RAS प्रश्न
गांधी ने 1932 में किसके विरोध में आमरण अनशन किया?
सही उत्तर: (B) दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल।
गांधी ने 1932 में दलित वर्गों के लिए हिंदू निर्वाचक मंडल से अलग पृथक निर्वाचक मंडल के प्रावधान के विरोध में आमरण अनशन किया।
व्याख्या
गांधी ने 20 सितंबर 1932 को यरवदा जेल में आमरण अनशन शुरू किया। विरोध का मुद्दा सांप्रदायिक पंचाट में दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान था। Encyclopaedia Britannica के अनुसार पूना समझौता इसी पृष्ठभूमि से निकला: ब्रिटिश प्रस्ताव अलग-अलग समुदायों को विधानमंडलों में सीटें देने की योजना था, और दलित नेताओं, खासकर भीमराव रामजी आंबेडकर, ने इसे दलित हितों को आगे बढ़ाने का रास्ता माना। गांधी ने दलितों के लिए हिंदू निर्वाचक मंडल से अलग निर्वाचक मंडल का विरोध किया, क्योंकि उनके मत में इससे स्वतंत्रता के प्रयास में भारत कमजोर होता और हिंदू समाज विभाजित होता। इसलिए सही उत्तर पृथक निर्वाचक मंडल है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (A) रॉलेट एक्ट के खिलाफ विरोध 1919 से जुड़ा था, जबकि प्रश्न गांधी के 1932 के आमरण अनशन और सांप्रदायिक पंचाट के प्रावधान पर है।
- (C) भारत का विभाजन 1947 की घटना थी, इसलिए वह 1932 में यरवदा जेल में शुरू हुए इस अनशन का कारण नहीं हो सकता।
- (D) नमक कर के विरुद्ध आंदोलन 1930 के सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ा था, जबकि 1932 का अनशन दलित वर्गों के पृथक निर्वाचक मंडल के विरोध में था।
अवधारणा
यह प्रश्न आधुनिक भारतीय इतिहास में सांप्रदायिक पंचाट, पूना समझौता और प्रतिनिधित्व की राजनीति की समझ जांचता है। RAS में यह विषय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि इससे राष्ट्रीय आंदोलन, सामाजिक सुधार और औपनिवेशिक संवैधानिक उपायों का संबंध एक साथ स्पष्ट होता है।
