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RAS प्रश्न

अरावली क्षेत्र में कौन सी मृदा संरक्षण तकनीक आम है?

सही उत्तर: (C) समोच्च बंध और सीढ़ीदार खेती।

अरावली के पहाड़ी क्षेत्र में मृदा अपरदन रोकने के लिए समोच्च बंधन और सीढ़ीदार खेती सामान्य मृदा संरक्षण तकनीकें हैं।

  1. (A)

    नहरों की लाइनिंग

  2. (B)

    केवल मल्चिंग

  3. (C)

    समोच्च बंध और सीढ़ीदार खेती

  4. (D)

    बालू के टीलों का स्थिरीकरण

व्याख्या

सही तकनीक समोच्च बंधन और सीढ़ीदार खेती है, क्योंकि अरावली जैसा पहाड़ी क्षेत्र ढाल, बहते पानी और मिट्टी के कटाव से जुड़ा है। ऐसे क्षेत्रों में समोच्च बंधन, सीढ़ीदार खेती और छोटे रोक बांध मिट्टी अपरदन रोकने की सामान्य तकनीकें हैं। राजस्थान के जलागम विकास और मृदा संरक्षण विभाग की परियोजना रिपोर्ट में जलागम प्रबंधन के तहत बंधों, सीढ़ीदार खेतों, जलमार्गों, ढाल स्थिरीकरण और गली नियंत्रण संरचनाओं को मृदा-जल संरक्षण की प्रमुख यांत्रिक विधियां बताया गया है। उसी रिपोर्ट में बंधों का उद्देश्य ढाल की लंबाई और बहते पानी की गति घटाकर कटाव कम करना है, जबकि सीढ़ीदार खेती ढालदार क्षेत्रों को खेती योग्य पट्टियों में बदलती है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) नहर की लाइनिंग मुख्यतः सिंचाई व्यवस्था में पानी के रिसाव और नहर दक्षता से जुड़ी है, जबकि प्रश्न पहाड़ी अरावली क्षेत्र में मिट्टी अपरदन रोकने की तकनीक पूछता है।
  • (B) केवल भूमि आच्छादन को यहां प्राथमिक उत्तर नहीं माना जा सकता, क्योंकि ढाल वाले क्षेत्रों के लिए बंधन, सीढ़ीदार खेती और संरचनात्मक संरक्षण पर जोर है।
  • (D) बालू टीला स्थिरीकरण मरुस्थलीय बालू टीलों के लिए उपयुक्त उपाय है, जबकि अरावली क्षेत्र में मुख्य समस्या ढाल पर बहते पानी से मिट्टी का कटाव है।

अवधारणा

यह प्रश्न राजस्थान भूगोल में मृदा संरक्षण और जलागम प्रबंधन की अवधारणा जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि अरावली, मरुस्थल और सिंचित क्षेत्रों में संरक्षण उपाय अलग-अलग होते हैं।

स्रोत

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