RAS प्रश्न
राजस्थान में ऊंटों की आबादी की प्रवृत्ति और संरक्षण प्रयासों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें: 1. राजस्थान में ऊंटों की आबादी 1990 के दशक से लगातार घट रही है। 2. 2014 में ऊंट को राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया। 3. ऊंटों की संख्या घटने के प्रमुख कारणों में कृषि का मशीनीकरण, ऊंट वध पर प्रतिबंध से घटा आर्थिक प्रोत्साहन और चरागाहों में कमी शामिल हैं। 4. बीकानेर स्थित राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने ऊंटनी के दूध से कुल्फी, आइसक्रीम और किण्वित दूध जैसे उत्पाद विकसित किए हैं। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-से सही हैं?
सही उत्तर: (B) 1, 2, 3 और 4।
चारों कथन सही हैं: राजस्थान में ऊंटों की आबादी 1990 के दशक से घट रही है, ऊंट को 2014 में राज्य पशु घोषित किया गया, इस गिरावट का संबंध मशीनीकरण, वध-प्रतिबंध से घटे आर्थिक प्रोत्साहन और सिकुड़ते चरागाहों से है, और बीकानेर के राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने ऊंटनी के दूध से बने उत्पाद विकसित किए हैं।
व्याख्या
चारों कथन राजस्थान में ऊंट संरक्षण की एक ही समस्या के अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट करते हैं। आधिकारिक पशुधन गणना के अनुसार 2019 में देश में ऊंटों की आबादी 2.5 लाख थी, जो पिछली गणना से 37.1% कम थी; 17वीं, 18वीं, 19वीं और 20वीं पशुधन गणनाओं में भी इसकी घटती प्रवृत्ति दर्ज हुई। राजस्थान में ऊंटों की आबादी 1990 के दशक के लगभग 5 लाख से घटकर 2019 की गणना तक 2.5 लाख से कम रह गई। इसके प्रमुख कारण कृषि में मशीनीकरण से भार ढोने में ऊंट की भूमिका घटना, वध और निर्यात पर प्रतिबंध से आर्थिक प्रोत्साहन कम होना तथा चरागाहों का सिकुड़ना हैं। राजस्थान ने 2014 में ऊंट को राज्य पशु घोषित किया। बीकानेर के राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने आजीविका-आधारित संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए ऊंटनी के दूध से आइसक्रीम और किण्वित दूध जैसे उत्पाद विकसित किए हैं।
बाक़ी विकल्प गलत क्यों हैं
- (A) A में कथन 3 छूट जाता है; मशीनीकरण, वध और निर्यात पर प्रतिबंध से आर्थिक प्रोत्साहन कम होना तथा चरागाहों का सिकुड़ना ऊंटों की घटती संख्या के प्रमुख कारण हैं।
- (C) C में कथन 1 और 3 छूट जाते हैं; ऊंटों की आबादी 1990 के दशक से घट रही है और मशीनीकरण, घटा आर्थिक प्रोत्साहन तथा सिकुड़ते चरागाह इस गिरावट के प्रमुख कारण हैं।
- (D) D में कथन 2 और 4 छूट जाते हैं; राजस्थान ने 2014 में ऊंट को राज्य पशु घोषित किया और बीकानेर के राष्ट्रीय ऊंट अनुसंधान केंद्र ने संरक्षण के तहत ऊंटनी के दूध से बने उत्पाद विकसित किए।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान के पशुधन भूगोल, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, पशुपालक आजीविका और राज्य की संरक्षण नीति के बीच संबंध को परखता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि ऊंटों की घटती संख्या भौतिक भूगोल, कृषि, पशुपालन और राजस्थान की विशिष्ट नीतियों से जुड़ी है।
