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RAS प्रश्न

तेलंगाना किसान आंदोलन (1946-51) किसके विरुद्ध था?

सही उत्तर: (A) निज़ाम शासन और ज़मींदारों (देशमुखों) के सामंती शोषण के विरुद्ध।

तेलंगाना किसान आंदोलन (1946-51) हैदराबाद के निज़ाम शासन और देशमुख-जागीरदारों के सामंती शोषण के विरुद्ध कम्युनिस्ट नेतृत्व में चला किसान संघर्ष था।

  1. (A)

    निज़ाम शासन और ज़मींदारों (देशमुखों) के सामंती शोषण के विरुद्ध

  2. (B)

    गोवा में पुर्तगाली

  3. (C)

    मैसूर की देशी रियासत

  4. (D)

    ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन

व्याख्या

तेलंगाना आंदोलन का केंद्र हैदराबाद राज्य के गांव थे, जहां देशमुखों और जागीरदारों के दबाव में किसानों से अवैध सामंती वसूली, अधिक लगान, बेदखली और वेत्ती यानी बेगार कराई जाती थी। 1946 में कम्युनिस्टों ने आंध्र महासभा और किसान सभाओं के भीतर नेतृत्व लेकर वेत्ती के विरुद्ध कार्यक्रम और “जोतने वालों को भूमि” की मांग उठाई। संगमों ने गांव-गांव संगठन बनाए; जहां उनका प्रभाव स्थापित हुआ, वहां वेत्ती समाप्त की गई, बेदखली रोकी गई, लगान घटाया गया और जमींदारों की अतिरिक्त भूमि भूमिहीनों में बांटी गई। इसी कारण सही उत्तर निज़ाम शासन और देशमुखों-जागीरदारों के सामंती शोषण के विरुद्ध है।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) गोवा में पुर्तगालियों के विरुद्ध संघर्ष अलग औपनिवेशिक संदर्भ था, जबकि यह आंदोलन हैदराबाद राज्य के निज़ाम, देशमुखों और जागीरदारों की ग्रामीण सामंती व्यवस्था के विरुद्ध था।
  • (C) मैसूर की देशी रियासत इस आंदोलन का क्षेत्र या लक्ष्य नहीं थी; तेलंगाना के नलगोंडा, करीमनगर और वारंगल जैसे हैदराबाद राज्य के इलाकों में संगम फैले थे।
  • (D) ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन इस प्रश्न का सीधा लक्ष्य नहीं था, क्योंकि आंदोलन का मुख्य संघर्ष निज़ाम शासन, डोरों और सामंती वसूली-बेगार के विरुद्ध था।

अवधारणा

यह प्रश्न आधुनिक भारत में किसान आंदोलनों और रियासती राज्यों की राजनीति का परीक्षण करता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इससे किसान शोषण, सामंतवाद, कम्युनिस्ट नेतृत्व और हैदराबाद के भारत में विलय को एक साथ समझना पड़ता है।

स्रोत

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