RAS प्रश्न
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए। प्रत्येक युग्म में मिट्टी या नमी संरक्षण तकनीक और राजस्थान में उसका विशिष्ट अनुप्रयोग दिया गया है। 1. मल्चिंग → पश्चिमी राजस्थान की बलुई मिट्टी में नमी के वाष्पीकरण को कम करना 2. समोच्च खेती → अरावली और विंध्यन उच्चभूमि की ढलानों पर जल अपरदन नियंत्रित करना 3. जिप्सम प्रयोग → सांभर और पचपदरा झील क्षेत्रों की लवण-क्षारीय मिट्टी का पुनरुद्धार 4. समोच्च मेड़बंदी → केवल चंबल खड्ड क्षेत्र में लागू, राजस्थान में अन्यत्र नहीं। उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
सही उत्तर: (A) केवल 1, 2 और 3।
पश्चिमी राजस्थान की बलुई मिट्टी में मल्चिंग, अरावली-विंध्यन ढलानों पर समोच्च खेती और सांभर-पचपदरा क्षेत्र की लवण-क्षारीय मिट्टी में जिप्सम प्रयोग सही सुमेलित हैं, जबकि समोच्च मेड़बंदी केवल चंबल खड्ड क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
व्याख्या
सही युग्म 1, 2 और 3 हैं। मल्चिंग फसल अवशेष, पुआल या प्लास्टिक मल्च से पश्चिमी राजस्थान की बलुई मिट्टी में नमी के वाष्पीकरण को घटाती है। राजस्थान मृदा एवं जल संरक्षण अधिनियम, 1964 की अनुसूची में बलुई मिट्टी सुधार के लिए सतही मल्च बनाए रखने और जल अपरदन रोकने के लिए समोच्च खेती को संरक्षण उपायों में रखा गया है। अरावली और विंध्यन ढलानों पर समोच्च खेती अपवाह रोककर नाली और चादर अपरदन कम करती है। अधिनियम उसर भूमि के पुनरुद्धार में जिप्सम और अन्य सुधारकों का भी उल्लेख करता है; इसलिए सांभर और पचपदरा जैसी लवण झीलों के आसपास सोडियम-प्रभावित मिट्टी के लिए जिप्सम प्रयोग सुमेलित है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) युग्म 2 को छोड़ना गलत है, क्योंकि समोच्च खेती अरावली और विंध्यन ढलानों पर अपवाह रोककर जल अपरदन घटाने के लिए सही अनुप्रयोग है।
- (C) युग्म 1 को छोड़ना और युग्म 4 को सही मानना गलत है, क्योंकि मल्चिंग बलुई मिट्टी में नमी संरक्षण से जुड़ी है और समोच्च मेड़बंदी केवल चंबल खड्ड क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
- (D) युग्म 4 को सही मानना गलत है, क्योंकि समोच्च मेड़बंदी राजस्थान की ढलानदार और अपरदन-प्रवण भूमि में व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है, केवल चंबल खड्ड क्षेत्र में नहीं।
अवधारणा
राजस्थान में मृदा संरक्षण और नमी संरक्षण तकनीकों का प्रयोग स्थल-विशिष्ट होता है। RAS में यह विषय इसलिए बार-बार आता है क्योंकि थार, अरावली ढाल, विंध्यन उच्चभूमि और लवण झील क्षेत्र अलग-अलग संरक्षण उपाय मांगते हैं।
