागू करने की व्यवस्था बताई गई है।
उद्देश्य
- बालिका के जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और उसका समग्र विकास सुनिश्चित करना।
- पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग के आधार पर होने वाला भेदभाव घटाना।
- संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना और शिशु लिंगानुपात सुधारना।
- बालिकाओं का स्कूल में नामांकन बढ़ाना, उनकी पढ़ाई जारी रखना, उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और बाल विवाह रोकना।
पात्रता
- प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की ज़रूरत नहीं है।
- बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो।
- राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; अन्य शर्तें वही रहती हैं।
- आय, EWS या वर्ग की कोई सीमा नहीं है। परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर भी कोई बंधन नहीं है; बजट उपलब्ध होने पर परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ दिया जाता है।
- स्कूल की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए। अंतिम किस्त के लिए उसे मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने के साथ 21 वर्ष की आयु पूरी करनी होगी।
- योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है।
लाभ
- कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है। जन्म के समय ऑनलाइन भुगतान प्रणाली (OJAS) पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है।
- किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500।
- किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीके लगने का रिकॉर्ड पूरा होने पर ₹2,500; 2026 के संशोधन में एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया।
- किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000।
- किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000।
- किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000।
- किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000।
- किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000।
- कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई। यह 2025-26 के बजट भाषण की घोषणा संख्या 44 थी; सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई।
क्रियान्वयन
- पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है।
- प्रसव-पूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण गर्भावस्था एवं बाल स्वास्थ्य की नाम-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली (PCTS) पोर्टल पर दर्ज किया जाता है। जन्म पर बालिका को एक विशिष्ट PCTS आईडी मिलती है।
- पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS और OJAS में रिकॉर्ड अपने-आप अपडेट होने पर देता है। इसके लिए अलग आवेदन की ज़रूरत नहीं है; 9-12 माह का टीकाकरण PCTS में अपने-आप दर्ज हो जाता है।
- तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल से देता है। इसके लिए PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR) आईडी का उपयोग होता है।
- स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद उच्च शिक्षा विभाग उसकी जांच करता है और अंतिम किस्त जारी करता है।
वित्त-पोषण और निगरानी
- महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट देता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS, OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर तुरंत निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।
- महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है। जिला कलेक्टर हर 3 माह में इसकी समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स देखरेख करती है।
हाल के बदलाव
- संशोधित समेकित दिशा-निर्देश 19 मार्च 2026 को मंज़ूर हुए थे और वित्त विभाग ने 13 मार्च 2026 को स्वीकृति दी थी। ये बदलाव 1 अगस्त 2024 से प्रभावी हैं। इनमें एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया गया और मूल निवास की शर्त में छूट दी गई।
- मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में मिला दिया गया है। राजश्री योजना की बची हुई किस्तें, जिनमें उसकी तीसरी किस्त भी शामिल है, अब पात्रता के अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं।
- 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए।
परीक्षा के लिए मुख्य बातें
- यह राजस्थान की व्यक्तिगत लाभ वाली, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना है। इसमें लाभार्थी को अंशदान नहीं देना होता और महिला अधिकारिता निदेशालय नोडल संस्था है।
- ₹1.50 लाख, 7 किस्तें, 1 अगस्त 2024, 2024-25 के लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 को कुल राशि बढ़ाकर ₹1.50 लाख किए जाने और राजश्री योजना के विलय का क्रम याद रखें।
मुख्य बिंदु
- लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान की DBT अनुदान योजना है, जो 1 अगस्त 2024 से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और पढ़ाई जारी रखने में सहायता देती है।
- यह योजना 2024-25 के लेखानुदान (अंतरिम बजट) की घोषणा संख्या 34 के तहत शुरू हुई।
- महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय इसका नोडल विभाग है।
- कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; ऑनलाइन भुगतान प्रणाली (OJAS) पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है।
- किस्तों का क्रम है: जन्म पर ₹2,500, 9-12 माह के टीकाकरण पर ₹2,500, कक्षा 1 में ₹4,000, कक्षा 6 में ₹5,000, कक्षा 10 में ₹11,000, कक्षा 12 में ₹25,000 और स्नातक उत्तीर्ण करने तथा 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000।
- कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई। यह 2025-26 के बजट की घोषणा संख्या 44 थी और इसमें सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई।
- बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिए।
- प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार होने पर अलग मूल निवास प्रमाण-पत्र ज़रूरी नहीं है।
- आय, EWS या वर्ग की कोई सीमा नहीं है। परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर भी कोई बंधन नहीं है; बजट उपलब्ध होने पर परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ दिया जाता है।
- पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग गर्भावस्था एवं बाल स्वास्थ्य की नाम-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली (PCTS) और OJAS से देता है; अलग आवेदन की ज़रूरत नहीं है।
- तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण या निजी विद्यालय पोर्टल से देता है। इसमें PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री (APAAR) आईडी का उपयोग होता है।
- उच्च शिक्षा विभाग सातवीं किस्त के रिकॉर्ड की जांच करता है और राशि बालिका के अपने बैंक खाते में जाती है; पहली 6 किस्तें माता-पिता या अभिभावक के खाते में जाती हैं।
- सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) के एकीकृत पोर्टल में PCTS, OJAS और शाला दर्पण का डेटा जुड़ा है। जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स देखरेख करती है।
- 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए।
- मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में मिला दिया गया है और उसकी बची हुई किस्तें अब इसी योजना से दी जा रही हैं।
आधिकारिक स्रोत
इन्फ़ोग्राफ़िक
सात-किस्त लाभ क्रम (कुल ₹1,50,000)
लाडो प्रोत्साहन योजना एक नज़र में
हर पड़ाव तक पहुँचने पर संचयी भुगतान
चरण व भुगतान विभाग के अनुसार वितरण श्रृंखला
पात्रता और शर्तें एक नज़र में
योजना के प्रमुख पड़ाव
अक्सर पूछे गए
लाडो प्रोत्साहन योजना कब और कहाँ लागू हुई?
लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू हुई। यह 2024-25 के लेखानुदान की घोषणा संख्या 34 के तहत शुरू की गई।
योजना का संचालन कौन-सा विभाग करता है?
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय नोडल विभाग है। अलग-अलग चरणों का भुगतान चिकित्सा-स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग करते हैं।
नवीनतम दिशा-निर्देशों के अनुसार किस्तों का क्रम क्या है?
कुल सहायता ₹1,50,000 है: जन्म पर ₹2,500, 9-12 माह के टीकाकरण पर ₹2,500, कक्षा 1 में ₹4,000, कक्षा 6 में ₹5,000, कक्षा 10 में ₹11,000, कक्षा 12 में ₹25,000 और स्नातक उत्तीर्ण करने तथा 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। सातवीं किस्त 12 मार्च 2025 को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 की गई।
क्या कोई आय सीमा या परिवार में बालिकाओं की संख्या पर बंधन है?
नहीं। आय, EWS या वर्ग की कोई सीमा नहीं है। परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर भी कोई बंधन नहीं है; बजट उपलब्ध होने पर परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ दिया जाता है।
जन्म के समय पात्रता क्या है और राशि किसके खाते में जाती है?
प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार हो। बालिका का जन्म राजकीय या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। पहली 6 किस्तें माता-पिता या अभिभावक के खाते में और सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में जाती है।
2026 के संशोधित दिशा-निर्देशों में क्या बदला?
दूसरी किस्त के लिए एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटा दिया गया; अब 9-12 माह का टीकाकरण पर्याप्त है। जन आधार होने पर मूल निवास प्रमाण-पत्र की शर्त में भी छूट दी गई। ये बदलाव 1 अगस्त 2024 से प्रभावी हैं और 19 मार्च 2026 को मंज़ूर हुए।
मुख्यमंत्री राजश्री योजना से इसका क्या संबंध है?
मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में मिला दिया गया है। राजश्री योजना की बची हुई किस्तें, जिनमें उसकी तीसरी किस्त भी शामिल है, अब पात्रता के अनुसार लाडो प्रोत्साहन योजना से दी जा रही हैं।
