RAS प्रश्न
'धन की निकासी' सिद्धांत के अनुसार:
सही उत्तर: (C) भारत से ब्रिटेन को बिना पर्याप्त प्रतिफल के धन की निकासी हो रही थी।
धन निकासी सिद्धांत के अनुसार भारत से ब्रिटेन को धन बिना पर्याप्त प्रतिफल के भेजा जा रहा था, जिससे भारत की आय और पूंजी बाहर जा रही थी।
व्याख्या
धन निकासी सिद्धांत का मूल तर्क यह था कि ब्रिटिश शासन में भारत की कमाई का बड़ा हिस्सा भारत में उपयोग होने के बजाय ब्रिटेन चला जाता था। दादाभाई नौरोजी ने इसे कर, वेतन और व्यापारिक हेरफेर के जरिए राष्ट्रीय आय की निकासी बताया। ई-ज्ञानकोश में भी नौरोजी को धन निकासी के प्रमुख प्रतिपादक के रूप में रखा गया है और बताया गया है कि यह केवल धन की हानि नहीं, पूंजी की हानि भी थी। इसमें बिना बराबर प्रतिफल वाले निर्यात-अधिशेष, होम चार्जेज, ब्रिटिश अधिकारियों के बड़े वेतन और पेंशन जैसे रास्तों का उल्लेख है। इसलिए सही बात यह है कि भारत को पर्याप्त वापसी मिले बिना धन ब्रिटेन जा रहा था।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) यह विकल्प उलटा निष्कर्ष देता है, क्योंकि सिद्धांत भारत के अमीर होने की नहीं, ब्रिटिश शासन में धन और पूंजी बाहर जाने से भारत के गरीब होने की बात करता था।
- (B) सिद्धांत ब्रिटिश निवेश को भारत के लिए लाभकारी बताने के बजाय यह दिखाता था कि निकला हुआ धन बाद में ब्रिटिश निवेश के रूप में लौटता था और शोषणकारी ढांचे को ढकता था।
- (D) स्रोत में बहस बिना बराबर प्रतिफल वाले निर्यात-अधिशेष और धन निकासी पर है; इसलिए मुद्दा भारत के लाभकारी व्यापार अधिशेष का बढ़ना नहीं, उस अधिशेष से धन का बाहर जाना था।
अवधारणा
यह प्रश्न आधुनिक भारतीय इतिहास में औपनिवेशिक आर्थिक शोषण और राष्ट्रवादी आर्थिक आलोचना की समझ जांचता है। RAS में यह बार-बार आता है क्योंकि धन निकासी सिद्धांत भारतीय राष्ट्रवाद के आर्थिक आधार को समझाने वाला केंद्रीय विचार है।
