आपका सेशन खत्म हो गया है

आपकी प्रगति और खरीदारी सुरक्षित हैं। जारी रखने के लिए दोबारा लॉगिन करें।

दोबारा लॉगिन करें
Aspirant Academy

RAS प्रश्न

मंदिर प्रवेश उद्घोषणा (1936) किस रियासत के शासक ने जारी की थी?

सही उत्तर: (B) त्रावणकोर।

मंदिर प्रवेश उद्घोषणा 1936 त्रावणकोर के महाराजा श्री चिथिरा थिरुनाल बालराम वर्मा ने जारी की थी।

  1. (A)

    बड़ौदा

  2. (B)

    त्रावणकोर

  3. (C)

    मैसूर

  4. (D)

    कोचीन

व्याख्या

मंदिर प्रवेश उद्घोषणा का सही संबंध त्रावणकोर से है। त्रावणकोर के महाराजा श्री चिथिरा थिरुनाल ने 12 नवंबर 1936 को यह उद्घोषणा जारी की, जिससे सभी हिंदुओं को जाति की परवाह किए बिना मंदिरों में प्रवेश की अनुमति मिली। केरल राजभवन के भाषण में भी श्री चिथिरा थिरुनाल बालराम वर्मा को त्रावणकोर का अंतिम महाराजा बताया गया है और उनकी 1936 की मंदिर प्रवेश उद्घोषणा को अस्पृश्यता और सामाजिक दूरी मिटाने की दिशा में क्रांतिकारी, साहसिक सुधार कहा गया है। इसी कारण यह केवल धार्मिक प्रवेश का आदेश नहीं था; यह पूजा की स्वतंत्रता और सामाजिक समानता से जुड़ा सुधार था। गांधी ने इसे आधुनिक समय का चमत्कार कहा, और इससे पहले वाइकोम सत्याग्रह 1924-25 में यह मुद्दा उभर चुका था।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) बड़ौदा गलत है, क्योंकि प्रश्न में पूछी गई 1936 की मंदिर प्रवेश उद्घोषणा त्रावणकोर के महाराजा श्री चिथिरा थिरुनाल से जुड़ी है, बड़ौदा के शासक से नहीं।
  • (C) मैसूर गलत है, क्योंकि केरल राजभवन का विवरण इस उद्घोषणा को त्रावणकोर और उसके महाराजा श्री चिथिरा थिरुनाल से जोड़ता है।
  • (D) कोचीन गलत है, क्योंकि स्रोत में 1936 की मंदिर प्रवेश उद्घोषणा श्री चिथिरा थिरुनाल बालराम वर्मा के त्रावणकोर-शासन का सुधार बताई गई है, कोचीन का नहीं।

अवधारणा

यह प्रश्न आधुनिक भारत के सामाजिक-सुधार आंदोलनों और रियासतों में जाति-आधारित मंदिर-प्रवेश सुधार की समझ जांचता है। RAS में ऐसे प्रश्न इसलिए बार-बार आते हैं क्योंकि वे राष्ट्रवादी दौर के सामाजिक परिवर्तन को प्रशासनिक निर्णयों और जन-आंदोलनों से जोड़ते हैं।

स्रोत

संबंधित प्रश्न