RAS प्रश्न
चंपारण सत्याग्रह किस शोषक प्रणाली के विरुद्ध था?
सही उत्तर: (D) तिनकठिया प्रणाली (3/20 भूमि पर जबरन नील की खेती)।
चंपारण सत्याग्रह तिनकठिया प्रणाली के विरुद्ध था, जिसमें किसानों को अपनी भूमि के 3/20 हिस्से पर यूरोपीय बागान मालिकों के लिए जबरन नील उगाना पड़ता था।
व्याख्या
तिनकठिया प्रणाली चंपारण के किसानों पर लगाया गया ऐसा शोषक दबाव था जिसमें उन्हें अपनी जमीन के 3/20 हिस्से पर नील की खेती करनी पड़ती थी। PIB के अनुसार, गांधी ने बताया कि चंपारण का किरायेदार अपने भू-भाग के हर 20 में से 3 हिस्सों पर मकान-मालिक के लिए नील बोने को बाध्य था और इसी व्यवस्था को तिनकठिया कहा गया। गांधी अप्रैल 1917 में किसानों की पीड़ा जानकर चंपारण गए, व्यापक जांच की, और सरकार ने जांच समिति बनाई। समिति की मुख्य स्वीकृत सिफारिश तिनकठिया प्रणाली का पूरा उन्मूलन थी; इसलिए चंपारण सत्याग्रह का सीधा लक्ष्य यही जबरन नील-खेती व्यवस्था थी।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) रैयतवाड़ी प्रथा दक्षिण भारत से जुड़ी भूमि-राजस्व व्यवस्था थी; चंपारण सत्याग्रह का मुद्दा 3/20 भूमि पर जबरन नील उगवाने वाली तिनकठिया प्रणाली था।
- (B) ज़मींदारी प्रथा सामान्य भू-स्वामित्व और लगान व्यवस्था का नाम है, जबकि गांधी के चंपारण अभियान का निशाना खास तौर पर नील की तिनकठिया बाध्यता थी।
- (C) महालवाड़ी प्रथा उत्तर-पश्चिमी प्रांतों से जुड़ी भूमि-राजस्व व्यवस्था थी; चंपारण के किसानों की शिकायत तिनकठिया के तहत जबरन नील खेती से थी।
अवधारणा
आधुनिक भारत में गांधीवादी जन-आंदोलनों और किसान प्रश्न की बुनियादी समझ के लिए चंपारण सत्याग्रह महत्त्वपूर्ण है। RAS में चंपारण इसलिए बार-बार पूछा जाता है क्योंकि यह भारत में गांधी के शुरुआती सत्याग्रह और औपनिवेशिक कृषि-शोषण, दोनों को जोड़ता है।
