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RAS प्रश्न

ERCP का मुख्य उद्देश्य किन नदियों के अतिरिक्त जल को मोड़ना है?

सही उत्तर: (A) चम्बल और इसकी सहायक नदियाँ।

ERCP का मुख्य उद्देश्य चम्बल और उसकी सहायक नदियों के अतिरिक्त मानसूनी जल को पूर्वी राजस्थान के जल-अभाव वाले क्षेत्रों तक मोड़ना है।

  1. (A)

    चम्बल और इसकी सहायक नदियाँ

  2. (B)

    माही और साबरमती

  3. (C)

    लूणी और इसकी सहायक नदियाँ

  4. (D)

    बनास और बाणगंगा

व्याख्या

ERCP में चम्बल नदी-घाटी के भीतर जल अंतरण की परिकल्पना है। पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार इसमें काली सिंध, पार्वती, मेज और चाकन उप-घाटियों में उपलब्ध अतिरिक्त मानसूनी जल का उपयोग कर उसे बनास, गंभीरी, बाणगंगा और पार्वती की जल-अभाव वाली उप-घाटियों की ओर मोड़ना है, ताकि पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों को पेय और औद्योगिक जल मिल सके। इसलिए स्रोत-क्षेत्र चम्बल और उसकी सहायक नदियां हैं। कुन्नू, पार्वती और काली सिंध जैसी सहायक नदियां भी इसी चम्बल नदी-घाटी से जुड़ी हैं। इसीलिए ERCP को पश्चिमी राजस्थान या गुजरात की ओर बहने वाली नदी-प्रणाली से जोड़ना गलत होगा।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (B) माही और साबरमती स्रोत-क्षेत्र नहीं हैं, क्योंकि वे गुजरात की ओर बहने वाली नदी-प्रणाली से जुड़ी हैं, जबकि ERCP चम्बल नदी-घाटी के अतिरिक्त मानसूनी जल पर आधारित है।
  • (C) लूणी और उसकी सहायक नदियां पश्चिमी राजस्थान से जुड़ी हैं, जबकि ERCP का लक्ष्य पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों के लिए चम्बल नदी-घाटी के भीतर जल अंतरण करना है।
  • (D) बनास और बाणगंगा स्रोत नहीं हैं; पत्र सूचना कार्यालय के अनुसार ये जल-अभाव वाली उप-घाटियों में आती हैं, जिनकी ओर चम्बल नदी-घाटी का अतिरिक्त जल मोड़ा जाना है।

अवधारणा

राजस्थान की नहर और नदी-घाटी योजनाओं में अतिरिक्त जल और जल-अभाव वाले क्षेत्रों की समझ जरूरी है। RAS में ERCP इसलिए बार-बार आता है क्योंकि यह पूर्वी राजस्थान, पेयजल और नदी-जोड़ परियोजनाओं जैसे भूगोल-प्रशासन के मुद्दों से सीधे जुड़ा है।

स्रोत

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