RAS प्रश्न
पाबना कृषि विद्रोह (1873) किसके विरुद्ध था?
सही उत्तर: (A) ज़मींदार जिन्होंने अवैध रूप से लगान बढ़ाया।
पाबना कृषि विद्रोह (1873) बंगाल में उन ज़मींदारों के खिलाफ था जो कानूनी सीमा से अधिक लगान बढ़ाकर और अवैध तरीकों से रैयतों को बेदखल कर रहे थे।
व्याख्या
पाबना कृषि विद्रोह 1870 के दशक के बंगाल, खासकर पूर्वी बंगाल, की किसान अशांति का हिस्सा था। स्थायी बंदोबस्त के तहत ज़मींदारों ने 1859 के कानून से मिले काश्तकारी अधिकारों को कमजोर करने के लिए कई तरीके अपनाए: कानूनी सीमा से अधिक लगान, अबवाब जैसे उपकर, नाप-जोख में गड़बड़ी, महंगे मुकदमे और जबरन बेदखली। मई 1873 में पाबना में किसानों ने ज़मींदारों की अनुचित मांगों का विरोध करने के लिए कृषि संघ बनाया, कानूनी लड़ाई के लिए धन जुटाया और लगान न देने का अभियान चलाया। इसी पृष्ठभूमि में बंगाल काश्तकारी अधिनियम 1885 आया, हालांकि उसने किसानों को पूरी सुरक्षा नहीं दी।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) नील बागान मालिकों के खिलाफ आंदोलन अलग और पहले का प्रसंग था; पाबना में विरोध का निशाना ज़मींदारों की अनुचित लगान-वसूली और बेदखली थी।
- (C) ब्रिटिश राजस्व अधिकारी यहां प्रत्यक्ष लक्ष्य नहीं थे; पाबना आंदोलन ज़मींदारों की मांगों और तरीकों के खिलाफ किसान प्रतिरोध था।
- (D) साहूकारों का मुद्दा यहां केंद्र में नहीं था; पाबना में किसानों ने लगान बढ़ाने और रैयत अधिकारों को कमजोर करने वाले ज़मींदारों का विरोध किया।
अवधारणा
आधुनिक भारत के किसान आंदोलनों और स्थायी बंदोबस्त के सामाजिक-आर्थिक असर में पाबना कृषि विद्रोह महत्वपूर्ण है। RAS में ऐसे आंदोलन बार-बार पूछे जाते हैं क्योंकि उनसे औपनिवेशिक भूमि व्यवस्था, किसान प्रतिरोध और बाद के काश्तकारी कानूनों का संबंध साफ दिखता है।
