RAS प्रश्न
नेहरू रिपोर्ट (1928) बाद के भारत सरकार अधिनियम, 1935 से इस मायने में भिन्न थी कि उसने किस बात की मांग की थी?
सही उत्तर: (A) संयुक्त निर्वाचक मंडल और मौलिक अधिकारों के साथ डोमिनियन दर्जा।
नेहरू रिपोर्ट (1928) ने संयुक्त निर्वाचक मंडल और मौलिक अधिकारों के साथ डोमिनियन दर्जे की मांग रखी थी।
व्याख्या
नेहरू रिपोर्ट का मूल फर्क यह था कि उसने भारत को ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका और आयरिश फ्री स्टेट जैसे दर्जे वाला स्वशासी डोमिनियन मानने की बात रखी। रिपोर्ट में संसद और उस संसद के प्रति उत्तरदायी कार्यपालिका की कल्पना थी। इसी ढांचे के भीतर उसने मौलिक अधिकारों का अलग खंड दिया, जिसमें व्यक्ति की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति, सभा, धर्म, कानून के सामने समानता और महिलाओं-पुरुषों के समान नागरिक अधिकार जैसे अधिकार शामिल थे। सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व पर रिपोर्ट ने पूरे भारत में प्रतिनिधि सभा और प्रांतीय विधानमंडलों के लिए संयुक्त मिश्रित निर्वाचक मंडल की बात कही। इसलिए विकल्प A ही सही है: डोमिनियन दर्जा, संयुक्त निर्वाचक मंडल और मौलिक अधिकार, तीनों इसी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) क्राउन कॉलोनी का दर्जा भारत की स्वायत्तता घटाने वाली स्थिति होती, जबकि रिपोर्ट ने संसद और उत्तरदायी कार्यपालिका वाले डोमिनियन दर्जे की मांग रखी।
- (C) रिपोर्ट ने पूर्ण स्वतंत्रता को अपना औपचारिक लक्ष्य नहीं बनाया और पृथक निर्वाचक मंडलों के बजाय पूरे भारत में संयुक्त मिश्रित निर्वाचक मंडल की बात कही।
- (D) ब्रिटेन के साथ सैन्य गठबंधन रिपोर्ट की मांगों में नहीं था; उसका केंद्र संवैधानिक दर्जा, अधिकार और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था था।
अवधारणा
यह प्रश्न आधुनिक भारत के संवैधानिक विकास में नेहरू रिपोर्ट के प्रस्तावों को परखता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि 1920–30 के दशक की संवैधानिक मांगें आगे की राष्ट्रीय राजनीति और अधिनियमों को समझने की कुंजी हैं।
