RAS प्रश्न
अरावली सुपरग्रुप किस भूवैज्ञानिक युग से संबंधित है?
सही उत्तर: (A) आर्कियन-प्रोटेरोज़ोइक।
अरावली सुपरग्रुप राजस्थान में आर्कियन आधार-शैल पर स्थित प्रोटेरोजोइक अतिक्रामी शैलों से संबंधित है, इसलिए इसका सही भूवैज्ञानिक संबंध आर्कियन-प्रोटेरोजोइक है।
व्याख्या
अरावली सुपरग्रुप को आर्कियन-प्रोटेरोजोइक से जोड़ना इसलिए सही है क्योंकि GSI के पृष्ठभूमि-आंकड़ों में राजस्थान की भू-विज्ञान रूपरेखा में आर्कियन आधार-शैलों के ऊपर प्रोटेरोजोइक अतिक्रामी शैलों का उल्लेख है, जिनमें अरावली और दिल्ली सुपरग्रुप शामिल हैं। इसी आधार पर प्रश्न में अरावली सुपरग्रुप को केवल किसी नए या मध्यकालीन युग में नहीं रखा जा सकता। राजस्थान में अरावली सुपरग्रुप की चट्टानें आर्कियन आधार-शैल पर स्थित प्रोटेरोजोइक अतिक्रामी शैलें हैं। इन्हीं प्रोटेरोजोइक शैलों में सोना, सीसा, जस्ता और तांबा जैसे महत्त्वपूर्ण खनिजीकरण मिलते हैं, इसलिए उत्तर A भूवैज्ञानिक क्रम और खनिज-संदर्भ दोनों से समर्थित है।
बाक़ी विकल्प ग़लत क्यों हैं
- (B) सेनोजोइक अपेक्षाकृत नया भूवैज्ञानिक युग है, जबकि अरावली सुपरग्रुप के लिए आधार आर्कियन शैल और उनके ऊपर प्रोटेरोजोइक अतिक्रामी शैलें दी गई हैं।
- (C) मेसोजोइक को डायनासोर-युग के रूप में पहचाना जाता है, जबकि यहां अरावली सुपरग्रुप का संबंध आर्कियन आधार-शैल और प्रोटेरोजोइक शैलों से है।
- (D) पैलियोजोइक मध्यवर्ती भूवैज्ञानिक युग है, पर अरावली सुपरग्रुप आर्कियन-प्रोटेरोजोइक संदर्भ में आता है।
अवधारणा
यह प्रश्न राजस्थान की भू-आकृतिक और भूवैज्ञानिक संरचना में अरावली तंत्र के काल-क्रम को जांचता है। RAS में यह विषय बार-बार आता है क्योंकि खनिजीकरण और राजस्थान की पुरानी शैल-रचनाएं इसी समझ से जुड़ती हैं।
