मुख्य तथ्य

  • संचार प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक सूचना, अर्थ या समझ स्थानांतरित करने की प्रक्रिया; विल्बर श्रैम (1954)
  • शैनन-वीवर मॉडल (1949) — मूलतः दूरभाष अभियांत्रिकी के लिए; स्रोत → प्रेषक → चैनल → प्राप्तकर्ता → गंतव्य; शोर किसी भी बिंदु पर व्यवधान;
  • बर्लो का SMCR मॉडल (1960) — चार घटक: स्रोत (कौशल, दृष्टिकोण, ज्ञान, सामाजिक तंत्र, संस्कृति), संदेश, चैनल (पाँच इंद्रियाँ), प्राप्तकर्ता।
  • श्रैम का अन्योन्यक्रिया मॉडल (1954) — फ़ीडबैक को केंद्रीय तत्त्व बनाया; प्रेषक और प्राप्तकर्ता दोनों एक साथ कोडर-डीकोडर;
  • अरस्तू का वाग्मिता मॉडल (लगभग 350 ईसा पूर्व)

मुख्य बिंदु

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    संचार प्रेषक से प्राप्तकर्ता तक सूचना, अर्थ या समझ स्थानांतरित करने की प्रक्रिया; विल्बर श्रैम (1954) — प्रेषक एवं प्राप्तकर्ता के बीच विचारों की समानता स्थापित करना।

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    शैनन-वीवर मॉडल (1949) — मूलतः दूरभाष अभियांत्रिकी के लिए; स्रोत → प्रेषक → चैनल → प्राप्तकर्ता → गंतव्य; शोर किसी भी बिंदु पर व्यवधान; संचार एन्ट्रॉपी की अवधारणा।

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    बर्लो का SMCR मॉडल (1960) — चार घटक: स्रोत (कौशल, दृष्टिकोण, ज्ञान, सामाजिक तंत्र, संस्कृति), संदेश, चैनल (पाँच इंद्रियाँ), प्राप्तकर्ता।

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    श्रैम का अन्योन्यक्रिया मॉडल (1954)फ़ीडबैक को केंद्रीय तत्त्व बनाया; प्रेषक और प्राप्तकर्ता दोनों एक साथ कोडर-डीकोडर; अनुभव क्षेत्र संदेश की व्याख्या तय करता है।

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    अरस्तू का वाग्मिता मॉडल (लगभग 350 ईसा पूर्व) — तीन घटक: एथोस (वक्ता की विश्वसनीयता), पैथोस (भावनात्मक प्रभाव), लोगोस (तार्किक तर्क)। आधुनिक सार्वजनिक संचार का आधार।

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    औपचारिक संचार नेटवर्क: व्हील (केंद्रीय केंद्र), चेन (रैखिक), सर्कल (निकटवर्ती सदस्यों से), ऑल-चैनल (सभी से सभी)। व्हील = सरल कार्यों में सबसे तेज; ऑल-चैनल = जटिल कार्यों में सबसे संतोषजनक।

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    अनौपचारिक संचार (ग्रेपवाइन): संगठन में अनौपचारिक सूचना-प्रवाह — कीथ डेविस (1953); 75–95% सटीक लेकिन चयनात्मक; चिंता की स्थिति में सबसे तेज; क्लस्टर चेन, सिंगल स्ट्रैंड, गॉसिप चेन, प्रोबेबिलिटी चेन।

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    संचार बाधाएँ: (1) भौतिक — शोर, दूरी; (2) अर्थ-संबंधी — भाषाई अंतर, तकनीकी शब्दावली; (3) मनोवैज्ञानिक — चयनात्मक धारणा, पूर्वाग्रह; (4) संगठनात्मक — पदानुक्रमीय विकृति, सूचना-अधिभार; (5) सांस्कृतिक — भिन्न मानदंड।

  9. 9

    अशाब्दिक संचार — मेहराबियन (1971): 7% शाब्दिक, 38% स्वर, 55% शारीरिक भाषा। एडवर्ड हॉल (1966) का प्रॉक्सेमिक्स — व्यक्तिगत स्थान और संचार।

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    इलेक्ट्रॉनिक संचार — ईमेल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, सोशल मीडिया, ई-गवर्नेंस पोर्टल। लाभ: गति, पहुँच, दस्तावेज़ीकरण। जोखिम: सूचना-अधिभार, डिजिटल विभाजन, साइबर सुरक्षा, असमकालिक गलतफ़हमी।

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    विनाशकारी संचार — संबंधों को नुकसान पहुँचाने वाले संचार प्रतिरूप। गॉटमैन (1994) के "चार घुड़सवार": आलोचना, अवमानना, रक्षात्मकता, स्टोनवॉलिंग (संवाद से हट जाना)।

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    सक्रिय श्रवण — कार्ल रोजर्स एवं फार्सन (1957) — संचार बाधाओं का उपाय: पूर्ण ध्यान, निर्णय-विलंब, प्रतिबिंबन, स्पष्टीकरण। सक्रिय श्रवण से संगठनों में संघर्ष 40% कम।

इस विषय में संचार क्यों पढ़ना ज़रूरी है?

संचार इसलिए पढ़ना ज़रूरी है क्योंकि RAS अधिकारी का अधिकांश प्रशासनिक काम नीति समझाने, सूचना सुनने, समन्वय करने और गलतफहमी रोकने पर टिकता है। RPSC 2026 मुख्य पाठ्यक्रम के अनुसार लिखित मुख्य परीक्षा में 4 पत्र हैं, प्रत्येक 200 अंक और 3 घंटे का है।

संचार (विषय 125) सभी संगठनात्मक व्यवहार का संयोजी ऊतक है। यद्यपि यह पीवाईक्यू (2021, 2023) में कभी नहीं आया, विस्तारित 2026 व्यवहार अनुभाग — ई-गवर्नेंस और डिजिटल संचार पर बढ़ते ज़ोर के साथ — इसे एक संभावित नए परीक्षा क्षेत्र के रूप में स्थापित करता है। RPSC परीक्षक शैनन-वीवर या बर्लो के मॉडल, संचार नेटवर्क, बाधाएँ (विशेष रूप से मनोवैज्ञानिक और संगठनात्मक), और इलेक्ट्रॉनिक व विनाशकारी संचार के नए आयामों का परीक्षण कर सकते हैं।

RAS अधिकारी के लिए संचार क्यों महत्त्वपूर्ण है: एक जिला कलेक्टर की प्रभावशीलता पूरी तरह संचार की गुणवत्ता पर निर्भर करती है — अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को नीति बताना (अधोमुखी), जमीनी प्रतिपुष्टि प्राप्त करना (ऊर्ध्वमुखी), सहयोगी अधिकारियों से समन्वय करना (क्षैतिज), मीडिया और नागरिकों से संवाद करना (बाह्य), और अनौपचारिक अफवाह-जाल का प्रबंधन करना। प्रबंधन-प्रशिक्षण साहित्य में संचार-विफलता को संगठनात्मक समस्याओं का बड़ा कारण माना जाता है; इसलिए परीक्षा में इसे केवल सिद्धांत की तरह नहीं, प्रशासनिक व्यवहार की तरह पढ़ना चाहिए।

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15Mशैनन-वीवर संचार मॉडल को समझाइए।5 अंक · 50 शब्द

मॉडल उत्तर

शैनन-वीवर मॉडल (1949) के 6 घटक: (1) सूचना स्रोत, (2) प्रेषक/कोडर, (3) चैनल, (4) शोर (व्यवधान), (5) प्राप्तकर्ता/डिकोडर, (6) गंतव्य। एन्ट्रॉपी (अनिश्चितता) और अतिरेक (शोर को कम करने हेतु दोहराव) की अवधारणाएँ दी। सीमा: फ़ीडबैक तंत्र अनुपस्थित; एकतरफा।

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