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Aspirant Academy

RAS प्रश्न

'अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' वाक्यांश किसने प्रयोग किया?

सही उत्तर: (D) दादाभाई नौरोजी।

दादाभाई नौरोजी ने 1901 की अपनी पुस्तक 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' में 'अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' वाक्यांश का प्रयोग किया।

  1. (A)

    बाल गंगाधर तिलक

  2. (B)

    गोपाल कृष्ण गोखले

  3. (C)

    सुरेंद्रनाथ बनर्जी

  4. (D)

    दादाभाई नौरोजी

व्याख्या

दादाभाई नौरोजी का नाम इस वाक्यांश से सीधे जुड़ा है, क्योंकि उनकी 1901 की पुस्तक का शीर्षक ही 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' था। इस शीर्षक के पीछे उनका तर्क था कि ब्रिटिश शासन न्याय और निष्पक्षता के उन्हीं सिद्धांतों का उल्लंघन कर रहा था, जिन्हें ब्रिटेन अपना आदर्श बताता था। NCERT में नौरोजी की इसी पुस्तक के उल्लेख के साथ ब्रिटिश शासन के आर्थिक प्रभाव की तीखी आलोचना सामने आती है। इसलिए यह वाक्यांश किसी सामान्य राष्ट्रवादी नारे से नहीं, बल्कि नौरोजी की औपनिवेशिक शासन-विरोधी आर्थिक आलोचना से संबंधित है।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) बाल गंगाधर तिलक राष्ट्रवादी राजनीति के प्रमुख नेता थे, लेकिन 'अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' वाक्यांश उनके नाम से नहीं जुड़ता।
  • (B) गोपाल कृष्ण गोखले का नाम इस विशिष्ट वाक्यांश या 'पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' पुस्तक से समर्थित नहीं है।
  • (C) सुरेंद्रनाथ बनर्जी प्रारंभिक राष्ट्रीय आंदोलन से जुड़े थे, पर यह वाक्यांश दादाभाई नौरोजी की पुस्तक से जुड़ा है, बनर्जी से नहीं।

अवधारणा

आधुनिक भारतीय इतिहास में प्रारंभिक राष्ट्रवादी आर्थिक आलोचना और दादाभाई नौरोजी की भूमिका एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। RAS में व्यक्ति, पुस्तक और औपनिवेशिक शासन की आलोचना को एक साथ परखने वाले तथ्य बार-बार उपयोगी होते हैं।

स्रोत

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