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RAS प्रश्न

किस कांग्रेस अधिवेशन में महात्मा गाँधी पहली बार राष्ट्रीय आंदोलन के निर्विवाद नेता बने?

सही उत्तर: (C) नागपुर अधिवेशन, 1920।

नागपुर अधिवेशन, 1920 में महात्मा गाँधी पहली बार राष्ट्रीय आंदोलन के निर्विवाद नेता के रूप में स्थापित हुए।

  1. (A)

    बेलगाम अधिवेशन, 1924

  2. (B)

    कलकत्ता विशेष अधिवेशन, 1920

  3. (C)

    नागपुर अधिवेशन, 1920

  4. (D)

    अमृतसर अधिवेशन, 1919

व्याख्या

नागपुर अधिवेशन, दिसंबर 1920, इसलिए निर्णायक था क्योंकि यहीं कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान के बाद असहयोग कार्यक्रम को अपनाया गया। NCERT के अनुसार सितंबर 1920 के कलकत्ता अधिवेशन में गाँधीजी ने खिलाफत और स्वराज के समर्थन में असहयोग आंदोलन शुरू करने की जरूरत पर नेताओं को राजी किया, लेकिन अंतिम समझौता नागपुर में हुआ और कार्यक्रम स्वीकार हुआ। इसी अधिवेशन में कांग्रेस संविधान में स्वराज को लक्ष्य बनाया गया, प्रांतीय कांग्रेस समितियों का भाषाई आधार पर पुनर्गठन हुआ, चार आने की सदस्यता से जन-आधार बढ़ाया गया और कांग्रेस कार्यसमिति बनी। इन संगठनात्मक बदलावों ने गाँधीजी के नेतृत्व को केवल प्रस्ताव तक नहीं, पूरे राष्ट्रीय आंदोलन की कार्य-योजना तक पहुँचा दिया।

बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं

  • (A) बेलगाम अधिवेशन, 1924 तक गाँधीजी पहले ही राष्ट्रीय आंदोलन में स्थापित नेता बन चुके थे, इसलिए यह पहली स्थापना का क्षण नहीं था।
  • (B) कलकत्ता विशेष अधिवेशन, 1920 में गाँधीजी ने असहयोग आंदोलन की जरूरत मनवाई, लेकिन कार्यक्रम की अंतिम स्वीकृति और संगठनात्मक पुष्टि नागपुर में हुई।
  • (D) अमृतसर अधिवेशन, 1919 में गाँधीजी उपस्थित थे, पर उस समय कांग्रेस और राष्ट्रीय आंदोलन पर उनका निर्णायक प्रभुत्व अभी स्थापित नहीं हुआ था।

अवधारणा

यह प्रश्न आधुनिक भारतीय इतिहास में गाँधी युग के आरंभ और असहयोग आंदोलन की संस्थागत स्वीकृति को जाँचता है। RAS में ऐसे प्रश्न बार-बार आते हैं क्योंकि अधिवेशन, प्रस्ताव और नेतृत्व-परिवर्तन स्वतंत्रता आंदोलन की समयरेखा समझने की कुंजी हैं।

स्रोत

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