RAS प्रश्न
आर्य समाज के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी स्थापना 1875 में बॉम्बे में हुई। 2. इसने 'शुद्धि' (शुद्धिकरण और पुनर्धर्मांतरण) की अवधारणा को बढ़ावा दिया। 3. इसने मूर्ति पूजा और वैदिक अनुष्ठानों का विरोध किया। उपरोक्त में से कौन-सा या कौन-से कथन सही है/हैं?
सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2।
आर्य समाज की स्थापना 1875 में बॉम्बे में हुई थी और उसने शुद्धि को बढ़ावा दिया, लेकिन उसने वैदिक अनुष्ठानों का विरोध नहीं किया।
व्याख्या
आर्य समाज के बारे में असली सावधानी कथन 3 पर है। आर्य समाज की स्थापना स्वामी दयानंद सरस्वती ने बॉम्बे में 10 अप्रैल 1875 को की थी, इसलिए कथन 1 सही है। आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन का उद्देश्य उन हिंदुओं को वापस लाना था जो दूसरे धर्मों में चले गए थे, इसलिए कथन 2 भी सही है। कथन 3 आधा सच रखकर गलत निष्कर्ष देता है: आर्य समाज ने मूर्ति पूजा का विरोध किया, लेकिन वह वेदों को ज्ञान और सत्य का आधार मानता था। उसने हवन और वैदिक मंत्र जैसे वैदिक अनुष्ठानों को बढ़ावा दिया। इसलिए केवल 1 और 2 सही हैं।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) इसमें कथन 2 को छोड़ दिया गया है, जबकि आर्य समाज का शुद्धि आंदोलन उसके प्रमुख कार्यों में था।
- (C) इसमें कथन 1 को छोड़ दिया गया है, जबकि आर्य समाज की स्थापना 1875 में बॉम्बे में हुई थी।
- (D) इसमें कथन 3 को भी सही मान लिया गया है, जबकि आर्य समाज ने मूर्ति पूजा का विरोध किया पर वैदिक अनुष्ठानों और वेदों के आधार को नहीं छोड़ा।
अवधारणा
आधुनिक भारत के धार्मिक-सामाजिक सुधार आंदोलनों में आर्य समाज की विचारधारा और कार्यक्रमों की पहचान जरूरी है। RAS में स्थापना-स्थान, शुद्धि और वेद-प्रधान दृष्टि जैसे बिंदु विकल्पों में मिलाकर बार-बार पूछे जाते हैं।
