RAS प्रश्न
पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा का मुख्य कारण है:
सही उत्तर: (C) अरावली पर्वतमाला अरब सागर मानसून शाखा के समानांतर स्थित है।
पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा का मुख्य कारण यह है कि अरावली पर्वतमाला अरब सागर की मानसूनी हवाओं की दिशा के लगभग समानांतर फैली है और उन्हें आड़े होकर नहीं रोकती।
व्याख्या
अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाएँ नमी लेकर राजस्थान की ओर बढ़ती हैं। पश्चिमी राजस्थान में अधिक वर्षा तब होती, जब कोई पर्वत-श्रेणी इन हवाओं को आड़े रोककर ऊपर उठने को मजबूर करती। लेकिन अरावली पर्वतमाला इन हवाओं की दिशा के लगभग समानांतर है। राजस्थान राज्य जैव विविधता बोर्ड के “राजस्थान एट अ ग्लांस” पृष्ठ पर भी अरावली को नमी देने वाली दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को न रोक पाने और उत्तर-पश्चिमी भाग के वर्षाछाया में रह जाने का कारण माना गया है। इसलिए हवाएँ पश्चिमी राजस्थान के ऊपर से निकल जाती हैं और वहाँ औसत वर्षा 400 मिलीमीटर से कम रहती है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) समुद्र से निकटता कम वर्षा का कारण नहीं हो सकती, क्योंकि पश्चिमी राजस्थान की शुष्कता अरावली और मानसूनी हवाओं की दिशा से जुड़ी है।
- (B) घना वन आवरण कम वर्षा का मुख्य कारण नहीं है; निर्णायक कारण अरावली का मानसूनी हवाओं के समानांतर होना है।
- (D) क्षेत्र की अधिक ऊँचाई सही कारण नहीं है, क्योंकि कम वर्षा ऊँचाई से नहीं, अरावली द्वारा नमी-भरी हवाओं को आड़े न रोक पाने से जुड़ी है।
अवधारणा
राजस्थान की भौतिक भूगोल में वर्षा-वितरण, मानसूनी पवनों और अरावली पर्वतमाला की दिशा का संबंध महत्वपूर्ण है। आरएएस में यह बार-बार आता है, क्योंकि पश्चिमी राजस्थान की शुष्कता को समझने के लिए यही मूल भौगोलिक कारण निर्णायक है।
