RAS प्रश्न
मेरठ षड्यंत्र केस (1929-1933) किसका मुकदमा था?
सही उत्तर: (D) साम्यवादी और ट्रेड यूनियन नेता जिन पर राजद्रोह का आरोप था।
मेरठ षड्यंत्र मामले में कम्युनिस्ट और श्रमिक-संघ नेताओं पर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध षड्यंत्र का मुकदमा चला था।
व्याख्या
मेरठ षड्यंत्र मामले का केंद्र कांग्रेस के सविनय अवज्ञा नेताओं या INA अधिकारियों का मुकदमा नहीं था, बल्कि कम्युनिस्टों और श्रमिक-संघ नेतृत्व पर लगा षड्यंत्र का आरोप था। 14 मार्च 1929 को कम्युनिस्टों की गिरफ्तारी हुई और उन पर मेरठ में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध षड्यंत्र का मुकदमा चलाया गया। आरोप यह था कि कम्युनिस्ट इंटरनेशनल के निर्देशन में वे आम हड़तालों और सशस्त्र विद्रोह के जरिए ब्रिटिश शासन को उखाड़ना चाहते थे। अंग्रेज कम्युनिस्ट फिलिप स्प्रैट, बी.एफ. ब्रैडली और पत्रकार लेस्टर हचिन्सन सहित भारतीय कम्युनिस्ट आरोपी बने। मुकदमा 4 साल चला, इसलिए यह औपनिवेशिक भारत में वामपंथी और मजदूर राजनीति पर दमन का प्रमुख उदाहरण माना जाता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) INA अधिकारियों के मुकदमे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में लाल किले में चले थे, इसलिए वे 1929-1933 के मेरठ षड्यंत्र मामले से अलग हैं।
- (B) सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू करने वाले कांग्रेस नेताओं के मामले अलग राजनीतिक संदर्भ से जुड़े थे, जबकि मेरठ मामला कम्युनिस्टों और श्रमिक-संघ नेताओं पर षड्यंत्र के आरोप से जुड़ा था।
- (C) ट्रेन लूटने वाले क्रांतिकारियों का संदर्भ काकोरी मामले से जुड़ता है, जबकि मेरठ मामले में औद्योगिक मजदूर राजनीति और कम्युनिस्ट संगठन मुख्य मुद्दा थे।
अवधारणा
आधुनिक भारत में वामपंथ, श्रमिक आंदोलन और औपनिवेशिक दमन के बीच गहरा संबंध था। RAS में ऐसे मुकदमे बार-बार इसलिए पूछे जाते हैं क्योंकि वे राष्ट्रीय आंदोलन के भीतर कांग्रेस से बाहर सक्रिय धाराओं को समझाते हैं।
