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MCQ

समाजशास्त्र MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए समाजशास्त्र के 79 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1‘प्रस्थिति और भूमिका’ की जोड़ी में कौन-सा भेद सही है?

A प्रस्थिति सामाजिक स्थान है, जबकि भूमिका उस स्थान से जुड़ा व्यवहारात्मक पक्ष है।
B प्रस्थिति व्यक्ति की जैविक आयु है, जबकि भूमिका व्यक्ति की आय है।
C प्रस्थिति भीड़ में मिली अस्थायी जगह है, जबकि भूमिका जाति की सदस्यता है।
D प्रस्थिति हमेशा अर्जित होती है, जबकि भूमिका हमेशा प्रदत्त होती है।
व्याख्या

समाजशास्त्र में प्रस्थिति और भूमिका जुड़े हुए विचार हैं। व्यक्ति शिक्षक, अभिभावक या विद्यार्थी जैसी कोई प्रस्थिति धारण करता है; भूमिका उस स्थान से जुड़े अपेक्षित आचरण, कर्तव्यों और व्यवहारों से बनती है।

प्र.2जाति से जुड़े सामाजिक बहिष्करण का सबसे स्पष्ट उदाहरण कौन-सी स्थिति है?

A थोक लागत बढ़ने के कारण दुकानदार कीमतें बदल देता है
B एक छात्र सिलेबस की तुलना करके वैकल्पिक विषय चुनता है
C एक मजदूर खेती से कारखाने के रोजगार में चला जाता है
D किसी व्यक्ति को जातिगत पहचान के कारण साझा सामुदायिक सुविधा इस्तेमाल करने से रोक दिया जाता है
व्याख्या

सामाजिक बहिष्करण उन प्रक्रियाओं को कहा जाता है जिनसे व्यक्तियों या समूहों को समाज में पूरी भागीदारी से रोका जाता है। जातिगत पहचान के कारण साझा सुविधा से वंचित करना इसका सीधा उदाहरण है, जबकि बाकी स्थितियां चुनाव, बाजार-परिवर्तन या पेशागत गतिशीलता बताती हैं।

प्र.3समाजशास्त्र को अनुभवजन्य और आत्म-परक दोनों क्यों कहा जाता है, इसे सबसे अच्छे ढंग से कौन-सा विकल्प समझाता है?

A यह तभी अनुभवजन्य बनता है जब भौतिकी की पद्धतियों को बिना बदले अपना ले।
B यह सामाजिक जीवन के बारे में प्रमाण जुटाता है और साथ ही शोधकर्ता की अपनी मान्यताओं, सामाजिक स्थिति और अवधारणाओं की भी जांच करता है।
C जब भी शोधकर्ता उसी समाज का सदस्य हो जिसका अध्ययन हो रहा है, समाजशास्त्र प्रमाण को खारिज कर देता है।
D यह आत्म-परक इसलिए है क्योंकि यह समाज के बजाय व्यक्ति-चेतना के दर्पणों का अध्ययन करता है।
व्याख्या

समाजशास्त्र अवलोकन, तुलना, दस्तावेज़, सर्वेक्षण या साक्षात्कार जैसे प्रमाणों पर निर्भर करता है, इसलिए वह अनुभवजन्य है। साथ ही समाजशास्त्री उसी सामाजिक दुनिया का अध्ययन करते हैं जिसके वे स्वयं सदस्य हैं; इसलिए उन्हें श्रेणियों, मूल्यों और अपनी सामाजिक स्थिति पर भी विचार करना पड़ता है। समाजशास्त्रीय जांच में अनुभवजन्य और आत्म-परक दोनों आयाम एक-दूसरे के पूरक हैं।

प्र.4एक शिक्षक से उसी दिन पाठ तैयार करने, उत्तर पुस्तिकाएँ जाँचने, प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने और प्रशासनिक काम संभालने की अपेक्षा की जाती है। दबाव उसी एक प्रस्थिति के भीतर पैदा हो रहा है। इसके लिए सबसे उपयुक्त अवधारणा कौन-सी है?

A भूमिका-निर्गमन
B प्रदत्त गतिशीलता
C प्रस्थिति-क्रम
D भूमिका-दबाव
व्याख्या

यह उदाहरण भूमिका-दबाव को दिखाता है, क्योंकि शिक्षक की एक ही प्रस्थिति से कई अपेक्षाएँ जुड़ी हैं और वे समय व ऊर्जा के लिए आपस में टकरा रही हैं। यदि दो अलग-अलग प्रस्थितियों, जैसे शिक्षक और अभिभावक, की अपेक्षाएँ टकरातीं, तो भूमिका-संघर्ष अधिक उपयुक्त शब्द होता।

प्र.5भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में 2018 के संशोधन के बाद एक लोक सेवक सामान्य राशन-कार्ड आवेदन को समय पर आगे बढ़ाने के लिए पैसा माँगता है। भ्रष्टाचार को सामाजिक समस्या मानने वाले समाजशास्त्र के प्रश्न में कौन-सी कानूनी-समाजशास्त्रीय व्याख्या सबसे अधिक ठोस है?

A यह केवल प्रशासनिक देरी है, क्योंकि सामान्य सार्वजनिक सेवाएँ भ्रष्टाचार के ढाँचे से बाहर होती हैं।
B यह माँग लोक कर्तव्य से जुड़ा अनुचित लाभ है और दिखाती है कि भ्रष्टाचार किस तरह सार्वजनिक पद को निजी वसूली में बदल देता है।
C यह भ्रष्टाचार तभी होगा जब नागरिक लोक सेवक की किसी माँग या दबाव के बिना स्वेच्छा से उपहार दे।
D जब तक अधिकारी पैसा लेने के बाद भी आवेदन आगे बढ़ाने से अंतिम रूप से मना न कर दे, तब तक भ्रष्टाचार नहीं माना जाएगा।
व्याख्या

इंडिया कोड में उपलब्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का संशोधन-उपरांत पाठ लोक कर्तव्य के संबंध में अनुचित लाभ की भाषा का उपयोग करता है। इसलिए सामान्य सरकारी सेवा करने के बदले पैसा माँगना केवल खराब सेवा-प्रदान नहीं है; यह सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और संस्थाओं पर नागरिकों के भरोसे को कमजोर करने का उदाहरण है। समाजशास्त्रीय बात केवल व्यक्ति के लालच की नहीं, बल्कि संस्थागत विकृति की है।

आपने 79 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

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और प्रश्न

6भारत में भ्रष्टाचार पर चर्चा करते समय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 को कानूनी आधार के रूप में कौन-सा कथन सही ढंग से प्रस्तुत करता है?

Aयह भ्रष्टाचार की रोकथाम से संबंधित कानून को संहिताबद्ध और संशोधित करता है, जिसमें लोक सेवकों द्वारा रिश्वत लिए जाने जैसे अपराध शामिल हैं।
Bयह केवल निजी पारिवारिक विवादों से संबंधित है और लोक सेवकों से इसका कोई संबंध नहीं है।
Cइसने अस्पृश्यता समाप्त की और उससे उत्पन्न सामाजिक निर्योग्यताओं के लिए दंड बनाए।
Dयह गरीबी-सूचकांक का कानून है, जो बहुआयामी गरीबी के बारह संकेतकों को परिभाषित करता है।

7बस स्टैंड पर इंतज़ार कर रहे यात्री एक ही जगह मौजूद हैं, लेकिन उनके बीच स्थायी अंतःक्रिया या अपनत्व की भावना नहीं है। समाजशास्त्रीय दृष्टि से उन्हें सबसे ठीक किस रूप में समझा जाएगा?

Aसमुच्चय
Bसंदर्भ समूह
Cप्राथमिक समूह
Dसंस्था

8जाति के अध्ययन में अंतर्विवाह से क्या आशय है?

Aऊंची प्रतिष्ठा का दावा करने के लिए अपने अनुष्ठानिक व्यवहार बदलना
Bउसी जाति या जाति-समूह के भीतर विवाह करना
Cऔद्योगिक रोजगार के लिए गांव को स्थायी रूप से छोड़ देना
Dकेवल अपनी जाति के उम्मीदवारों को वोट देना

9एक अभ्यर्थी बेरोज़गारी के दो आकलनों की तुलना करता है: सामान्य स्थिति, जिसमें मुख्य और सहायक स्थिति शामिल है, तथा वर्तमान साप्ताहिक स्थिति। भारत में बेरोज़गारी को वर्तमान सामाजिक समस्या के रूप में समझने के लिए कौन-सी व्याख्या सही है?

Aसामान्य स्थिति लंबी संदर्भ-अवधि का उपयोग करती है, जबकि वर्तमान साप्ताहिक स्थिति पिछले सात दिनों पर आधारित अल्प-अवधि की तस्वीर देती है; दोनों श्रम-बल में बेरोज़गारी का आकलन करते हैं।
Bबेरोज़गारी दर में गिरावट हमेशा यह सिद्ध करती है कि सभी सामाजिक समूहों के लिए सुरक्षित नियमित रोज़गार बढ़ गया है।
Cबेरोज़गारी दर कुल आबादी में बेरोज़गार व्यक्तियों का प्रतिशत है, श्रम-बल में नहीं।
Dवर्तमान साप्ताहिक स्थिति पिछले 365 दिनों को कवर करती है, जबकि सामान्य स्थिति केवल पिछले सात दिनों को देखती है।

10कक्षा-अनुशासन पर एक अध्ययन देखता है कि 'तेज़', 'कमज़ोर' और 'शरारती' जैसे लेबल रोज़ की शिक्षक-विद्यार्थी अंतःक्रिया में कैसे बनते हैं और फिर विद्यार्थियों की अपनी समझ को कैसे आकार देते हैं। यहां कौन-सा परिप्रेक्ष्य सबसे सीधे प्रयोग में है?

Aपारिस्थितिक नियतिवाद, क्योंकि यह व्यवहार को केवल भौतिक पर्यावरण से समझाता है
Bशास्त्रीय विकासवादी परिप्रेक्ष्य, क्योंकि यह विद्यार्थियों को सामाजिक विकास की अवस्थाओं के आधार पर क्रम में रखता है
Cकानूनी प्रत्यक्षवाद, क्योंकि विद्यालयी अनुशासन को कानून-जैसे आदेश के रूप में लिया गया है
Dप्रतीकात्मक अंतःक्रियावाद, क्योंकि यह आमने-सामने की स्थितियों में अर्थों, लेबलों और बातचीत से बनी पहचानों का अध्ययन करता है

11एक शिक्षक समझाता है कि गृहस्थ आश्रम समाजशास्त्रीय दृष्टि से केंद्रीय है, क्योंकि वह परिवार, प्रजनन, आर्थिक गतिविधि और दूसरों के प्रति दायित्वों को बनाए रखता है। इस व्याख्या से कौन-सा निष्कर्ष निकलता है?

Aगृहस्थ चरण में अर्थ और काम का पूर्ण त्याग करना अनिवार्य होता है।
Bगृहस्थ चरण तभी शुरू होता है जब संन्यासी सभी सामाजिक संबंध छोड़ चुका हो।
Cगृहस्थ चरण व्यक्ति के जीवन को व्यापक सामाजिक निरंतरता और कर्तव्यों से जोड़ता है।
Dगृहस्थ चरण गुरुकुल के विद्यार्थी जीवन के समान ही है।

12लोकतांत्रिक समाज में सांप्रदायिकता को केवल धार्मिक विविधता न मानकर वर्तमान सामाजिक समस्या क्यों माना जाता है? कौन-सा कथन इसे सबसे ठीक समझाता है?

Aयह धर्मनिरपेक्षता के समान है, क्योंकि दोनों राज्य से सभी धर्मों को समान रूप से मान्यता देने की अपेक्षा करते हैं।
Bयह केवल निजी पूर्वाग्रह तक सीमित है और इसका लामबंदी, मतदान-व्यवहार या सार्वजनिक शक्ति से कोई संबंध नहीं है।
Cयह धार्मिक पहचान को राजनीतिक समुदाय का मुख्य आधार बना देती है और एक समुदाय के हितों को दूसरे समुदाय के हितों के अनिवार्य विरोध में दिखा सकती है।
Dइसका अर्थ है कि अलग-अलग धार्मिक समुदाय अपने अलग त्योहार, खान-पान की प्रथाएँ और पूजा-स्थल बनाए रखते हैं।

13जाति-आधारित विवाह नियमों में अंतर्विवाह का मुख्य अर्थ क्या है?

Aगृहस्थ चरण के सभी सदस्यों के लिए विवाह निषिद्ध होता है।
Bविवाह मान्य जाति या सामाजिक समूह के भीतर सीमित रहता है।
Cअपनी जाति या नातेदारी-समूह से बाहर विवाह करना अनिवार्य है।
Dविवाह केवल वयस्क अवस्था में चुने गए पेशे के आधार पर तय होता है।

14समाजशास्त्र में जाति के अर्थ को सबसे ठीक किस वर्णन से समझा जा सकता है?

Aसभी कामगारों के लिए खुला आधुनिक पेशागत संघ
Bसिर्फ़ वर्तमान वेतन पर आधारित अस्थायी आय-श्रेणी
Cराजनीतिक दबाव बनाने के लिए बनाया गया स्वैच्छिक संगठन
Dजन्म से मिलने वाला दर्जा-समूह, जिसमें क्रमबद्ध ऊंच-नीच और विवाह संबंधी नियम होते हैं

15भारतीय समाजशास्त्र में संस्कृतिकरण शब्द किस प्रक्रिया को बताता है?

Aकोई निम्न या मध्य जाति ऊंची सामाजिक प्रतिष्ठा का दावा करने के लिए उच्च जातियों से जुड़े व्यवहार अपनाती है।
Bकोई वर्ग आनुवंशिकता के कारण जैविक नस्ल बन जाता है।
Cसरकार कानून बनाकर सभी व्यवसायगत अंतरों को समाप्त कर देती है।
Dकोई शहरी मजदूर मजदूरी-समझौते के लिए ट्रेड यूनियन में शामिल होता है।

सामाजिक विज्ञान — भाग II (स्नातक स्तर) में और विषय

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