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राजस्थान सरकार

लाडो प्रोत्साहन योजना

राजस्थान सरकार

लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। यह पेज आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता, भुगतान के चरण और योजना की लागू स्थिति समझाता है। उद्देश्य: • बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और बालिका का समग्र विकास सुनिश्चित करना। • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग-आधारित भेदभाव घटाना। • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना तथा शिशु लिंगानुपात सुधारना। • बालिकाओं का स्कूल नामांकन, ठहराव और उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करना। पात्रता: • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है। • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; शर्तें वही रहती हैं। • कोई आय, EWS या वर्ग की सीमा नहीं है और एक परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर कोई बंधन नहीं है; गाइडलाइन ऐसी हर सीमा स्पष्ट रूप से हटाती है, इसलिए परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ देय है (बजट उपलब्धता के अधीन)। • स्कूल चरण की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए; अंतिम किस्त के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करना और 21 वर्ष की आयु पूरी करना ज़रूरी है। • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है। लाभ: • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; जन्म पर बालिका को OJAS पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है। • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500। • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीकाकरण पूर्ण होना प्रमाणित होने पर ₹2,500; 2026 संशोधन के बाद एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया है। • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000। • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000। • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000। • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000। • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई (2025-26 बजट भाषण की घोषणा संख्या 44); सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई। क्रियान्वयन: • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है। • प्रसवपूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण PCTS पोर्टल पर दर्ज होता है; जन्म पर बालिका को एक यूनिक PCTS आईडी मिलती है। • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS/OJAS के स्वतः अद्यतन से देता है, अलग आवेदन की जरूरत नहीं; 9-12 माह पर टीकाकरण PCTS पर स्वतः दर्ज हो जाता है। • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल के माध्यम से PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या APAAR आईडी के आधार पर देता है। • अंतिम किस्त उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद सत्यापित होकर जारी होती है। वित्त-पोषण और निगरानी: • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट हस्तांतरित करता है। • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक अलग एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS/OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर वास्तविक-समय निगरानी और विश्लेषण किया जाता है। • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है; जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स पर्यवेक्षण करती है। हाल के अपडेट: • 19 मार्च 2026 को अनुमोदित संशोधित समेकित गाइडलाइन (वित्त विभाग का अनुमोदन 13 मार्च 2026), जो 1 अगस्त 2024 से प्रभावी है, ने एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया और मूल निवास की शर्त में छूट दी। • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है; राजश्री की शेष किस्तें (इसकी तीसरी किस्त सहित) अब पात्रता अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं। • हस्ताक्षरित गाइडलाइन के अनुसार 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए। परीक्षा बिंदु: • स्वरूप: राजस्थान राज्य की, एकल-लाभार्थी, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना (अंशदान-रहित), नोडल महिला अधिकारिता निदेशालय। • ₹1.50 लाख / 7 किस्तें / 1 अगस्त 2024 / 2024-25 लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 की ₹1.50 लाख वृद्धि और राजश्री योजना का विलय — यही संयोजन याद रखें।

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फ़ील्डविवरण
नामलाडो प्रोत्साहन योजना
प्रकार / श्रेणीराजस्थान सरकार
स्तरराजस्थान सरकार
उद्देश्यलाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। यह पेज आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता, भुगतान के चरण और योजना की लागू स्थिति समझाता है। उद्देश्य: • बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और बालिका का समग्र विकास सुनिश्चित करना। • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग-आधारित भेदभाव घटाना। • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना तथा शिशु लिंगानुपात सुधारना। • बालिकाओं का स्कूल नामांकन, ठहराव और उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करना। पात्रता: • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है। • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; शर्तें वही रहती हैं। • कोई आय, EWS या वर्ग की सीमा नहीं है और एक परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर कोई बंधन नहीं है; गाइडलाइन ऐसी हर सीमा स्पष्ट रूप से हटाती है, इसलिए परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ देय है (बजट उपलब्धता के अधीन)। • स्कूल चरण की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए; अंतिम किस्त के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करना और 21 वर्ष की आयु पूरी करना ज़रूरी है। • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है। लाभ: • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; जन्म पर बालिका को OJAS पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है। • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500। • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीकाकरण पूर्ण होना प्रमाणित होने पर ₹2,500; 2026 संशोधन के बाद एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया है। • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000। • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000। • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000। • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000। • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई (2025-26 बजट भाषण की घोषणा संख्या 44); सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई। क्रियान्वयन: • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है। • प्रसवपूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण PCTS पोर्टल पर दर्ज होता है; जन्म पर बालिका को एक यूनिक PCTS आईडी मिलती है। • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS/OJAS के स्वतः अद्यतन से देता है, अलग आवेदन की जरूरत नहीं; 9-12 माह पर टीकाकरण PCTS पर स्वतः दर्ज हो जाता है। • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल के माध्यम से PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या APAAR आईडी के आधार पर देता है। • अंतिम किस्त उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद सत्यापित होकर जारी होती है। वित्त-पोषण और निगरानी: • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट हस्तांतरित करता है। • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक अलग एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS/OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर वास्तविक-समय निगरानी और विश्लेषण किया जाता है। • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है; जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स पर्यवेक्षण करती है। हाल के अपडेट: • 19 मार्च 2026 को अनुमोदित संशोधित समेकित गाइडलाइन (वित्त विभाग का अनुमोदन 13 मार्च 2026), जो 1 अगस्त 2024 से प्रभावी है, ने एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया और मूल निवास की शर्त में छूट दी। • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है; राजश्री की शेष किस्तें (इसकी तीसरी किस्त सहित) अब पात्रता अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं। • हस्ताक्षरित गाइडलाइन के अनुसार 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए। परीक्षा बिंदु: • स्वरूप: राजस्थान राज्य की, एकल-लाभार्थी, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना (अंशदान-रहित), नोडल महिला अधिकारिता निदेशालय। • ₹1.50 लाख / 7 किस्तें / 1 अगस्त 2024 / 2024-25 लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 की ₹1.50 लाख वृद्धि और राजश्री योजना का विलय — यही संयोजन याद रखें।
मुख्य बिंदुलाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान की राज्य DBT अनुदान योजना है, जो 1 अगस्त 2024 से बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और ठहराव के लिए लागू है। · यह योजना 2024-25 के लेखानुदान (अंतरिम बजट) की घोषणा संख्या 34 की अनुपालना में शुरू हुई। · नोडल विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय है।
शुभारंभ तिथि2024
स्रोतआधिकारिक स्रोत

मेन्स में कहाँ उपयोग

पेपर II: कल्याण, शासन और सामाजिक न्याय के उत्तरों में उदाहरण के रूप में उपयोग करें।
निबंध: लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। यह पेज आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता, भुगतान के चरण और योजना की लागू स्थिति समझाता है। उद्देश्य: • बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और बालिका का समग्र विकास सुनिश्चित करना। • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग-आधारित भेदभाव घटाना। • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना तथा शिशु लिंगानुपात सुधारना। • बालिकाओं का स्कूल नामांकन, ठहराव और उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करना। पात्रता: • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है। • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; शर्तें वही रहती हैं। • कोई आय, EWS या वर्ग की सीमा नहीं है और एक परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर कोई बंधन नहीं है; गाइडलाइन ऐसी हर सीमा स्पष्ट रूप से हटाती है, इसलिए परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ देय है (बजट उपलब्धता के अधीन)। • स्कूल चरण की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए; अंतिम किस्त के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करना और 21 वर्ष की आयु पूरी करना ज़रूरी है। • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है। लाभ: • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; जन्म पर बालिका को OJAS पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है। • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500। • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीकाकरण पूर्ण होना प्रमाणित होने पर ₹2,500; 2026 संशोधन के बाद एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया है। • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000। • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000। • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000। • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000। • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000। • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई (2025-26 बजट भाषण की घोषणा संख्या 44); सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई। क्रियान्वयन: • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है। • प्रसवपूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण PCTS पोर्टल पर दर्ज होता है; जन्म पर बालिका को एक यूनिक PCTS आईडी मिलती है। • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS/OJAS के स्वतः अद्यतन से देता है, अलग आवेदन की जरूरत नहीं; 9-12 माह पर टीकाकरण PCTS पर स्वतः दर्ज हो जाता है। • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल के माध्यम से PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या APAAR आईडी के आधार पर देता है। • अंतिम किस्त उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद सत्यापित होकर जारी होती है। वित्त-पोषण और निगरानी: • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट हस्तांतरित करता है। • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक अलग एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS/OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर वास्तविक-समय निगरानी और विश्लेषण किया जाता है। • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है; जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स पर्यवेक्षण करती है। हाल के अपडेट: • 19 मार्च 2026 को अनुमोदित संशोधित समेकित गाइडलाइन (वित्त विभाग का अनुमोदन 13 मार्च 2026), जो 1 अगस्त 2024 से प्रभावी है, ने एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया और मूल निवास की शर्त में छूट दी। • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है; राजश्री की शेष किस्तें (इसकी तीसरी किस्त सहित) अब पात्रता अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं। • हस्ताक्षरित गाइडलाइन के अनुसार 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए। परीक्षा बिंदु: • स्वरूप: राजस्थान राज्य की, एकल-लाभार्थी, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना (अंशदान-रहित), नोडल महिला अधिकारिता निदेशालय। • ₹1.50 लाख / 7 किस्तें / 1 अगस्त 2024 / 2024-25 लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 की ₹1.50 लाख वृद्धि और राजश्री योजना का विलय — यही संयोजन याद रखें।

सारांश

लाडो प्रोत्साहन योजना 1 अगस्त 2024 से पूरे राजस्थान में लागू है। इसमें ₹1.50 लाख की राशि 7 ऑनलाइन DBT किस्तों में दी जाती है। यह पेज आधिकारिक दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता, भुगतान के चरण और योजना की लागू स्थिति समझाता है।

उद्देश्य

  • बालिका जन्म के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और बालिका का समग्र विकास सुनिश्चित करना।
  • पालन-पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा और अवसरों में लिंग-आधारित भेदभाव घटाना।
  • संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना, मातृ एवं बालिका शिशु मृत्यु दर घटाना तथा शिशु लिंगानुपात सुधारना।
  • बालिकाओं का स्कूल नामांकन, ठहराव और उच्च शिक्षा सुनिश्चित करना तथा बाल विवाह को हतोत्साहित करना।

पात्रता

  • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार कार्ड हो; 2026 के संशोधन के बाद जन आधार उपलब्ध होने पर अलग से मूल निवास प्रमाण-पत्र की जरूरत नहीं है।
  • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो।
  • राजस्थान की वह निवासी प्रसूता भी पात्र है जिसका संस्थागत प्रसव राज्य के बाहर हुआ हो, बशर्ते उसे जननी सुरक्षा योजना का लाभ मिला हो; शर्तें वही रहती हैं।
  • कोई आय, EWS या वर्ग की सीमा नहीं है और एक परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर कोई बंधन नहीं है; गाइडलाइन ऐसी हर सीमा स्पष्ट रूप से हटाती है, इसलिए परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ देय है (बजट उपलब्धता के अधीन)।
  • स्कूल चरण की किस्तों के लिए बालिका का प्रवेश राजकीय विद्यालय या राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय में होना चाहिए; अंतिम किस्त के लिए मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करना और 21 वर्ष की आयु पूरी करना ज़रूरी है।
  • योजना 1 अगस्त 2024 या उसके बाद जन्मी बालिकाओं पर लागू है।

लाभ

  • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; जन्म पर बालिका को OJAS पोर्टल पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है।
  • किस्त 1: पात्र चिकित्सा संस्थान में जन्म पर ₹2,500।
  • किस्त 2: 9-12 माह तक के सभी टीकाकरण पूर्ण होना प्रमाणित होने पर ₹2,500; 2026 संशोधन के बाद एक वर्ष तक जीवित होने का अलग प्रमाण-पत्र हटा दिया गया है।
  • किस्त 3: कक्षा 1 में प्रवेश पर ₹4,000।
  • किस्त 4: कक्षा 6 में प्रवेश पर ₹5,000।
  • किस्त 5: कक्षा 10 में प्रवेश पर ₹11,000।
  • किस्त 6: कक्षा 12 में प्रवेश पर ₹25,000।
  • किस्त 7: स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने और 21 वर्ष की आयु पूरी करने पर ₹1,00,000।
  • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई (2025-26 बजट भाषण की घोषणा संख्या 44); सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई।

क्रियान्वयन

  • पहली 6 किस्तें माता, पिता, अभिभावक या पालनहार के बैंक खाते में जाती हैं; सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में DBT से दी जाती है।
  • प्रसवपूर्व जांच के दौरान माता का आधार, जन आधार और बैंक खाते का विवरण PCTS पोर्टल पर दर्ज होता है; जन्म पर बालिका को एक यूनिक PCTS आईडी मिलती है।
  • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS/OJAS के स्वतः अद्यतन से देता है, अलग आवेदन की जरूरत नहीं; 9-12 माह पर टीकाकरण PCTS पर स्वतः दर्ज हो जाता है।
  • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण पोर्टल या मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय पोर्टल के माध्यम से PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या APAAR आईडी के आधार पर देता है।
  • अंतिम किस्त उच्च शिक्षा विभाग के स्तर पर स्नातक का रिकॉर्ड अपलोड होने के बाद सत्यापित होकर जारी होती है।

वित्त-पोषण और निगरानी

  • महिला अधिकारिता निदेशालय किस्त 1-2 के लिए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को, किस्त 3-6 के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को और किस्त 7 के लिए उच्च शिक्षा विभाग को बजट हस्तांतरित करता है।
  • सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (DoIT) ने एक अलग एकीकृत पोर्टल बनाया है, जिसमें PCTS/OJAS और शाला दर्पण का डेटा जोड़कर वास्तविक-समय निगरानी और विश्लेषण किया जाता है।
  • महिला अधिकारिता निदेशालय योजना की प्रशासनिक निगरानी करता है; जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स पर्यवेक्षण करती है।

हाल के अपडेट

  • 19 मार्च 2026 को अनुमोदित संशोधित समेकित गाइडलाइन (वित्त विभाग का अनुमोदन 13 मार्च 2026), जो 1 अगस्त 2024 से प्रभावी है, ने एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया और मूल निवास की शर्त में छूट दी।
  • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है; राजश्री की शेष किस्तें (इसकी तीसरी किस्त सहित) अब पात्रता अनुसार इसी योजना से दी जा रही हैं।
  • हस्ताक्षरित गाइडलाइन के अनुसार 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला और ₹360.13 करोड़ खर्च हुए।

परीक्षा बिंदु

  • स्वरूप: राजस्थान राज्य की, एकल-लाभार्थी, चरण-आधारित DBT अनुदान योजना (अंशदान-रहित), नोडल महिला अधिकारिता निदेशालय।
  • ₹1.50 लाख / 7 किस्तें / 1 अगस्त 2024 / 2024-25 लेखानुदान की घोषणा संख्या 34, 12 मार्च 2025 की ₹1.50 लाख वृद्धि और राजश्री योजना का विलय — यही संयोजन याद रखें।

मुख्य बिंदु

  • लाडो प्रोत्साहन योजना राजस्थान की राज्य DBT अनुदान योजना है, जो 1 अगस्त 2024 से बालिका के स्वास्थ्य, शिक्षा और ठहराव के लिए लागू है।
  • यह योजना 2024-25 के लेखानुदान (अंतरिम बजट) की घोषणा संख्या 34 की अनुपालना में शुरू हुई।
  • नोडल विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय है।
  • कुल सहायता ₹1,50,000 है, जो 7 DBT किस्तों में दी जाती है; OJAS पर ₹1.50 लाख का डिजिटल संकल्प-पत्र जारी होता है।
  • आधिकारिक किस्त क्रम: जन्म पर ₹2,500, 9-12 माह के टीकाकरण पर ₹2,500, कक्षा 1 में ₹4,000, कक्षा 6 में ₹5,000, कक्षा 10 में ₹11,000, कक्षा 12 में ₹25,000 और स्नातक व 21 वर्ष पर ₹1,00,000।
  • कुल राशि 12 मार्च 2025 को ₹1,00,000 से बढ़ाकर ₹1,50,000 की गई (2025-26 बजट की घोषणा संख्या 44), जिसमें सातवीं किस्त ₹50,000 से बढ़कर ₹1,00,000 हुई।
  • बालिका का जन्म राजकीय चिकित्सा संस्थान या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में होना चाहिए।
  • प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार हो; 2026 संशोधन के बाद जन आधार होने पर अलग मूल निवास प्रमाण-पत्र ज़रूरी नहीं है।
  • कोई आय/EWS/वर्ग की सीमा नहीं है और परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर कोई बंधन नहीं; परिवार की हर पात्र बालिका को लाभ देय है, बजट उपलब्धता के अधीन।
  • पहली और दूसरी किस्त चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग PCTS/OJAS से देता है, अलग आवेदन की जरूरत नहीं।
  • तीसरी से छठी किस्त स्कूल शिक्षा विभाग शाला दर्पण या निजी विद्यालय पोर्टल पर PCTS आईडी, जन आधार सदस्य आईडी या APAAR आईडी से देता है।
  • सातवीं किस्त उच्च शिक्षा विभाग के सत्यापन के बाद बालिका के अपने बैंक खाते में जाती है; पहली 6 किस्तें माता-पिता या अभिभावक के खाते में जाती हैं।
  • DoIT के एकीकृत पोर्टल में PCTS/OJAS और शाला दर्पण का डेटा जुड़ा है; जिला कलेक्टर हर 3 माह में समीक्षा करते हैं और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की जिला टास्क फोर्स पर्यवेक्षण करती है।
  • हस्ताक्षरित गाइडलाइन के अनुसार 1 अगस्त 2024 से आदेश की तिथि तक 6.50 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ और ₹360.13 करोड़ व्यय दर्ज है।
  • मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है और इसकी शेष किस्तें अब इसी योजना से दी जा रही हैं।

आधिकारिक स्रोत

आधिकारिक वेबसाइट देखें

इन्फ़ोग्राफ़िक

सात-किस्त लाभ क्रम (कुल ₹1,50,000)

लाडो प्रोत्साहन योजना एक नज़र में

हर पड़ाव तक पहुँचने पर संचयी भुगतान

चरण व भुगतान विभाग के अनुसार वितरण श्रृंखला

पात्रता और शर्तें एक नज़र में

योजना के प्रमुख पड़ाव

अक्सर पूछे गए

लाडो प्रोत्साहन योजना कब और कहाँ लागू हुई?

हस्ताक्षरित समेकित गाइडलाइन में लागू होने की तिथि 1 अगस्त 2024 दर्ज है और यह पूरे राजस्थान में लागू है। यह 2024-25 के लेखानुदान की घोषणा संख्या 34 से जुड़ी है।

योजना का संचालन कौन-सा विभाग करता है?

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन महिला अधिकारिता निदेशालय नोडल विभाग है। चरणवार भुगतान चिकित्सा-स्वास्थ्य, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से होता है।

नवीनतम गाइडलाइन के अनुसार किस्त क्रम क्या है?

कुल सहायता ₹1,50,000 है: जन्म पर ₹2,500, 9-12 माह के टीकाकरण पर ₹2,500, कक्षा 1 में ₹4,000, कक्षा 6 में ₹5,000, कक्षा 10 में ₹11,000, कक्षा 12 में ₹25,000 और स्नातक व 21 वर्ष पर ₹1,00,000। सातवीं किस्त 12 मार्च 2025 को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1,00,000 की गई।

क्या कोई आय सीमा या परिवार में बालिकाओं की संख्या पर बंधन है?

नहीं। कोई आय, EWS या वर्ग की सीमा नहीं है, और गाइडलाइन परिवार में बालिकाओं की संख्या या जन्म-क्रम पर हर बंधन हटाती है; परिवार की हर पात्र बालिका को बजट उपलब्धता के अधीन लाभ देय है।

जन्म के समय पात्रता क्या है और राशि किसके खाते में जाती है?

प्रसूता राजस्थान की निवासी हो और उसके पास आधार तथा जन आधार हो, तथा बालिका का जन्म राजकीय या जननी सुरक्षा योजना से अधिकृत निजी चिकित्सा संस्थान में हुआ हो। पहली 6 किस्तें माता-पिता या अभिभावक को और सातवीं किस्त बालिका के अपने बैंक खाते में जाती है।

2026 की संशोधित गाइडलाइन में क्या बदला?

दूसरी किस्त के लिए एक वर्ष तक जीवित होने का प्रमाण-पत्र हटाया गया (9-12 माह का टीकाकरण पर्याप्त है) और जन आधार होने पर मूल निवास प्रमाण-पत्र की शर्त में छूट दी गई। संशोधन 1 अगस्त 2024 से प्रभावी हैं और 19 मार्च 2026 को अनुमोदित हुए।

मुख्यमंत्री राजश्री योजना से इसका क्या संबंध है?

मुख्यमंत्री राजश्री योजना को लाडो प्रोत्साहन योजना में समाहित कर दिया गया है, और राजश्री की शेष किस्तें (इसकी तीसरी किस्त सहित) अब पात्रता अनुसार लाडो प्रोत्साहन योजना से दी जा रही हैं।