RAS प्रश्न
राजस्थान में चंबल नदी के किनारे खड्ड भूमि के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. चंबल खड्ड लगभग 3.5 लाख हेक्टेयर में फैले हैं और भारत के सबसे बड़े खड्ड-भूमि क्षेत्रों में से एक हैं। 2. खड्ड पुनरुद्धार में नाली अवरोधन, घास और वृक्षों से वनस्पति आवरण तथा सोपान-निर्माण जैसी विधियाँ शामिल हैं। 3. एनबीएसएसएलयूपी ने चंबल खड्डों के लिए बेसिन-स्तरीय एकीकृत जलागम प्रबंधन की सिफारिश की है। 4. खड्ड निर्माण का प्राथमिक कारण वायु अपरदन है, जल अपरदन नहीं।
सही उत्तर: (C) केवल 1, 2 और 3।
राजस्थान में चंबल नदी के किनारे खड्ड भूमि के बारे में कथन 1, 2 और 3 सही हैं, क्योंकि ये खड्ड बड़े जल-अपरदनजनित क्षेत्र हैं और इनके पुनरुद्धार में नाली अवरोधन, वनस्पति आवरण, सोपान-निर्माण तथा जलागम प्रबंधन जुड़े हैं।
व्याख्या
राजस्थान में चंबल खड्ड मुख्यतः कोटा, सवाई माधोपुर, धौलपुर और करौली क्षेत्र से जुड़े हैं और लगभग 2-3.5 लाख हेक्टेयर में फैले बड़े खड्ड-भूमि क्षेत्र हैं, इसलिए कथन 1 सही है। इनके पुनरुद्धार में पत्थर या मिट्टी से नालियाँ रोकना, खस घास और पेड़ों से वनस्पति आवरण बढ़ाना तथा सोपान बनाना शामिल है, इसलिए कथन 2 सही है। एनबीएसएसएलयूपी की बेसिन-स्तरीय एकीकृत जलागम प्रबंधन वाली सिफारिश कथन 3 को सही बनाती है। ICAR खड्ड निर्माण को बहते पानी की काटने वाली क्रिया और जल अपरदन से जोड़ता है; इसलिए वायु अपरदन वाला कथन 4 गलत है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A में कथन 4 शामिल है, जबकि चंबल खड्डों का निर्माण जल या नदीय अपरदन से माना गया है, वायु अपरदन से नहीं।
- (B) B कथन 1 को छोड़ देता है, जबकि चंबल खड्ड लगभग 2-3.5 लाख हेक्टेयर में फैले भारत के प्रमुख खड्ड-भूमि क्षेत्रों में आते हैं।
- (D) D सभी 4 कथनों को सही मानता है, लेकिन कथन 4 गलत है क्योंकि खड्ड बहते पानी और नाली अपरदन से बनते हैं, वायु अपरदन से नहीं।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के भू-आकृतिक प्रदेश, मृदा अपरदन और जलागम प्रबंधन की समझ जांचता है। RAS में चंबल खड्ड इसलिए बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि वे भौतिक भूगोल, भूमि क्षरण और संरक्षण उपायों को एक साथ जोड़ते हैं।
