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RAS प्रश्न

दादाभाई नौरोजी के 'धन निकासी सिद्धांत' ने तर्क दिया कि:

सही उत्तर: (B) ब्रिटिश शासन भारत की संपत्ति बिना पर्याप्त प्रतिफल के इंग्लैंड ले जा रहा था।

दादाभाई नौरोजी के धन निकासी सिद्धांत का मुख्य तर्क था कि ब्रिटिश शासन भारत की संपत्ति को पर्याप्त प्रतिफल दिए बिना इंग्लैंड ले जा रहा था।

  1. (A)

    भारतीय सैनिकों को बिना मुआवजे के ब्रिटिश युद्ध लड़ने भेजा जा रहा था

  2. (B)

    ब्रिटिश शासन भारत की संपत्ति बिना पर्याप्त प्रतिफल के इंग्लैंड ले जा रहा था

  3. (C)

    ब्रिटिश बागानों की सिंचाई के लिए भारत की नदियाँ मोड़ी जा रही थीं

  4. (D)

    अंग्रेज़ भारतीय संस्कृति का क्षरण कर उसकी जगह अंग्रेज़ी को स्थापित कर रहे थे

व्याख्या

दादाभाई नौरोजी (1825-1917), जिन्हें भारत का महान वृद्ध पुरुष कहा गया, ने अपनी पुस्तक पॉवर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया (1901) में धन निकासी सिद्धांत रखा। इसका केंद्र यह था कि ब्रिटिश शासन भारत से संपत्ति बाहर ले जा रहा था और भारत को उसका पर्याप्त प्रतिफल नहीं मिल रहा था। स्रोत में नौरोजी का तर्क साफ है: पहले के शासकों में लूट या भारी कर हो सकते थे, पर धन देश में रहता था; ब्रिटिश शासन में कर की आय भी बाहर भेजी जाती थी। यह निकासी ब्याज, पेंशन, ब्रिटिश सेना के फरलो भत्तों और होम चार्ज जैसे भुगतानों से होती थी। नौरोजी के अनुसार इसी कारण भारत उद्योग और व्यापार के लिए पूंजी जमा नहीं कर पा रहा था।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) सैनिक खर्च धन निकासी के कुछ माध्यमों से जुड़ सकता था, लेकिन नौरोजी का मुख्य तर्क केवल बिना मुआवजे सैनिक भेजने का नहीं, बल्कि भारत की संपत्ति के बाहर जाने का था।
  • (C) यह सिद्धांत नदियों या सिंचाई व्यवस्था पर नहीं, बल्कि कर, ब्याज, पेंशन और होम चार्ज जैसे आर्थिक भुगतानों से संपत्ति निकासी पर था।
  • (D) नौरोजी का धन निकासी सिद्धांत सांस्कृतिक प्रतिस्थापन की व्याख्या नहीं करता; वह ब्रिटिश शासन के आर्थिक प्रभाव और संपत्ति के बाहर जाने पर केंद्रित था।

अवधारणा

यह प्रश्न आधुनिक भारत के आर्थिक राष्ट्रवाद और औपनिवेशिक शोषण की समझ को जांचता है। RAS में यह इसलिए बार-बार आता है क्योंकि आरंभिक राष्ट्रवादियों ने ब्रिटिश शासन की आर्थिक आलोचना को राजनीतिक चेतना से जोड़ा।

स्रोत

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