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RAS प्रश्न

अमृत बाज़ार पत्रिका ने रातोंरात बंगाली छोड़कर अंग्रेज़ी रूप क्यों अपनाया; वह किस कानून से बचना चाहती थी?

सही उत्तर: (D) वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878।

अमृत बाज़ार पत्रिका ने वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 से बचने के लिए बांग्ला छोड़कर लगभग रातोंरात अंग्रेज़ी अखबार का रूप अपना लिया।

  1. (A)

    सेंसरशिप एक्ट, 1920

  2. (B)

    भारतीय प्रेस एक्ट, 1910

  3. (C)

    राजद्रोह अधिनियम

  4. (D)

    वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878

व्याख्या

अमृत बाज़ार पत्रिका घोष बंधुओं द्वारा कलकत्ता से प्रकाशित पत्र था और सरकार की नीतियों पर उसकी तीखी आलोचना के कारण औपनिवेशिक अधिकारियों की नजर में था। वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 लॉर्ड लिटन के समय आया और इसका निशाना भारतीय भाषाओं के अखबार थे। इस कानून में स्थानीय भाषा के पत्रों के मुद्रक या प्रकाशक से बंधपत्र लेने, सुरक्षा राशि जमा कराने, आपत्तिजनक सामग्री पर प्रेस की मशीनरी जब्त करने और जमा धन जब्त करने जैसे प्रावधान थे। इसी कारण पत्रिका ने अलग रास्ता चुना: वह लगभग रातोंरात अंग्रेज़ी अखबार बन गई, लेकिन सरकार के सामने आईना रखने की अपनी भूमिका जारी रखी। कानून वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 ही था।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) सेंसरशिप एक्ट, 1920 इस प्रसंग से मेल नहीं खाता, क्योंकि अमृत बाज़ार पत्रिका का रातोंरात अंग्रेज़ी बनना 1878 के वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट से जुड़ा था।
  • (B) भारतीय प्रेस एक्ट, 1910 बाद का कानून था, जबकि यह घटना वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 से बचने की प्रतिक्रिया थी।
  • (C) राजद्रोह संबंधी प्रावधान अलग आपराधिक मुद्दा था; यहां पत्रिका ने जिस कानून से बचने के लिए भाषा बदली, वह स्थानीय भाषा के प्रेस को दबाने वाला वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 था।

अवधारणा

आधुनिक भारत में औपनिवेशिक प्रेस-नियंत्रण और राष्ट्रवादी पत्रकारिता की भूमिका महत्त्वपूर्ण विषय है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि प्रेस, जनमत और औपनिवेशिक दमन स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआती राजनीति को समझने की मुख्य कड़ियां हैं।

स्रोत

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