RAS प्रश्न
राजस्थान में पारंपरिक चरागाह भूमि प्रणालियों — 'ओरण' और 'गौचर' — के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
सही उत्तर: (C) गौचर के विपरीत, ओरण भूमि वन विभाग के अंतर्गत कानूनी रूप से पंजीकृत होती है और भारतीय वन अधिनियम के तहत संरक्षित वन श्रेणी में आती है।।
ओरण को भारतीय वन अधिनियम की संरक्षित वन श्रेणी मानना गलत है; राजस्थान वन विभाग की 01.02.2024 की अधिसूचनाओं में कई ओरण और पारिस्थितिक क्षेत्रों को मानित वन के रूप में लिया गया है।
व्याख्या
कथन C गलत है क्योंकि यह ओरण को सीधे भारतीय वन अधिनियम की संरक्षित वन श्रेणी में रख देता है, जबकि दिए गए तथ्य के अनुसार ओरण पवित्र उपवन हैं और उनका कानूनी भेद संरक्षित वन बनाम गैर-वन के रूप में नहीं समझना चाहिए। राजस्थान वन विभाग की आधिकारिक नागरिक सेवा पृष्ठ पर 01.02.2024 की अधिसूचनाएं “ओरण और पारिस्थितिक क्षेत्रों को मानित वन घोषित करने” से जुड़ी हैं। इसलिए सही समझ यह है कि कई ओरण और पारिस्थितिक क्षेत्र औपचारिक वन-कानूनी व्यवहार में मानित वन के रूप में आए हैं, पर इससे वे अपने-आप संरक्षित वन श्रेणी नहीं बन जाते। यही सूक्ष्म कानूनी अंतर इस प्रश्न का केंद्र है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) A उत्तर नहीं है, क्योंकि ओरण को स्थानीय देवता से जुड़ा पवित्र सामुदायिक वन मानना और वहां पेड़ काटने तथा जुताई पर परंपरागत रोक बताना दिए गए तथ्य के अनुसार सही है।
- (B) B उत्तर नहीं है, क्योंकि गौचर को गांव की विधिवत दर्ज साझा चरागाह भूमि और पशुधन उपयोग के लिए ग्राम पंचायत के प्रबंधन में मानना दिए गए तथ्य के अनुसार सही है।
- (D) D उत्तर नहीं है, क्योंकि ओरण और गौचर दोनों पर जनसंख्या दबाव, कृषि में परिवर्तन और कमजोर कानूनी संरक्षण के कारण अतिक्रमण तथा क्षरण का दबाव बताना दिए गए तथ्य के अनुसार सही है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के पारंपरिक साझा संसाधनों, पवित्र उपवनों और वन-कानून की श्रेणियों के बीच फर्क जांचता है। RAS में यह विषय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि भूमि उपयोग, समुदाय-आधारित संरक्षण और प्रशासनिक अधिसूचनाएं राजस्थान भूगोल से सीधे जुड़ती हैं।
