REET लेवल 2 अध्ययन सामग्री
कारक एवं विभक्ति
राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत (वैकल्पिक) कारक-भेद तथा विभक्ति-प्रयोग परखता है।
मुख्य बिंदु
- राजस्थान बोर्ड रीट संस्कृत (वैकल्पिक) कारक-भेद तथा विभक्ति-प्रयोग परखता है।
- छह कारक: कर्तृ, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, अधिकरण।
- संबंध: कर्तृ–प्रथमा, कर्म–द्वितीया, करण–तृतीया, सम्प्रदान–चतुर्थी, अपादान–पञ्चमी, अधिकरण–सप्तमी।
- षष्ठी सम्बन्ध तथा सम्बोधन संबंध हैं पर कारक नहीं।
- कर्मणि प्रयोग में कर्ता तृतीया में जाता है; कर्म प्रथमा तथा क्रिया-मेल लेता है।
- उपपद-विभक्ति: नमः/स्वस्ति/स्वाहा → चतुर्थी; सह/साकम् → तृतीया; ऋते → पञ्चमी; विना → द्वितीया/तृतीया/पञ्चमी।
- भय-शब्द तथा गति: स्रोत पञ्चमी में, लक्ष्य द्वितीया में।
- स्वतंत्र पद-क्रम का अर्थ है कारक स्थान नहीं, विभक्ति से प्रकट होता है।
- प्रमुख फंदे: अपादान बनाम अधिकरण, करण बनाम अपादान, उपपद-अपवाद, वाच्य-परिवर्तन।
- परीक्षा-आदत: पहले क्रिया, छह संबंध-प्रश्न, फिर उपपद-जाँच।
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अध्ययन सामग्री
पाठ्यक्रम सीमा
राजस्थान बोर्ड के रीट भाषा संस्कृत (वैकल्पिक) पाठ्यक्रम में यह विषय कारक-भेद तथा विभक्ति-प्रयोग के अंतर्गत आता है। यह सीमा सटीक और परीक्षा की दृष्टि से अति-उपयोगी है। कारक वह संबंध है जो संज्ञा का क्रिया के साथ होता है; विभक्ति वह सुप्-प्रत्यय है जो उस संबंध को प्रकट करता है। अभ्यर्थी को छह कारक जानने चाहिए — कर्तृ, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान तथा अधिकरण — साथ ही षष्ठी (सम्बन्ध) और सम्बोधन भी, जो कारक नहीं माने जाते।...
शब्दावली एवं पार-विषय संबंध
यह समापन खंड कार्यशील शब्दावली समेटता है और कारक-विभक्ति को निकटवर्ती संस्कृत विषयों से जोड़ता है जिन्हें स्तर-2 शिक्षक मिलाता है। मूल पद हैं: कारक (संज्ञा-क्रिया संबंध), विभक्ति (उसे प्रकट करता प्रत्यय), छह कारक — कर्तृ, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, अधिकरण — तथा दो अकारक संबंध, षष्ठी सम्बन्ध एवं सम्बोधन। याद रखने योग्य शृंखला: कर्तृ–प्रथमा, कर्म–द्वितीया, करण–तृतीया, सम्प्रदान–चतुर्थी, अपादान–पञ्चमी, सम्बन्ध–षष्ठी,...
