RAS प्रश्न
राजस्थान में लाल मिट्टी मुख्यतः किन जिलों में पाई जाती है और इसे इसका विशिष्ट रंग किससे मिलता है?
सही उत्तर: (B) डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर; लौह ऑक्साइड (Fe₂O₃)।
राजस्थान में लाल मिट्टी मुख्यतः डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर जिलों में मिलती है। इसका लाल रंग क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों में मौजूद विसरित लौह ऑक्साइड (Fe2O3) से आता है।
व्याख्या
राजस्थान में लाल मिट्टी दक्षिणी जिलों डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और उदयपुर में प्रमुख रूप से मिलती है। इसके वितरण और मूल चट्टानों से इसकी पहचान स्पष्ट होती है। यह प्राचीन क्रिस्टलीय और कायांतरित चट्टानों, विशेष रूप से नीस और शिस्ट, के उष्णकटिबंधीय अपक्षय से बनती है। इसका लाल रंग सतही दाग या जैविक पदार्थ के कारण नहीं, बल्कि चट्टानों में मौजूद विसरित लौह ऑक्साइड के कारण होता है; Fe2O3 या हेमेटाइट इसका रंगकारक है। यह मिट्टी अच्छी जल-निकासी वाली होती है और इसमें सामान्यतः नाइट्रोजन तथा फ़ॉस्फ़ोरस की कमी रहती है। सिंचाई मिलने पर यह मक्का, ज्वार, मूंगफली और कपास जैसी फ़सलों के लिए उपयोगी होती है।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) बीकानेर और जैसलमेर पश्चिमी राजस्थान की शुष्क, बलुई मिट्टी का संकेत देते हैं। वहाँ की मरुस्थलीय मिट्टी में कैल्शियम कार्बोनेट के कंकड़ मिलते हैं, न कि दक्षिणी राजस्थान की लाल मिट्टी जैसा लौह ऑक्साइड-जनित लाल रंग।
- (C) कोटा, बूंदी और झालावाड़ काली कपास मिट्टी की पट्टी में आते हैं। इस मिट्टी का गहरा रंग टाइटेनिफेरस मैग्नेटाइट और ह्यूमस से जुड़ा है, मैंगनीज ऑक्साइड से नहीं।
- (D) सीकर, झुंझुनू और चुरू में अर्ध-शुष्क रेतीली-दोमट मिट्टी तथा कम ह्यूमस मिलता है। इसलिए वहाँ ह्यूमस का संचय लाल मिट्टी के क्षेत्र की व्याख्या नहीं करता।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान में मिट्टी के वर्गीकरण को उसके वितरण, मूल चट्टान और रंग-रसायन के साथ समझने की आपकी क्षमता जाँचता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है, क्योंकि जिलावार वितरण और मिट्टी के गुण भौतिक भूगोल को सीधे कृषि से जोड़ते हैं।
