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तैयारी गाइड

UPSC में नेगेटिव मार्किंग कितनी होती है: पूरा हिसाब और छोड़ने की रणनीति

UPSC प्रीलिम्स में GS-I और CSAT, दोनों में गलत उत्तर पर उस सवाल के मार्क्स का ठीक 1/3 काटा जाता है। GS-I के 2 मार्क्स वाले सवाल में 2/3 यानी 0.666… मार्क और CSAT के 2.5 मार्क्स वाले सवाल में 2.5/3 यानी 0.833… मार्क कटता है; खाली छोड़े सवाल पर कोई कटौती नहीं होती।

UPSC प्रीलिम्स में नेगेटिव मार्किंग का सही नियम क्या है?

UPSC के दोनों शुरुआती पेपर वस्तुनिष्ठ होते हैं और दोनों में गलत उत्तर पर नेगेटिव मार्किंग लगती है। हर गलत उत्तर के लिए उस सवाल को मिले मार्क्स का ठीक 1/3 काटा जाता है। सवाल पूरी तरह खाली छोड़ने पर न मार्क्स मिलते हैं, न कोई कटौती होती है। एक से अधिक विकल्प भरने पर उत्तर गलत माना जाता है, भले उनमें सही विकल्प भी शामिल हो; ऐसे सवाल पर भी वही 1/3 कटता है। इसलिए यह हर गलती पर सीधे 1 मार्क की कटौती नहीं है और न ही कुल स्कोर का एक-तिहाई काटा जाता है। कटौती उसी सवाल के मार्क्स से निकलती है। 2026 के GS-I पेपर में 200 मार्क्स के 100 सवाल और CSAT में 200 मार्क्स के 80 सवाल हैं, इसलिए दोनों की प्रति-गलती कटौती अलग है।

GS-I और CSAT में कितने मार्क्स कटते हैं?

2026 के आधिकारिक पेपरों से हर सवाल के मार्क्स सीधे निकलते हैं। GS-I में 200 मार्क्स को 100 सवालों से भाग देने पर हर सवाल 2 मार्क्स का होता है। CSAT में 200 मार्क्स को 80 सवालों से भाग देने पर हर सवाल 2.5 मार्क्स का होता है। अब 1/3 का नियम लगाने पर नीचे की तुलना मिलती है। दशमलव दोहरता है: 2/3 का मान 0.666… है, जिसे आम तौर पर 0.66 भी लिखा जाता है, और 2.5/3 का मान 0.833… है। सही स्कोर निकालते समय हर गलती पर दशमलव को बीच में काटने के बजाय भिन्न या पूरा मान रखें और अंत में उत्तर को दो दशमलव तक लिखें।

पेपरसवालकुल मार्क्सहर सवाल के मार्क्सहर गलत उत्तर पर कटौती
GS-I10020022/3 = 0.666…
CSAT802002.52.5/3 = 0.833…

UPSC नेगेटिव मार्किंग कैलकुलेटर का फ़ॉर्मूला क्या है?

दोनों पेपरों के लिए एक ही मूल फ़ॉर्मूला काम करता है: स्कोर = सही उत्तर × हर सवाल के मार्क्स − गलत उत्तर × हर सवाल के मार्क्स का 1/3। खाली सवाल का योगदान 0 रहता है, इसलिए उसे जोड़ने या घटाने की ज़रूरत नहीं होती। फिर भी सही, गलत और खाली सवालों का जोड़ पेपर के कुल सवालों के बराबर होना चाहिए; इससे गिनती की गलती पकड़ में आती है। GS-I का फ़ॉर्मूला 2 × सही − 2/3 × गलत और CSAT का फ़ॉर्मूला 2.5 × सही − 2.5/3 × गलत है। मिसाल के लिए, GS-I में 40 सही और 10 गलत उत्तर हों तो स्कोर 80 − 6.666… = 73.333… बनेगा। यह केवल कच्चे स्कोर का हिसाब है, GS-I कट-ऑफ का अनुमान नहीं। दोनों पेपरों का हिसाब अलग रखें।

GS-I में स्कोर का पूरा उदाहरण कैसे निकालें?

मान लें किसी अभ्यर्थी ने GS-I के 100 में से 70 सवाल किए। इनमें 50 सही, 20 गलत और 30 खाली हैं। सही उत्तरों से 50 × 2 = 100 मार्क्स मिलेंगे। गलत उत्तरों पर 20 × 2/3 = 40/3 = 13.333… मार्क्स कटेंगे। इसलिए कच्चा स्कोर 100 − 13.333… = 86.666…, यानी लगभग 86.67 मार्क्स होगा। 30 खाली सवाल न कोई मार्क्स जोड़ते हैं, न घटाते हैं। यह उदाहरण यह भी बताता है कि हिसाब के अंत तक भिन्न रखना क्यों बेहतर है। यदि हर गलती पर सीधे 0.66 घटा दिया जाए तो उत्तर 86.80 आएगा, जो ठीक 1/3 वाले नियम का सही परिणाम नहीं है। यहाँ 70 सवाल करने की सलाह नहीं दी जा रही; यह केवल बताता है कि किसी भी प्रयास संख्या पर सही और गलत उत्तर मिलकर स्कोर कैसे बनाते हैं।

CSAT में नेगेटिव मार्किंग का हिसाब कैसे लगेगा?

मान लें किसी अभ्यर्थी ने CSAT के 80 में से 60 सवाल किए। इनमें 44 सही, 16 गलत और 20 खाली हैं। सही उत्तरों से 44 × 2.5 = 110 मार्क्स मिलेंगे। गलत उत्तरों पर 16 × 2.5/3 = 40/3 = 13.333… मार्क्स कटेंगे। इस तरह CSAT का कच्चा स्कोर 110 − 13.333… = 96.666…, यानी लगभग 96.67 मार्क्स होगा। CSAT केवल क्वालिफ़ाइंग पेपर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि इसमें नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। हर गलत उत्तर पर 2.5 मार्क्स का 1/3 कटता है। CSAT और GS-I का स्कोर अलग-अलग निकालें; एक पेपर के अतिरिक्त मार्क्स दूसरे में नहीं जुड़ते। किसी सवाल का कोई भरोसेमंद आधार न बने तो उसे खाली छोड़ना जबरन अंदाज़ा लगाने से बेहतर हो सकता है, क्योंकि खाली उत्तर पर कटौती नहीं है।

कितने सवाल करने चाहिए और कब छोड़ना चाहिए?

हर अभ्यर्थी के लिए कोई एक सुरक्षित प्रयास संख्या नहीं होती। सही फैसला औसत संभावित मार्क्स से निकलता है। 4 विकल्प और 1/3 कटौती वाले सवाल में सही होने की संभावना 25% हो तो लाभ और नुकसान बराबर होते हैं। चारों विकल्पों में बिल्कुल अंधा अंदाज़ा औसतन 0 देता है, पक्का लाभ नहीं। आपकी वास्तविक संभावना 25% से अधिक हो तो प्रयास का गणित पक्ष में है; 25% से कम हो तो छोड़ना बेहतर है। पेपर में तीन हिस्से बनाएं: पहले पूरे भरोसे वाले सवाल करें, फिर उन सवालों पर लौटें जहाँ विकल्प हटाने या गणना से भरोसा 25% से ऊपर जाता है, और बिना आधार वाले सवाल खाली छोड़ें। एक विकल्प हटाकर 3 में चुनाव करने पर संभावना 1/3 और 2 विकल्प बचने पर 1/2 होती है। गलत विकल्प हटाने या ज़्यादा भरोसा करने से यह अनुमान बिगड़ सकता है।

नेगेटिव मार्किंग से जुड़े कौन-से भ्रम स्कोर बिगाड़ते हैं?

कुछ आम धारणाएँ गलत हैं। भ्रम 1: CSAT क्वालिफ़ाइंग है, इसलिए इसमें नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। सच यह है कि गलत वस्तुनिष्ठ उत्तर पर वही 1/3 कटता है। भ्रम 2: हर गलती पर 1 मार्क कटता है। 2026 के ढाँचे में GS-I में 0.666… और CSAT में 0.833… मार्क कटता है। भ्रम 3: खाली सवाल पर भी कटौती होती है। UPSC साफ़ कहता है कि खाली उत्तर पर कोई कटौती नहीं है। भ्रम 4: दो विकल्प भरने से सवाल खाली नहीं माना जाएगा और नुकसान नहीं होगा। ऐसा उत्तर गलत माना जाता है और कटौती लगती है। भ्रम 5: सभी के लिए 80 सवाल करना सुरक्षित है। स्कोर केवल प्रयास संख्या से नहीं, सही उत्तरों के अनुपात से बनता है। भ्रम 6: प्रीलिम्स का 1/3 नियम मेन्स में भी चलता है। मेन्स वर्णनात्मक पेपर है, इसलिए वस्तुनिष्ठ सवालों वाली यह कटौती वहाँ लागू नहीं होती; पेपर के निर्देश फिर भी मानने होते हैं।

आधिकारिक स्रोत

इस गाइड के लिए उपयोग किए गए स्रोत दस्तावेज़ देखें।

  1. upsc.gov.in
  2. upsc.gov.in
  3. upsc.gov.in
  4. upsc.gov.in
  5. upsc.gov.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या UPSC CSAT में नेगेटिव मार्किंग होती है?

हाँ। CSAT के 2.5 मार्क्स वाले सवाल का गलत उत्तर देने पर 1/3 यानी 0.833… मार्क कटता है। खाली उत्तर पर कोई कटौती नहीं होती।

GS-I में एक गलत उत्तर पर कितने मार्क्स कटते हैं?

GS-I का एक सवाल 2 मार्क्स का है, इसलिए गलत उत्तर पर 2/3 यानी 0.666… मार्क कटता है। इसे लगभग 0.67 भी लिखा जाता है।

क्या UPSC प्रीलिम्स में सवाल खाली छोड़ने पर मार्क्स कटते हैं?

नहीं। जिस सवाल में कोई उत्तर नहीं भरा गया हो, उस पर UPSC कोई कटौती नहीं करता। उससे न मार्क्स मिलते हैं, न मार्क्स घटते हैं।

क्या दो विकल्प भरने पर उत्तर गलत माना जाता है?

हाँ। एक से अधिक विकल्प भरने पर उत्तर गलत माना जाता है, भले उनमें सही विकल्प भी हो। उस सवाल पर वही 1/3 कटौती लगती है।

क्या UPSC मेन्स में भी 1/3 नेगेटिव मार्किंग होती है?

नहीं। 1/3 का नियम वस्तुनिष्ठ पेपर में गलत उत्तरों के लिए है। UPSC मेन्स वर्णनात्मक पेपर है, इसलिए प्रीलिम्स वाली यह कटौती वहाँ लागू नहीं होती।