RAS प्रश्न
भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जयप्रकाश नारायण का हज़ारीबाग जेल से साहसिक पलायन महत्वपूर्ण था क्योंकि:
सही उत्तर: (C) भागने के बाद उन्होंने पूरे भारत में भूमिगत प्रतिरोध नेटवर्क संगठित किए।
भारत छोड़ो आंदोलन में हज़ारीबाग सेंट्रल जेल से पलायन के बाद जयप्रकाश नारायण ने पूरे भारत में भूमिगत प्रतिरोध तंत्र संगठित किया।
व्याख्या
जयप्रकाश नारायण का हज़ारीबाग सेंट्रल जेल से पलायन इसलिए महत्वपूर्ण था कि वह केवल जेल से निकलने की घटना नहीं रही; उसके बाद वे भारत छोड़ो आंदोलन की भूमिगत धारा के सक्रिय आयोजक बने। वे 9 नवंबर 1942 को योगेंद्र शुक्ल आदि नेताओं के साथ निकले, फिर भूमिगत प्रतिरोध तंत्र बनाए, तोड़फोड़ गतिविधियों का समन्वय किया और बिखरे हुए समूहों के बीच संपर्क बनाए रखा। प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार वरिष्ठ नेताओं की गिरफ्तारी के बाद जयप्रकाश नारायण ने आंदोलन की जिम्मेदारी संभाली, दिवाली 1942 में हज़ारीबाग जेल से साहसिक पलायन किया, भूमिगत रूप से काम किया और नेपाल में आजाद दस्ता संगठित किया। सितंबर 1943 में पंजाब से उनकी गिरफ्तारी से स्पष्ट है कि वे अगले दिन आत्मसमर्पण नहीं कर बैठे थे।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) भागने के बाद जयप्रकाश नारायण वायसराय के सलाहकार नहीं बने; वे ब्रिटिश शासन के खिलाफ भूमिगत स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रहे।
- (B) उन्होंने अगले दिन आत्मसमर्पण नहीं किया, क्योंकि वे कई महीनों तक भूमिगत रहे और सितंबर 1943 में पंजाब में पकड़े गए।
- (D) वे तुरंत जापान जाकर INA में शामिल नहीं हुए; उनका काम भारत और नेपाल में भूमिगत प्रतिरोध, संपर्क और आजाद दस्ता संगठन से जुड़ा था।
अवधारणा
भारत छोड़ो आंदोलन में भूमिगत प्रतिरोध और समाजवादी नेताओं की भूमिका में जयप्रकाश नारायण का योगदान केंद्रीय था। RAS में यह प्रसंग इसलिए बार-बार उपयोगी है क्योंकि 1942 का आंदोलन केवल प्रस्ताव और गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं था; उसमें संगठित प्रतिरोध की मजबूत धारा भी थी।
