MCQ
संस्कृत भाषा, साहित्य और शिक्षण-विधियाँ MCQ - उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न
RAS/RPSC तैयारी के लिए संस्कृत भाषा, साहित्य और शिक्षण-विधियाँ के 141 प्रश्न हल करें।
अभ्यास प्रश्न
प्र.1कादम्बर्याः कथानुसारं शुकः पूर्वजन्मनि आसीत्
सही उत्तर A है क्योंकि कादम्बरी की कथा में शुक का पूर्वजन्म वैशम्पायन से सम्बद्ध है। चन्द्रापीड, कपिञ्जल और शूद्रक कथा के अन्य पात्र हैं; वे इस प्रश्न में पूछे गए शुक के पूर्वजन्मरूप नहीं हैं।
प्र.2समीचीनां तालिकां चिनुत: (क) कृष्णश्रितः (i) द्विगुसमासः (ख) त्रिभुवनम् (ii) अव्ययीभावसमासः (ग) चतुर्मुखः (iii) तत्पुरुषसमासः (घ) निर्मक्षिकम् (iv) बहुव्रीहिसमासः (क) (ख) (ग) (घ)
सही उत्तर B है क्योंकि कृष्णश्रितः में कृष्णं श्रितः अर्थ से तत्पुरुषसमास है। त्रिभुवनम् संख्यापूर्वक समूहबोधक होने से द्विगु है, चतुर्मुखः बाह्य अर्थ देने से बहुव्रीहि है और निर्मक्षिकम् अव्ययीभाव रूप में लिया जाता है। यही क्रम iii, i, iv, ii बनाता है।
प्र.3“उरुक्रमः – उरुगायः – विक्रमः – उरुक्रमः” इत्यादिभिः विशेषणैः कः देवः स्तुतः ?
सही उत्तर B है क्योंकि उरुक्रम, उरुगाय और विक्रम जैसे विशेषण विष्णु के विस्तृत पादक्रम और स्तुति से जुड़े हैं। अग्नि, वरुण और रुद्र के लिए ये विशिष्ट नाम सामान्यतः नहीं दिए जाते।
प्र.4“वधूः + एषा” = इत्यत्र सन्धिपदम् अस्ति -
सही उत्तर B है क्योंकि “वधूः” के विसर्ग के बाद स्वर “ए” आने पर विसर्ग का रादेश होता है। इसलिए “वधूः + एषा” से “वधूरेषा” रूप बनता है। यहाँ “वध्वेषा” बनने का नियम लागू नहीं होता।
प्र.5इन्द्रसूक्तस्य द्रष्टा ऋषिरस्ति –
सही उत्तर A है क्योंकि इन्द्रसूक्त का द्रष्टा ऋषि परम्परा में गृत्समद् माना जाता है। कक्षीवान्, कण्व और मधुच्छन्दा वैदिक नाम हैं, पर इस सूक्त के लिए अपेक्षित ऋषि नहीं हैं।
आपने 141 में से 5 नमूना प्रश्न देख लिए हैं
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और प्रश्न
6“मार्गे पदानि खलु विषमी भवन्ति” इत्यत्र ‘खलु’ इत्यस्य किमर्थम् ?
7विष्णोः किं विशेषणं न प्रयुक्तम् ?
8अध्यापने सर्वोत्तमं सुलभं दृश्यसाधनं विद्यते -
9संस्कृतभाषाशिक्षणस्य उत्तमविधिरस्ति -
10“अधरः किसलयरागः कोमलविटपानुकारिणौ बाहू।” अत्र छन्दः किम्?
11“व” कारस्योच्चारणस्थानमस्ति -
12‘ण्वुल्’ प्रत्ययान्तः प्रयोगो नास्ति —
13‘उक्त्वा’ पदेऽस्मिन् प्रकृतिप्रत्ययो स्तः
14‘घ्नन्ति’ इति तिङन्तरूपे मूलधातुरस्ति –
15विष्णुशर्मणः पञ्चतन्त्रे अस्योल्लेखः नास्ति –
