RAS प्रश्न
अरावली किन दो नदी प्रणालियों के बीच जल विभाजक का कार्य करती है?
सही उत्तर: (C) सिंधु प्रणाली (अरब सागर) और गंगा प्रणाली (बंगाल की खाड़ी)।
अरावली श्रेणी सिंधु (अरब सागर) और गंगा (बंगाल की खाड़ी) नदी प्रणालियों के बीच जल-विभाजक का काम करती है।
व्याख्या
राजस्थान में अरावली श्रेणी मुख्य जल-विभाजक रेखा है। अरावली बंगाल की खाड़ी और अरब सागर के अपवाह क्षेत्रों के बीच विभाजक श्रेणी है। इसे सिंधु (अरब सागर) और गंगा (बंगाल की खाड़ी) प्रणाली के रूप में समझा जाता है। अरावली से निकलने वाली अधिकांश नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं, जबकि लूणी जैसी कुछ नदियाँ पश्चिम में कच्छ के रण और अरब सागर की दिशा पकड़ती हैं। इसलिए अरावली को केवल पर्वत-श्रेणी नहीं, राजस्थान के नदी-प्रवाह को दो दिशाओं में बाँटने वाली रेखा समझना चाहिए।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) गंगा और ब्रह्मपुत्र पूर्वी भारत से जुड़ी नदी प्रणालियाँ हैं; अरावली का राजस्थान-आधारित जल-विभाजन सिंधु और गंगा प्रणालियों के बीच है।
- (B) कृष्णा और गोदावरी दक्कन की नदी प्रणालियाँ हैं, जबकि अरावली से जुड़ा राजस्थान का पश्चिमी और पूर्वी प्रवाह-विभाजन सिंधु और गंगा प्रणालियों से संबंधित है।
- (D) नर्मदा और ताप्ती मध्य भारत की नदियाँ हैं; वे राजस्थान में अरावली से बनने वाले अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के अपवाह क्षेत्रों के विभाजन का युग्म नहीं हैं।
अवधारणा
राजस्थान के अपवाह तंत्र में जल-विभाजक रेखा की समझ जरूरी है। RAS में अरावली इसलिए बार-बार आती है क्योंकि यह मरुस्थलीय क्षेत्र, पूर्वी मैदानों और नदी-प्रवाह की दिशा को समझने की आधारभूत कड़ी है।
