RAS प्रश्न
राजस्थान में अफ़ीम की खेती मुख्य रूप से किन जिलों में होती है?
सही उत्तर: (C) चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़।
राजस्थान में लाइसेंस लेकर अफ़ीम की खेती मुख्यतः चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ जिलों में की जाती है; वैध अफ़ीम-पोस्त की खेती वाले जिलों की आधिकारिक सूची में दोनों शामिल हैं।
व्याख्या
राजस्थान में अफ़ीम की खेती सामान्य फसल की तरह पूरे राज्य में नहीं की जा सकती। औषधीय उपयोग के लिए इसकी खेती केवल अधिसूचित क्षेत्रों में, लाइसेंस लेकर और सरकारी निगरानी में की जाती है। स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की 2019 की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि वैध अफ़ीम-पोस्त की खेती केवल अधिसूचित क्षेत्रों में होती है। सरकारी शर्तें पूरी करने वाले किसानों को केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो लाइसेंस देता है। रिपोर्ट में राजस्थान के अधिसूचित अफ़ीम-पोस्त जिलों में कोटा, झालावाड़, चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ का नाम है। रिपोर्ट अफ़ीम को अफ़ीम-पोस्त से प्राप्त पदार्थ बताती है और वैध स्रोतों की अफ़ीम को अवैध बाज़ार में पहुँचाए जाने को चिंता का विषय मानती है। इसलिए चित्तौड़गढ़ और प्रतापगढ़ सबसे उपयुक्त उत्तर हैं। पश्चिमी राजस्थान के जिले, जयपुर-अलवर क्षेत्र और सूची से बाहर के किसी जिले को शामिल करने वाले विकल्प इस अधिसूचित क्षेत्र में नहीं आते।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की रिपोर्ट में राजस्थान के जिन जिलों को लाइसेंस प्राप्त अफ़ीम-पोस्त की खेती के लिए सूचीबद्ध किया गया है, उनमें जोधपुर और बाड़मेर शामिल नहीं हैं। दोनों पश्चिमी राजस्थान के जिले हैं।
- (B) रिपोर्ट की अधिसूचित सूची में कोटा है, लेकिन बूंदी नहीं। इसलिए इस विकल्प में सूची का एक जिला और सूची से बाहर का एक जिला जोड़ा गया है; यह चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ की जोड़ी नहीं है।
- (D) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो की रिपोर्ट में राजस्थान के जिन जिलों को लाइसेंस प्राप्त अफ़ीम-पोस्त की खेती के लिए सूचीबद्ध किया गया है, उनमें जयपुर और अलवर शामिल नहीं हैं। दोनों पूर्वी राजस्थान के जिले हैं।
अवधारणा
राजस्थान के कृषि-भूगोल में अफ़ीम को सामान्य नकदी फसल नहीं, बल्कि विशेष और नियंत्रित मादक फसल माना जाता है। अलग-अलग जिलों में इसकी खेती का संबंध भौतिक भूगोल, क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, सरकारी नियमन और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था से है।
