Aspirant Academy

MCQ

संस्कृत शिक्षण — विधियाँ, सामग्री, कक्षा-अभ्यास MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत शिक्षण — विधियाँ, सामग्री, कक्षा-अभ्यास के 144 प्रश्न हल करें।

अभ्यास प्रश्न

प्र.1व्याख्या-कौशल में किसी संस्कृत श्लोक को समझाते समय शिक्षक को मुख्य रूप से क्या सुनिश्चित करना चाहिए?

A पहले स्पष्ट अर्थ तक पहुँचना, फिर आवश्यक व्याकरणिक आधार देना और अंत में केंद्रीय भाव उभारना।
B संदर्भ छोड़े बिना केवल शब्दशः अनुवाद पर टिके रहना।
C अपनी विद्वत्ता दिखाने के लिए कई असंबद्ध टीकाएँ उद्धृत करना।
D पूरा अध्याय समाप्त होने तक छात्रों के प्रश्नों को रोक देना।
व्याख्या

व्याख्या सूचना दिखाने का काम नहीं, बल्कि अर्थ को योजनाबद्ध ढंग से स्पष्ट करने की प्रक्रिया है। संस्कृत शिक्षण में शिक्षक को पहले आशय साफ करना चाहिए, फिर जहाँ समझ में मदद मिले वहाँ व्याकरण का सहारा देना चाहिए और अंत में पाठ के मुख्य भाव पर ध्यान ले जाना चाहिए।

प्र.2संस्कृत शिक्षक मिश्रित क्षमता वाली कक्षा में गद्यांश का विस्तार से पठन कराने से पहले पठनकौशल मजबूत करना चाहता है। पहला कदम सबसे उपयुक्त कौन-सा होगा?

A शीर्षक, मुख्य शब्दों और पूर्वानुमान-प्रश्नों से मौन पठन से पहले पूर्वज्ञान सक्रिय कराना
B पूरा गद्यांश देखने से पहले प्रत्येक विद्यार्थी से हर शब्द का मातृभाषा में अर्थ कहलवाना
C विद्यार्थियों को गद्यांश से जोड़ने से पहले सभी समासों का पूरा व्याकरण समझा देना
D गद्यांश दो बार बोलकर लिखवाना और फिर फलक पर वर्तनी-दोष जाँचना
व्याख्या

पठनकौशल-विकास में पठन-पूर्व चरण का काम तैयारी और पढ़ने का उद्देश्य बनाना है। शीर्षक, मुख्य शब्द और संदर्भ के आधार पर पूर्वानुमान कराना विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान को पाठ से जोड़ता है; इसके बाद वे मौन पठन या विस्तार से पठन अधिक अर्थपूर्ण ढंग से कर पाते हैं।

प्र.3यदि तात्कालिक उद्देश्य श, ष, स के संस्कृत उच्चारण को सुधारना और पद्य-पाठ में स्वर-लय का अभ्यास कराना हो, तो कौन-सी शिक्षण-अधिगम सामग्री सबसे उपयुक्त होगी?

A किसी परिचित त्योहार पर अनुच्छेद-लेखन अभ्यास-पत्र।
B शिक्षक-निर्देशित पुनरावृत्ति और ध्वनि-भेद अभ्यास के साथ उच्च-गुणवत्ता वाली ध्वनि-रिकॉर्डिंग।
C कठिन समासों और उनके हिंदी अर्थों की सूची।
D लिंग के अनुसार सजाई गई विभक्ति-प्रत्ययों की मुद्रित सारणी।
व्याख्या

उच्चारण और पद्य-पाठ के लिए सामग्री में भरोसेमंद श्रव्य आदर्श और अपने उच्चारण की तुलना, पुनरावृत्ति तथा सुधार का अवसर होना चाहिए। शिक्षक की प्रतिक्रिया से समर्थित ध्वनि-रिकॉर्डिंग श, ष, स के भेद को सीधे साधती है और पद्य में विराम, बल तथा स्वर-लय को भीतर बैठाने में मदद करती है।

प्र.4संस्कृत पद्यपाठयोजना बनाते समय प्रस्तुतीकरण चरण के लिए सबसे स्पष्ट और मापनीय उद्देश्य कौन-सा होगा?

A शिक्षक के आदर्श पाठ के बाद विद्यार्थी चुने हुए श्लोक का शुद्ध उच्चारण, यति और लय के साथ पाठ करेंगे
B विद्यार्थी संस्कृत कविता को पसंद करेंगे और परिष्कृत साहित्यिक रुचि विकसित करेंगे
C विद्यार्थी कवि का जीवन-वृत्त लिखेंगे और कवि से जुड़ी सभी तिथियां याद करेंगे
D विद्यार्थी ध्वनि-रचना पर ध्यान दिए बिना श्लोक का शब्दशः अनुवाद करेंगे
व्याख्या

पद्यपाठ में उद्देश्य ऐसा होना चाहिए जिसे कक्षा में सीधे देखा जा सके। आदर्श पाठ के बाद शुद्ध उच्चारण, यति और लय के साथ श्लोक-पाठ मापनीय भी है और पद्य-रूप से जुड़ा भी है। अस्पष्ट पसंद, जीवन-वृत्त की नकल या केवल अनुवाद पाठ में आ सकते हैं, पर प्रस्तुतीकरण चरण का सर्वोत्तम उद्देश्य नहीं हैं।

प्र.5संस्कृत गद्यपाठ की पाठयोजना में शिक्षक पहले संक्षिप्त प्रसंग-परिचय देता है, फिर शुद्ध उच्चारण के साथ गद्यांश पढ़ता है और कठिन शब्दों पर ठहरता है। इसके तुरंत बाद कौन-सा चरण गद्य-शिक्षण के उचित क्रम से सबसे अधिक मेल खाता है?

A गद्यांश से असंबद्ध व्याकरण-नियम लिखवाना
B निर्देशित मौन वाचन कराकर चुने हुए वाक्यों पर अर्थ-बोध संबंधी प्रश्न पूछना
C अर्थ-बोध से पहले प्रत्येक वाक्य का छन्द-विवेचन लिखवाना
D अर्थ समझाने से पहले पूरे गद्यांश को कंठस्थ करवाना
व्याख्या

गद्यपाठ की पाठयोजना पाठ-केंद्रित होती है। प्रेरणा और आदर्श वाचन के बाद विद्यार्थियों से मौन वाचन, शब्दार्थ-सहायता और अर्थ-बोध संबंधी प्रश्नों के माध्यम से गद्यांश पर काम कराया जाता है। इस क्रम से अभ्यास या विस्तृत भाषा-विश्लेषण से पहले समझ की जाँच हो जाती है।

आपने 144 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं

संस्कृत शिक्षण — विधियाँ, सामग्री, कक्षा-अभ्यास पर अनलिमिटेड अभ्यास RAS टेस्ट सीरीज़ + प्रैक्टिस पैक या गेट पास में मिलता है।

और प्रश्न

6संस्कृत में वदन-कौशल विकसित करने के लिए कौन-सी कक्षा-गतिविधि अर्थपूर्ण मौखिक संप्रेषण का सबसे प्रत्यक्ष अभ्यास कराती है?

Aमुद्रित अनुच्छेद में संधि के उदाहरण रेखांकित करना
Bपाठ्यपुस्तक से गद्यांश की प्रतिलिपि करना
Cविभक्ति-रूपों की सूची मौन रहकर लिखना
Dपरिचित कक्षा-स्थिति पर आधारित भूमिका-अभिनय

7संस्कृत व्याकरण के पाठ में शिक्षक राम, फल और मुनि में तृतीया एकवचन रूप बनवाते समय पहले कई चुने हुए वाक्य देता है, विद्यार्थियों से बार-बार आने वाले प्रत्यय पर ध्यान दिलाता है और अंत में उन्हीं के साथ नियम गढ़ता है। इस प्रक्रिया पर सबसे सही शैक्षिक निर्णय क्या होगा?

Aयह निगमनात्मक प्रक्रिया है, क्योंकि अंततः सभी व्याकरण-नियम शिक्षक ही बताता है।
Bयह संदर्भ-सहित आगमनात्मक व्याकरण-प्रक्रिया है, क्योंकि औपचारिक नामकरण से पहले उदाहरणों से नियम सामान्यीकृत कराया गया है।
Cयह केवल उच्चारण-अभ्यास है, क्योंकि विभक्ति-प्रत्यय बोलकर पढ़े जा रहे हैं।
Dयह शुद्ध व्याकरण-अनुवाद विधि है, क्योंकि पाठ में वाक्य दिए गए हैं।

8एक कक्षा में मौखिक संस्कृत कमजोर है, पठन क्षमता ठीक है और व्याकरण को लेकर डर अधिक है। शिक्षक चित्र-संकेत, छोटे संस्कृत आदेश, जोड़ी-संवाद, चुना हुआ व्याकरण-अवलोकन और कठिन मुहावरों के लिए संक्षिप्त अनुवाद, इन सबको साथ लेता है। इस चुनाव को कौन-सा नाम सबसे ठीक व्यक्त करता है?

Aसमन्वित विधि, क्योंकि शिक्षक विद्यार्थी की जरूरत और पाठ्य-उद्देश्य के अनुसार अलग-अलग पद्धतियों की तकनीकें चुनता है।
Bकेवल परंपरागत विधि, क्योंकि पाठ में कहीं व्याकरण आ गया है।
Cशुद्ध प्रत्यक्ष विधि, क्योंकि शिक्षक चित्र और मौखिक आदेशों का प्रयोग करता है।
Dकेवल श्रव्य-भाषिक विधि, क्योंकि विद्यार्थी छोटे संस्कृत आदेश दोहराते हैं।

9पद्यशिक्षणम् में विद्यार्थी श्लोक का शाब्दिक अर्थ बता देते हैं, पर छन्दस्, बिंब और व्यंजित भाव के परस्पर संबंध को नहीं पकड़ पाते। वरिष्ठ माध्यमिक संस्कृत कक्षा के लिए कौन-सी पाठ-योजना सबसे अधिक ग्राह्य है?

Aपहले विद्यार्थियों से कवि-जीवन कंठस्थ कराएँ, क्योंकि जीवनी अपने-आप श्लोक के काव्य-प्रभाव को समझा देती है।
Bछन्दोबद्ध पाठ, मुख्य बिंबों की पहचान, रस या भाव पर चर्चा और अंत में व्याख्या को व्यक्त करने वाला पुनःपाठ साथ-साथ कराएँ।
Cपाठ और छन्दस् को छोड़ दें, क्योंकि वे परीक्षा-केंद्रित शब्दार्थ से ध्यान हटाते हैं।
Dश्लोक को केवल गद्य-क्रम में बदलें और पट्ट पर गद्यार्थ लिखते ही पाठ समाप्त कर दें।

10एक शिक्षक संस्कृत पद्यपाठ में सस्वर पाठ, बिंबों की व्याख्या, अलंकार की पहचान और रसग्राही प्रश्न शामिल करता है। वह कौन-सा सिद्धांत अपना रहा है?

Aपद्य को केवल व्याकरणिक रूपों के स्रोत के रूप में पढ़ाया जाना चाहिए।
Bपद्य का बिना किसी मौखिक कार्य के केवल शब्दशः अनुवाद कराया जाना चाहिए।
Cपद्य-शिक्षण में सस्वर पाठ, अर्थ, काव्य-उपकरण और सौंदर्य-बोध को साथ जोड़ा जाना चाहिए।
Dपद्यपाठ में प्रश्नों से बचना चाहिए, क्योंकि कविताएं केवल कण्ठस्थ करने के लिए होती हैं।

11एक संस्कृत शिक्षक उपमा अलङ्कार का अर्थ पढ़ाना चाहता है। दृष्टान्त और प्रश्नोत्तरम् को साथ लेने वाली सबसे अच्छी पद्धति कौन-सी है?

Aछात्रों से कॉपियाँ बंद करवाकर गृहकार्य की प्रतीक्षा करने को कहना।
Bकिसी उदाहरण का उल्लेख किए बिना संस्कृत काव्यशास्त्र का इतिहास समझाना।
Cपरिभाषा दो बार बताकर छात्रों से उसे चुपचाप कंठस्थ करने को कहना।
Dसरल तुलना वाला उदाहरण देना और छात्रों से पूछना कि किन दो वस्तुओं की तुलना हो रही है।

12एक शिक्षक संस्कृत गद्यांश का उपयोग मुख्यतः पठन-बोध विकसित करने के लिए कर रहा है। इस उद्देश्य से सबसे कम मेल खाने वाला प्रश्न कौन-सा है?

Aगद्यांश की दो अभिव्यक्तियों के आधार पर वक्ता का भाव पहचानिए।
Bगद्यांश में प्रयोग हो या न हो, किसी संज्ञा के तीन वचनों और सात विभक्तियों के सभी रूप लिखिए।
Cगद्यांश में कौन-सा वाक्य कारण और परिणाम दिखाता है?
Dलेखक ने राजा को करुणामय क्यों कहा है?

13पाठ-प्रस्तावना कौशल में संस्कृत व्याकरण का नया पाठ शुरू करने से पहले विद्यार्थियों में तैयारी पैदा करने वाला सबसे सीधा शिक्षक-कर्म कौन-सा है?

Aसंक्षिप्त और संबंधित प्रश्न के द्वारा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान को नए विषय से जोड़ना
Bबिना चर्चा के नए व्याकरण-नियम की पूरी परिभाषा लिखवा देना
Cविद्यार्थियों से दस मिनट तक पाठ्यपुस्तक का अनुच्छेद चुपचाप नकल करवाना
Dकालांश के आरम्भ में गृहकार्य के सभी उत्तर श्यामपट्ट पर लिख देना

14एक शिक्षक अपठित संस्कृत गद्यांश के लिए गद्यपाठयोजना बना रहा है। माध्यमिक स्तर पर गद्यांश-शिक्षण के लिए कौन-सा क्रम सबसे उपयुक्त है?

Aपूर्वज्ञान से जुड़ी भूमिका, आदर्श वाचन, शब्दार्थ-सहायता, वाक्यवार व्याख्या, बोध-प्रश्न और अनुप्रयोग।
Bलेखक पर शिक्षक का व्याख्यान, कठिन शब्दों की नकल, और अगले कालांश तक शिक्षार्थियों से कोई उत्तर नहीं।
Cपहले व्याकरण-नियम, फिर सन्धि-सारणी, फिर रूपाभ्यास, और सबसे अंत में गद्यांश का शीघ्र पठन।
Dशिक्षार्थियों से मौन पठन, तुरंत लिखित अनुवाद, हर वाक्य का कण्ठस्थीकरण और केवल गृहकार्य।

15शिक्षक संस्कृत लेखन का मूल्यांकन केवल अंक देने के लिए नहीं, बल्कि सीखने में सुधार के लिए करना चाहता है। कौन-सा मूल्यांकन-अभ्यास सबसे उपयुक्त है?

Aकॉपी जमा करने पर सभी विद्यार्थियों को समान अंक देना
Bविषय-वस्तु, संगठन, शब्द-प्रयोग और व्याकरणिक शुद्धता के मानदंडों का उपयोग, साथ में संशोधन की गुंजाइश
Cजब तक हर संधि-रूप त्रुटिरहित न हो, सभी प्रारूप अस्वीकार कर देना
Dकेवल साफ लिखावट और पृष्ठ-संख्या के आधार पर अंक देना

संस्कृत — भाग III (शिक्षण विधियाँ) में और विषय

अन्य विषय देखें