RAS प्रश्न
विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया गया:
सही उत्तर: (B) 1856।
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 में पारित हुआ, जिसने हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को कानूनी वैधता दी।
व्याख्या
हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 आधुनिक भारत के सामाजिक सुधारों से जुड़ा कानून था। यह लॉर्ड डलहौजी/कैनिंग के दौर में ईश्वर चंद्र विद्यासागर के प्रयासों से पारित हुआ। अधिनियम ने यह व्यवस्था दी कि हिंदुओं के बीच ऐसा विवाह केवल इसलिए अमान्य नहीं माना जाएगा कि स्त्री पहले विवाहित थी और उसके पति की मृत्यु हो चुकी थी। इसी तरह ऐसे विवाह से जन्मी संतान को भी इसी आधार पर अवैध नहीं माना जाएगा। इसलिए सही वर्ष 1856 है: बात केवल सुधार-आंदोलन की नहीं, बल्कि विधवा पुनर्विवाह को विधि द्वारा मान्यता देने की है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) 1872 सही वर्ष नहीं है, क्योंकि विधवा पुनर्विवाह से जुड़ा कानून 1856 का अधिनियम है।
- (C) 1829 सती प्रथा के उन्मूलन से जुड़ा वर्ष है, जबकि संबंधित कानून हिंदू विधवाओं के पुनर्विवाह को वैध बनाने वाला 1856 का अधिनियम है।
- (D) 1891 आयु-सहमति अधिनियम से जुड़ा वर्ष है; विधवा पुनर्विवाह को कानूनी मान्यता 1856 के अधिनियम से मिली।
अवधारणा
आधुनिक भारत के सामाजिक-धार्मिक सुधार और औपनिवेशिक कालीन सामाजिक कानूनों की समयरेखा में यह अधिनियम महत्वपूर्ण है। RAS तैयारी में वर्ष, सुधारक और कानून को जोड़कर तथ्यात्मक समझ मजबूत रखनी पड़ती है।
