RAS प्रश्न
राजस्थान में किसी विधायक पर दल-बदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) कब लागू होता है?
सही उत्तर: (D) स्वेच्छा से दल की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी व्हिप के विरुद्ध मतदान करता है।
राजस्थान में विधायक पर दल-बदल विरोधी कानून तब लागू होता है, जब वह स्वेच्छा से अपने दल की सदस्यता छोड़ दे या बिना पूर्व अनुमति दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान करे या मतदान से अनुपस्थित रहे।
व्याख्या
दसवीं अनुसूची का आधार दल के प्रति विधायी निष्ठा से जुड़ा है, सामान्य अनुपस्थिति या राजनीतिक असहमति से नहीं। दल-बदल के 2 मुख्य आधार हैं: सदस्य ने स्वेच्छा से उस राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़ दी हो, या वह सदन में अपने दल अथवा दल द्वारा अधिकृत व्यक्ति/प्राधिकारी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करे या मतदान से अनुपस्थित रहे। दूसरे मामले में बात तभी बनती है जब उसने पहले अनुमति न ली हो और बाद में दल ने उस मतदान या अनुपस्थिति को 15 दिन के भीतर स्वीकार न किया हो। इसलिए सही उत्तर D है, क्योंकि यह सदस्यता छोड़ने और दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान दोनों मुख्य आधारों को पकड़ता है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) एक सत्र से अनुपस्थित रहना अपने-आप दल-बदल नहीं बनता; दसवीं अनुसूची मतदान से अनुपस्थिति को तभी पकड़ती है जब वह दल के निर्देश के विरुद्ध और बिना पूर्व अनुमति हो।
- (B) निर्वाचन क्षेत्र बदलना दल की सदस्यता छोड़ने या सदन में दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान करने जैसा आधार नहीं है।
- (C) दल के नेतृत्व की आलोचना भर से अयोग्यता नहीं लगती, क्योंकि कसौटी सदस्यता छोड़ना या सदन में दल के निर्देश के विरुद्ध मतदान/अनुपस्थिति है।
अवधारणा
भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची विधायकों की अयोग्यता की कसौटी तय करती है। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि राज्य विधानमंडल, दल-बदल और विधानसभा अध्यक्ष-संबंधी प्रक्रियाएं राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था समझने के लिए मूलभूत हैं।
