RAS प्रश्न
मार्च 2026 में राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनाव कानूनों में हुए संशोधन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस संशोधन ने दो-संतान मानदंड हटाया, जिसे मूल रूप से 1995 में मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के शासनकाल में लागू किया गया था। 2. यह संशोधन केवल पंचायती राज संस्थाओं पर लागू होता है, शहरी स्थानीय निकायों पर नहीं। 3. संशोधन ने चुनावी उम्मीदवारों पर कुष्ठ रोग के आधार पर लगने वाली अयोग्यता भी हटाई। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
सही उत्तर: (C) केवल 1 और 3।
मार्च 2026 के राजस्थान स्थानीय निकाय चुनाव कानून संशोधनों में 1995 का दो-संतान मानदंड और कुष्ठ रोग के आधार पर अयोग्यता हटाई गई, और यह बदलाव पंचायती राज संस्थाओं के साथ शहरी स्थानीय निकायों पर भी लागू हुआ।
व्याख्या
केवल कथन 1 और 3 सही हैं। दो-संतान मानदंड 1995 में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू किया गया था। मार्च 2026 के संशोधनों ने स्थानीय निकाय चुनाव के उम्मीदवारों पर लागू यह अयोग्यता हटा दी। राजस्थान विधानसभा ने पंचायती राज और नगरपालिका—दोनों कानूनों में संशोधन किया; इसलिए यह बदलाव केवल पंचायती राज संस्थाओं तक सीमित नहीं था, बल्कि शहरी स्थानीय निकायों पर भी लागू हुआ। नगरपालिका कानून की धारा 24 में 2 से अधिक संतान वाले व्यक्ति को नगरपालिका सदस्य चुने जाने या सदस्य बने रहने से अयोग्य ठहराने का प्रावधान हटाया गया। इसी सुधार में रोग-संबंधी परिभाषा से कुष्ठ रोग का उल्लेख हटाकर उससे जुड़ी अयोग्यता भी समाप्त की गई। यह बदलाव दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 और भेदभाव-विरोधी सिद्धांतों के अनुरूप था। इसलिए कथन 2 गलत है और कथन 1 व 3 सही हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) A में कथन 2 शामिल है, जबकि संशोधन पंचायती राज संस्थाओं के साथ नगरपालिकाओं पर भी लागू हुआ था।
- (B) B में कथन 1 शामिल नहीं है, जबकि हटाया गया दो-संतान मानदंड 1995 में मुख्यमंत्री भैरों सिंह शेखावत के कार्यकाल में लागू किया गया था।
- (D) D तीनों कथनों को सही मानता है, जबकि कथन 2 गलत है क्योंकि नगरपालिका कानून के संशोधन में शहरी स्थानीय निकाय भी शामिल थे।
अवधारणा
यह सवाल राजस्थान की स्थानीय स्वशासन व्यवस्था, चुनावी अयोग्यताओं और उनसे जुड़े विधायी संशोधनों की समझ परखता है। RAS में ऐसे सवाल बार-बार आते हैं, क्योंकि राज्य के संशोधनों से पंचायती राज और नगरपालिका चुनाव लड़ने की पात्रता बदल सकती है। यह विषय कानूनी पात्रता के नियमों को राज्य प्रशासन, प्रतिनिधित्व, दिव्यांगजन अधिकारों, भेदभाव-विरोधी सुधारों और सामाजिक न्याय से जोड़ता है।
