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RAS प्रश्न

भारत के प्रथम वायसराय (1858-1862) लॉर्ड कैनिंग को 'क्लेमेंसी कैनिंग' क्यों कहा गया?

सही उत्तर: (C) उन्होंने 1857 के विद्रोहियों के प्रति उदार नीति की वकालत की।

लॉर्ड कैनिंग को ‘क्लेमेंसी कैनिंग’ इसलिए कहा गया क्योंकि 1857 के विद्रोह के बाद उन्होंने विद्रोहियों के प्रति अंधाधुंध बदले के बजाय अपेक्षाकृत उदार व्यवहार की वकालत की।

  1. (A)

    वे अपने दानशील कार्यों के लिए जाने जाते थे

  2. (B)

    उन्होंने मृत्यु दंड समाप्त किया

  3. (C)

    उन्होंने 1857 के विद्रोहियों के प्रति उदार नीति की वकालत की

  4. (D)

    उन्होंने सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त किया

व्याख्या

लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर-जनरल और 1858 से 1862 तक प्रथम वायसराय थे। 1857 के विद्रोह के बाद माहौल कठोर दमन और व्यापक बदले की मांग वाला था, लेकिन कैनिंग ने विद्रोह में शामिल लोगों को दंडित करते हुए भी भारतीयों पर अंधाधुंध प्रतिशोध से बचने की नीति अपनाई। इसी कारण उन्हें ‘क्लेमेंसी कैनिंग’ कहा गया; यह नाम अंग्रेजों की ओर से ताने की तरह भी इस्तेमाल हुआ। इसलिए उपनाम का संबंध दानशीलता, मृत्यु-दंड समाप्त करने या सभी राजनीतिक बंदियों को छोड़ने से नहीं, बल्कि विद्रोहियों के प्रति नरम और सीमित दंड-नीति से था। उनके समय में भारतीय दंड संहिता, भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम और भारतीय परिषद अधिनियम जैसे प्रशासनिक कदम भी जुड़े रहे।

बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं

  • (A) दानशील कार्यों से यह उपनाम नहीं जुड़ा था; उपनाम 1857 के बाद विद्रोहियों के प्रति कैनिंग की नरम नीति से जुड़ा था।
  • (B) मृत्यु-दंड समाप्त करने का दावा तथ्यों से समर्थित नहीं है; कैनिंग ने विद्रोह में शामिल लोगों को दंडित किया, पर अंधाधुंध बदले से बचने की नीति रखी।
  • (D) सभी राजनीतिक बंदियों को मुक्त करने की बात स्रोत में नहीं मिलती; स्रोत केवल यह बताता है कि उन्होंने व्यापक प्रतिशोध से बचते हुए कानून-व्यवस्था बहाल की।

अवधारणा

यह प्रश्न 1857 के विद्रोह के बाद ब्रिटिश शासन की नीति और गवर्नर-जनरल से वायसराय तक सत्ता-परिवर्तन की समझ जांचता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि आधुनिक भारत में 1857 के बाद प्रशासनिक पुनर्गठन और औपनिवेशिक नीति निर्णायक मोड़ हैं।

स्रोत

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