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RAS प्रश्न

हावड़ा-शिबपुर षड्यंत्र केस (1910) किसके विरुद्ध था?

सही उत्तर: (A) बंगाल के क्रांतिकारी समूह (जुगांतर)।

हावड़ा-शिबपुर षड्यंत्र केस (1910) बंगाल के जुगांतर क्रांतिकारी समूहों, जिनमें जतींद्रनाथ मुखर्जी यानी बाघा जतिन शामिल थे, के विरुद्ध था।

  1. (A)

    बंगाल के क्रांतिकारी समूह (जुगांतर)

  2. (B)

    HSRA

  3. (C)

    ग़दर पार्टी

  4. (D)

    INA

व्याख्या

हावड़ा-शिबपुर षड्यंत्र केस (1910) को बंगाल के जुगांतर क्रांतिकारी आंदोलन से जोड़कर समझना चाहिए। पुलिस अधिकारी शम्सुल आलम की हत्या और अन्य आरोपों के बाद जतींद्रनाथ मुखर्जी सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया, और इसी से हावड़ा-शिबपुर षड्यंत्र केस शुरू हुआ। मुकदमे में कैदियों पर राजद्रोह, ब्रिटिश राजसत्ता के विरुद्ध युद्ध छेड़ने और भारतीय सैनिकों की वफादारी प्रभावित करने जैसे आरोप थे। 47 अभियुक्तों पर राजा के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की साजिश का मुकदमा चला। इसलिए सही पहचान बंगाल के जुगांतर क्रांतिकारियों की है, न कि बाद के संगठनों की।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) HSRA इस 1910 के बंगाल-केंद्रित जुगांतर मुकदमे से बाद की क्रांतिकारी धारा का संगठन था, इसलिए इसे हावड़ा-शिबपुर केस का लक्ष्य नहीं माना जा सकता।
  • (C) ग़दर पार्टी अमेरिका में सक्रिय भारतीय प्रवासी क्रांतिकारियों से जुड़ी थी, जबकि हावड़ा-शिबपुर केस बंगाल के जुगांतर क्रांतिकारियों और जतींद्रनाथ मुखर्जी से जुड़ा था।
  • (D) INA द्वितीय विश्वयुद्ध के दौर की संस्था थी, इसलिए 1910 के हावड़ा-शिबपुर षड्यंत्र केस से उसका काल और संदर्भ मेल नहीं खाता।

अवधारणा

आधुनिक भारत के क्रांतिकारी आंदोलन में क्षेत्रीय संगठनों और षड्यंत्र मामलों की पहचान समय, स्थान और संगठन के मिलान से तय होती है। RAS में ऐसे नाम मिलते-जुलते लग सकते हैं, इसलिए हावड़ा-शिबपुर केस को 1910, बंगाल और जुगांतर क्रांतिकारियों से जोड़ना जरूरी है।

स्रोत

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